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'गजवा-ए-हिंद की साजिश...', मुंबई के पास हलाल टाउनशिप प्रोजेक्ट पर विवाद, आयोग ने सरकार को भेजा नोटिस

मुंबई के करीब नेरल में प्रस्तावित 'हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप' प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का एक प्रचार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक जगत से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.

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सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र से आई एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में एक महिला हिजाब पहने हुए दिखाई देती है, जो हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप को "समान विचारधारा वाले परिवारों" के लिए एक "प्रामाणिक सामुदायिक जीवन" और "हलाल पर्यावरण" में बच्चों की सुरक्षित परवरिश का वादा करती है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप मामले को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

राष्ट्र के भीतर राष्ट्र बनाने की कोशिश 

वायरल वीडियो में एक महिला हिजाब पहने हुए दिखाई देती है, जो टाउनशिप को "समान विचारधारा वाले परिवारों" के लिए एक "प्रामाणिक सामुदायिक जीवन" और "हलाल पर्यावरण" में बच्चों की सुरक्षित परवरिश का वादा करती है. वीडियो में नमाज स्थल और सामुदायिक सभाओं के लिए सुविधाओं का भी जिक्र है, जो पैदल दूरी पर ही उपलब्ध होंगी. इस प्रचार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए इसे "राष्ट्र के भीतर राष्ट्र" करार दिया और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करने की बात कही.

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शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने इस प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने और प्रोजेक्ट की जांच की मांग की है. वहीं, बीजेपी प्रवक्ता अजित चव्हाण ने इसे "गजवा-ए-हिंद" की साजिश करार देते हुए कहा कि इस तरह के प्रोजेक्ट मुंबई या महाराष्ट्र में स्वीकार्य नहीं हैं. उन्होंने इसे संविधान के लिए चुनौती बताते हुए डेवलपर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

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गंभीर मानवाधिकार मुद्दा, NHRC ने मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस प्रोजेक्ट को संविधान के समानता और भेदभाव-निषेध के सिद्धांतों का उल्लंघन मानते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बताया. NHRC ने महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने किन प्रावधानों के तहत इस प्रोजेक्ट को लाइसेंस दिया.

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आयोग ने दो सप्ताह में जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है. प्रियंक कानूनगो ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "यह विज्ञापन नहीं, विष-व्यापन है. यह टाउनशिप केवल एक धर्म विशेष के लिए बनाई जा रही है, जो भारत की संप्रभुता और एकता के लिए खतरा है." इस प्रोजेक्ट ने सामाजिक स्तर पर भी तीखी बहस छेड़ दी है. कुछ लोगों का कहना है कि यह टाउनशिप धार्मिक आधार पर सामुदायिक अलगाव को बढ़ावा देती है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है.

इस पूरे विवाद को लेकर सोशल मीडिया अब दो धड़ों बंटता नजर आ रहा है. कुछ लोग सवालव उठा रहे हैं कि एक RERA अप्रूव्ड सोसाइटी के लिए नोटिस जारी करना कहां तक सही है. लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर प्रियांक कानूनगो क्यों और किसके इशारे पर सरकार को टारगेट कर रहे हैं.

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