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गिरिराज सिंह की यात्रा ने बिहार बीजेपी में करा दिया बड़ा घमासान! जानिए क्या है पूरा मामला

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हिंदुओं को संगठित करने के लिए बिहार में 'हिंदू स्वाभिमान यात्रा' निकालने वाले हैं। इसको लेकर अब सियासी घमासान NDA के अंदर ही छिड़ा है। एक तरफ जेडीयू ने इस यात्रा पर सवाल खड़े किए है तो वही दूसरी तरफ बीजेपी ने इस यात्रा से किनारा कर लिया है।

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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हिंदुओं को संगठित करने के लिए बिहार में 'हिंदू स्वाभिमान यात्रा' निकालने वाले हैं। इसको लेकर अब सियासी घमासान NDA के अंदर ही छिड़ा है। एक तरफ जेडीयू ने इस यात्रा पर सवाल खड़े किए है तो वही दूसरी तरफ बीजेपी ने इस यात्रा से किनारा कर लिया है। लेकिन पार्टी के लोग गिरिराज सिंह की यात्रा में व्यक्तिगत तौर पर शामिल हो सकते हैं। इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रम पर बिहार में मुख्य विपक्षी दल यानी राजद और कांग्रेस को इस यात्रा की आलोचना करने का पूरा मौका मिल गया है। 


दरअसल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हिंदुओं को संगठित और सशक्त करने के उद्देश्य से 'हिंदू स्वाभिमान यात्रा' की शुरुआत 18 अक्टूबर को भागलपुर से करने वाले हैं जो राज्य के कई अलग-अलग शहरों से होकर गुजरेगी जिसमें कई मुस्लिम बाहुल्य इलाके भी शामिल है। इनमें कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज है। जहां मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी है। इस यात्रा को लेकर गिरिराज सिंह ने दावा किया था कि उनकी यह यात्रा हिंदुओं को संगठित करने के साथ-साथ उन्हें सशक्त बनाने की है जब राजद नेता पार्टी के नेता तेजस्वी यादव मुसलमानों को जोड़ने के लिए यात्रा कर सकते हैं तो उन्हें हिंदुओं की स्वाभिमान यात्रा से दिक्कत क्यों है। 


गिरिराज की यात्रा पर किसने क्या कहा ?

गिरिराज सिंह के द्वारा निकाले जाने वाली इस यात्रा का जहां एक तरफ बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने साफ़तौर पर कहा है कि गिरिराज सिंह की यात्रा समाज को लड़ाने की यात्रा है, अगर इन लोगों ने काम किया होता तो उपलब्धि की यात्रा निकालते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस ने भी इस यात्रा का पुरजोर विरोध करते हुए गिरिराज सिंह की मनसा पर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी तरफ इस यात्रा को लेकर बीजेपी ने भी अपना पल्ला झाड़ने हुए खुद को इस यात्रा से पूरी तरीके से अलग कर लिया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल की माने तो यह यात्रा गिरिराज सिंह की व्यक्तिगत पहल है, पार्टी इस यात्रा का हिस्सा नहीं है हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी पार्टी का सदस्य अगर व्यक्तिगत, अपनी स्वेच्छा से इस यात्रा में शामिल होता है तो इससे पार्टी को कोई एतराज नहीं होगा। इससे पहले एनडीए में शामिल नीतीश कुमार की जेडीयू ने भी इस यात्रा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने कहा है कि देश में संविधान है, संविधान शपथ दिलाता है कि धर्म और जाति से ऊपर उठकर काम करेंगे। यही शपथ लेकर लोग संसदीय जीवन और विधायक जीवन में काम करते हैं। ऐसे में एक हाथ में हिंदू स्वाभिमान यात्रा रख लीजिए और दूसरे में संविधान की शपथ की धज्जियां बनाने वाले कागजात को तो लोगों को देखने में काफी अच्छा लगेगा। हमें सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना है जो हमारी पूंजी है। इसके साथ ही पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी इस पूरे यात्रा को लेकर के कहा है कि जब बिहार में सभी लोग सुरक्षित और सांप्रदायिक सद्भावना कायम है तो इस तरह की यात्रा की निकालने की जरूरत क्यों पड़ी। 


गिरिराज सिंह ने बताया था क्यों है इस यात्रा की ज़रूरत 

हिंदू स्वामिभान यात्रा को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा थाकि "हिंदुओं ने ताजिया पर एक भी पत्थर कहीं नहीं फेंका लेकिन हमारे दुर्गा पूजा से लेकर सस्वती पूजा के विसर्जन के दौरान पत्थर फेंके जाने की घटना हमेशा सामने आती है। उनका कहा है कि हम आज के अमय में हिंदुओं को संदेश देना चाहते है कि "वे बंटोगे तो कटोगे का संदेश देना चाहते हैं और संगठित हिन्दू, सशक्त हिन्दू का संदेश देना चाहते हैं।"

ग़ौरतलब है कि अगले साल बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं ऐसे में गिरिराज सिंह की इस हिंदू स्वाभिमान यात्रा को लेकर कई मायने भी निकल जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए जहां भारतीय जनता पार्टी हिंदू वोट को साधने की कोशिश कर रही है तो वहीं एनडीए में शामिल जदयू समेत तमाम विपक्षी दल भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं कि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।
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