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गुलाम नबी आजाद ने सुझाया पाक‍िस्‍तान को घुटनों पर लाने का फॉर्मूला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सुझाव दिया कि देश की एकजुटता दिखाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. इसके अलावा पीएम मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि कहा कि पाकिस्तान पर कार्रनाई का निर्णय प्रधानमंत्री पर छोड़ देना चाहिए.

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पातकिस्तान की झूठी हेकड़ी निकालने का सुझाव दिया है. उन्‍होंने कहा कि पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए कि दुश्मन का नुकसान हो, लेकिन भारत को कोई क्षति न पहुंचे. यानी की साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. क्या कहा है और क्या रणनीति बनाई है गुलाम नबी आज़ाद ने आइये बताते है आपको.


ये हमले हिंदू-मुस्लिम भाईचारे पर अटैक

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गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि हाल के आतंकी हमले के बाद कश्मीर के मुसलमानों ने सड़कों पर उतरकर आतंकवाद के खिलाफ हल्ला बोला. उन्होंने पहलगाम टेरर अटैक का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीर के लोगों ने इसे न केवल अपनी अर्थव्यवस्था और धर्म, बल्कि कश्मीरियत पर हमला माना. जिसका मतलब हिंदू-मुस्लिम भाईचारा है. आतंकियों ने धर्म के आधार पर निशाना बनाया, जिससे कश्मीरी जनता में गुस्सा भड़क उठा. आजाद ने इसे पाकिस्तान के लिए एक बड़ा जवाब करार दिया. उन्होंने कहा, पाकिस्तान के आर्मी चीफ जिस तरह धर्म के आधार पर बयानबाजी करते हैं, वैसा कोई सिपाही भी नहीं बोलता। कश्मीर के लोगों का सड़कों पर उतरना उनके लिए हजार एटम बम के बराबर जवाब था.

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सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाने की सलाह

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गुलाम नबी आजाद ने सुझाव दिया कि देश की एकजुटता दिखाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. उन्होंने कहा, संसद सबसे बेहतर मंच है, जहां सभी दल एकजुट होकर प्रस्ताव पारित करें और सरकार को ताकत दें. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सत्र में किसी भी दल को राजनीति नहीं करनी चाहिए. उनका मानना है कि एक देश और एक दुश्मन की छवि पेश करने के लिए संसद का मंच आदर्श है.


अलग रणनीति की जरूरत: आजाद
गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए एक अलग रणनीति की बात कही. उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य, राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया को एक ही पेज पर होना चाहिए. कभी-कभी ये चारों अलग-अलग दिशाओं में काम करते हैं, जो देश को नुकसान पहुंचाता है. आजाद ने कांग्रेस नेतृत्व की भी तारीफ की. उन्होंने कहा, कांग्रेस ने इधर-उधर बयान देने वालों को डांट-डपट कर सही किया. बता दें कि कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं की तरफ़ से टेरर हमले पर सरकार के कदम पर सवाल उठाए जा रहे थे. जिसपर राहुल-खरगे और राहुल ने उनको हिदायत दी कि वो ऐसा न करें, पार्टी लाइन से अलग बयानबाज़ी न करें.

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पीएम पर भरोसा: आजाद
पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आज़ाद ने पीएम मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री पर छोड़ देना चाहिए. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्रवाई ऐसा ही होनी चाहिए, जिसमें भारत का कोई नुकसान न हो और पाकिस्तान को सबक मिले. जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लोगों का गुस्सा और एकजुटता, साथ ही आजाद की रणनीतिक सलाह, इस मुद्दे पर देश के लिए एक मजबूत संदेश है.


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