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गढ़चिरौली: पुलिस-एसआरपीएफ ने माओवादी स्मारक ध्वस्त किए, ग्रामीणों संग किया पौधरोपण

पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने कहा कि गढ़चिरौली पुलिस बल का उद्देश्य नागरिकों को माओवादियों के आतंक से मुक्त कराना है. माओवादी स्मारकों का समाज में कोई स्थान नहीं है और किसी को भी ऐसे अवैध निर्माण में भाग नहीं लेना चाहिए.

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गढ़चिरौली जिले में पुलिस और एसआरपीएफ की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मौजा कटेझरी और मर्मा जंगलों में माओवादियों द्वारा बनाए गए दो स्मारकों को नष्ट कर दिया. ये स्मारक करीब 2–3 साल पुराने थे और अतीत में माओवादी हिंसा के प्रतीक रहे हैं.

पुलिसने माओवादियों के स्मारक किए ध्वस्त 

पुलिस और एसआरपीएफ की संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान के दौरान इन स्मारकों को चिन्हित किया और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्हें ध्वस्त कर दिया. इसके बाद, पुलिस ने स्थानीय नागरिकों की मदद से स्थल पर पौधरोपण कर शांति और सुरक्षा का संदेश दिया.

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इस मौके पर पुलिस टीम ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि वो माओवादियों के बहकावे में न आएं और गांव के विकास में सहयोग करें.

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पुलिस का उद्देश्य नागरिकों को माओवादियों के आतंक से मुक्त कराना

पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने कहा कि गढ़चिरौली पुलिस बल का उद्देश्य नागरिकों को माओवादियों के आतंक से मुक्त कराना है. माओवादी स्मारकों का समाज में कोई स्थान नहीं है और किसी को भी ऐसे अवैध निर्माण में भाग नहीं लेना चाहिए.

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पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल के नेतृत्व में माओवादियों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई में एम रमेश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अभियान), सत्य साईं कार्तिक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अहेरी), गोकुल राज जी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (प्रशासन), अनिकेत हिरडे, सहायक पुलिस अधीक्षक (धनोरा) आदि शामिल रहे.

इससे पहले गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों को मिली थी बड़ी सफलता 

इससे पहले 24 सितंबर को महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरौली में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली थी. जिले में 6 माओवादियों ने महाराष्ट्र की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला के सामने आत्मसमर्पण किया था. ये सभी माओवादी लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और कई हिंसक घटनाओं में शामिल थे. आत्मसमर्पण करने वालों पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से कुल 62 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था.

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पुलिस की जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में भीमन्ना उर्फ वेंकटेश उर्फ सुखलाल मुत्त्या कुलमेथे, उनकी पत्नी विमलक्का सडमेक, इनके साथ एक कमांडर, दो प्रोटेक्शन पार्टी कमिटी मेंबर्स (पीपीसीएम), और एक एरिया कमिटी मेंबर (एसीएम) भी शामिल रहे.

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