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भोपाल की 2 करोड़ की ठगी से लेकर दिल्ली ब्लास्ट तक, सिद्दीकी ब्रदर्स की गिरफ्तारी ने खोली पुरानी फाइलें

जावेद और हमूद सिद्दीकी ने 1997 से 2001 के बीच भोपाल में लोगों को ठगने का काम किया. उन्होंने एक चिटफंड कंपनी का ऑफिस खोला और लोगों को लालच दिया कि उनके पैसे दोगुने कर देंगे. उन्होंने मुस्लिम लोगों से ठगे पैसों को आतंकी साजिश में लगाया था. 2001 तक जनता को चूना लगाकर दोनों भाई फरार हो गए थे.

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दिल्ली ब्लास्ट के आतंकियों को पनाह देने वाली अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी और उसके भाई हमूद सिद्दीकी के खिलाफ पहले से ही भोपाल में 2 करोड़ रुपए की ठगी का केस दर्ज है. यह मामला करीब 24 साल पुराना है. दोनों भाई लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर थे और फरार चल रहे थे. वहीं, दिल्ली ब्लास्ट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को जावेद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था.

1997–2001 के बीच भोपाल में चिटफंड के नाम पर ठगी

जानकारी के मुताबिक, जावेद और हमूद सिद्दीकी ने 1997 से 2001 के बीच भोपाल में लोगों को ठगने का काम किया. उन्होंने एक चिटफंड कंपनी का ऑफिस खोला और लोगों को लालच दिया कि उनके पैसे दोगुने कर देंगे. उन्होंने मुस्लिम लोगों से ठगे पैसों को आतंकी साजिश में लगाया था. 2001 तक जनता को चूना लगाकर दोनों भाई फरार हो गए थे.

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शाहजहानाबाद और तलैया थानों में कई FIR दर्ज

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इस बीच तलैया और शाहजहानाबाद थाने में शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी. आरोप है कि गैस पीड़ितों के पैसे भी ठगी में शामिल थे. जावेद सिद्दीकी ने इस मामले में अग्रिम जमानत ले रखी थी, जबकि उनके भाई हमूद सिद्दीकी को कोर्ट ने पहले ही बरी कर दिया था. इसके अलावा, इनके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में भी धोखाधड़ी और चिटफंड के कई केस दर्ज हैं.

15.32 लाख की ठगी का खुलासा

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बता दें कि प्रार्थी जुनेद कुरैशी ने 5 दिसंबर 1999 को शाहजहानाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कंपनी ने 1998 में उनके और अन्य लोगों के जमा किए पैसे हड़प लिए. जुनेद ने बताया था कि उसने 15 जून और 15 नवंबर 1998 को कुल 75,000 रुपए जमा किए थे, लेकिन कंपनी के पदाधिकारी कार्यालय बंद कर फरार हो गए.

शिकायत पर एफआईआर 7 दिसंबर 1999 को दर्ज की गई. जांच में पता चला कि कुल 147 लोग प्रभावित हुए और लगभग 15.32 लाख रुपए की ठगी हुई. प्रकरण में कुल 24 आरोपी थे, जिनमें हमूद सिद्दीकी, हुस्ना सिद्दीकी, सूबा सिंह, शाहबुद्दीन चौधरी, मसूद अहमद, जेबा सिद्दीकी, परवीन सुल्तान और अन्य शामिल थे.

पुलिस ने किया था इनाम घोषित 

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जांच और अभियोग पत्र के अनुसार, कुछ आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि अधिकांश फरार हैं. फरार आरोपियों की पकड़ के लिए पुलिस लगातार उनके पते पर रेड डाल रही है और सूचना देने वाले को 5,000 से 10,000 रुपए का ईनाम घोषित किया गया है. फरार आरोपियों की संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन कई के पास कोई चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड नहीं मिला.

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इस मामले में न्यायालय में पेशी 29 अगस्त 2019 को तय थी. उस दौरान 24 आरोपियों में से एक की मौत हो चुकी थी और एक आरोपी के खिलाफ प्रकरण वापस कर दिया गया था. बाकी आरोपियों में कुछ को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जबकि 16 आरोपी फरार थे.

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