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सुदर्शन चक्र से गोल्डन होराइजन तक… PM मोदी के इजरायल दौरे का असली मकसद कामयाब!

पीएम मोदी की इजरायल यात्रा केवल औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रक्षा सहयोग की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. तेल अवीव पहुंचते ही संकेत मिले कि दोनों देश उन्नत और एक्सक्लूसिव सैन्य तकनीक साझा करने की तैयारी में हैं.

Source X/ @narendramodi
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा महज औपचारिकता नहीं है. यह दौरा भारत की रक्षा नीति में बड़े बदलाव की जमीन तैयार कर रहा है. इस बार चर्चा केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अत्याधुनिक और एक्सक्लूसिव तकनीकों के हस्तांतरण पर है जिन्हें इजरायल ने अब तक किसी अन्य देश के साथ साझा नहीं किया.

इजरायली संसद Knesset में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने अनिश्चित वैश्विक माहौल का जिक्र करते हुए मजबूत रक्षा साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया. उनका संकेत साफ था कि भारत भरोसेमंद भागीदारों के साथ दीर्घकालिक सुरक्षा ढांचा खड़ा करना चाहता है.

2035 तक ‘सुदर्शन चक्र’ का लक्ष्य

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भारत सरकार 2035 तक देश के लिए बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा कवच तैयार करने की योजना पर काम कर रही है, जिसे ‘सुदर्शन चक्र’ नाम दिया गया है. भारत की 15,106 किमी लंबी भूमि सीमा और 7,516 किमी तटरेखा को सुरक्षित करना बड़ी चुनौती है. मौजूदा रूसी S-400, इजरायली बराक और स्वदेशी आकाश प्रणाली के साथ अब नई तकनीकों को जोड़ने की तैयारी है. सूत्र बताते हैं कि ड्रोन हमलों और लंबी दूरी की मिसाइलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत इजरायल की Iron Dome और Iron Beam जैसी प्रणालियों में रुचि रखता है. खास बात यह है कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इनका निर्माण भारत में हो सकता है, जिससे तकनीकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी.

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डिफेंस सिस्टम में क्या होगा खास

संभावित समझौतों में इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (Israel Aerospace Industries) का ‘एरो’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम और राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) की ‘डेविड्स स्लिंग’ शामिल हो सकती है, जो 300 किमी तक की मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में सक्षम है। लेजर आधारित आयरन बीम की प्रति शॉट लागत बेहद कम बताई जाती है, जिससे यह किफायती और प्रभावी विकल्प बनता है.

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आक्रामक क्षमता में इजाफा

सिर्फ रक्षा नहीं, आक्रामक ताकत बढ़ाने पर भी ध्यान है. ‘रैम्पेज’ एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, ‘आइस ब्रेकर’ नेवल क्रूज मिसाइल और सुपरसोनिक ‘एयर लोरा’ जैसे विकल्प चर्चा में हैं. इनसे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और तेज प्रहार संभव होगा. रक्षा विशेषज्ञों की नजर ‘गोल्डन होराइजन’ पर भी है। यह मच 5 की रफ्तार वाली मिसाइल बताई जा रही है, जिसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है. तुलना करें तो ब्रह्मोस (BrahMos) मच 3 की गति से चलती है. ऐसे में गोल्डन होराइजन दुश्मन के बंकरों और संवेदनशील ठिकानों के खिलाफ गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

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बताते चलें कि रक्षा सौदों से आगे बढ़कर एक व्यापक रणनीतिक गठबंधन की चर्चा भी है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने संकेत दिए हैं कि भारत को एक बड़े ‘षट्कोणीय गठबंधन’ का अहम हिस्सा माना जा रहा है. इसमें अरब देश, अफ्रीकी देश, ग्रीस, साइप्रस और भारत शामिल हो सकते हैं. मकसद है कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अस्थिरता के खिलाफ साझा मोर्चा बनाना. जानकार मानते हैं कि अगर ये समझौते अंतिम रूप लेते हैं, तो भारत की रक्षा रणनीति रक्षात्मक ढांचे से आगे बढ़कर तकनीकी बढ़त पर आधारित होगी। यह यात्रा आने वाले दशक में भारत की सुरक्षा संरचना को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है.

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