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SIR से जेएनयू नारेबाजी तक, ममता सरकार पर अग्निमित्रा पॉल का तीखा हमला
अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि ममता सरकार के कार्यकाल में वोटर कार्ड और जॉब कार्ड में भारी भ्रष्टाचार हुआ. मजदूरों को भुगतान नहीं मिला, जबकि टीएमसी के कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका, उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने, जेएनयू कैंपस में प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के खिलाफ लगे नारों सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी.
अग्निमित्रा पॉल ने ममता सरकार पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्निमित्रा पॉल ने आईएएनएस से कहा कि ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से मुख्यमंत्री रहते हुए लगातार करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग करती रही हैं. राज्य सरकार ने महंगे वकीलों पर जनता का पैसा खर्च किया और कई बार सुप्रीम कोर्ट से फटकार भी खाई. जब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं, तब वे बांग्लादेश से घुसपैठ का विरोध करती थीं, लेकिन आज वही ममता एसआईआर और फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रही हैं.
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‘58 लाख फर्जी वोटरों के सहारे जीते चुनाव’
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उन्होंने दावा किया कि जिन 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, उन्हीं के सहारे टीएमसी ने 2011 से 2024 तक चुनाव जीते. उनके अनुसार, इन नामों को हटाना न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे देश के हित में है.
राज्य को कर्ज में डुबोने का आरोप
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अग्निमित्रा पॉल ने यह भी आरोप लगाया कि ममता सरकार ने राज्य को कर्ज में डुबो दिया है और संसाधनों का गलत प्रबंधन किया है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2026 के बाद ममता बनर्जी सत्ता में नहीं रहेंगी.
जेएनयू नारेबाजी पर सख्त टिप्पणी
जेएनयू कैंपस में हुई नारेबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारे लगाने वालों का एजेंडा सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं है. ऐसे नारे देश की सुरक्षा को कमजोर करने और भारत को तोड़ने की साजिश का संकेत देते हैं.
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अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि ऐसे तत्वों के लिए जेल भी कम सजा है और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से उन्होंने न्यायपालिका से सख्त से सख्त सजा देने की अपील की.
विकसित भारत जी राम जी बिल पर बोलते हुए अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि यह केंद्र सरकार की अत्याधुनिक योजना हैं. उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए जाएंगे, जबकि जंगल क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के लोगों को अतिरिक्त 25 दिन मिलेंगे, यानी कुल 150 दिन का रोजगार. भुगतान हर 14 दिन में किया जाएगा.
वोटर कार्ड और जॉब कार्ड में भ्रष्टाचार का आरोप
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अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया कि ममता सरकार के कार्यकाल में वोटर कार्ड और जॉब कार्ड में भारी भ्रष्टाचार हुआ. मजदूरों को भुगतान नहीं मिला, जबकि टीएमसी के कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया. चार जिलों में अनियमितताएं सामने आईं, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
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उन्होंने कहा कि 2026 से शुरू होने वाली नई योजनाओं में एआई और जियो-टैगिंग का इस्तेमाल होगा, जिससे लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा और शहरी व ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों को इसका फायदा मिलेगा.