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स्कूल बस से लेकर टैक्सी तक, हरियाणा में तय हुई वाहनों की उम्र सीमा, नायब  सरकार का बड़ा फैसला

Haryana Vehicles Rules: अब कोई भी वाहन अपनी पहली रजिस्ट्रेशन की तारीख से तय की गई उम्र पूरी करने के बाद सड़क पर नहीं चल सकेगा. यह कदम आम लोगों की सुरक्षा, बढ़ते प्रदूषण और पुराने वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

Image Source: Social Media
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Age Limit for Vehicles Fixed in Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य में चलने वाली सभी तरह की परिवहन गाड़ियों की अधिकतम उम्र तय करने का बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले का असर बसों, स्कूल वाहनों, टैक्सी, टूरिस्ट बसों और माल ढोने वाले वाहनों पर सीधे तौर पर पड़ेगा. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी वाहन अपनी पहली रजिस्ट्रेशन की तारीख से तय की गई उम्र पूरी करने के बाद सड़क पर नहीं चल सकेगा. यह कदम आम लोगों की सुरक्षा, बढ़ते प्रदूषण और पुराने वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

कैबिनेट बैठक में हुआ फैसला, ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी


यह निर्णय 8 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था. अब परिवहन विभाग ने इसका ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. सरकार ने इस पर लोगों और संबंधित संगठनों से 7 दिन के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. अंतिम फैसला इन्हीं सुझावों को देखने के बाद लागू किया जाएगा.

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टूरिस्ट वाहनों के नियमों में सबसे बड़ा बदलाव


नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव टूरिस्ट परमिट वाली गाड़ियों में किया गया है. एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले टूरिस्ट वाहन 12 साल तक चल सकेंगे, जबकि डीजल से चलने वाले टूरिस्ट वाहनों की अधिकतम उम्र 10 साल तय की गई है. वहीं एनसीआर से बाहर के इलाकों में पेट्रोल, सीएनजी और डीजल सभी तरह के टूरिस्ट वाहन 12 साल तक चल सकेंगे. इससे साफ है कि सरकार एनसीआर में डीजल वाहनों को जल्दी हटाने के पक्ष में है.

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स्कूल बसों और अन्य गाड़ियों के लिए भी तय हुई सीमा


सरकार ने स्कूल बसों, रोडवेज बसों, निजी बसों, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज और माल ढोने वाले वाहनों के लिए भी उम्र सीमा तय कर दी है. पेट्रोल, सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अन्य साफ ईंधन से चलने वाले वाहन 15 साल तक चल सकेंगे. लेकिन एनसीआर क्षेत्र में डीजल से चलने वाले इन वाहनों की अधिकतम उम्र सिर्फ 10 साल होगी. एनसीआर से बाहर डीजल वाहनों को 15 साल तक चलने की अनुमति होगी. इसका मतलब यह है कि एनसीआर में स्कूल की डीजल बसें 10 साल से ज्यादा पुरानी नहीं हो सकेंगी.

पुराने वाहनों से बढ़ता प्रदूषण और खतरा


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सरकार का कहना है कि पुराने वाहन ज्यादा धुआं छोड़ते हैं और अक्सर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते. तकनीकी खराबी के कारण ऐसे वाहनों से हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है. एनसीआर क्षेत्र में पहले ही प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा है, ऐसे में 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगाना पर्यावरण और लोगों की सेहत दोनों के लिए जरूरी माना जा रहा है.

स्कूलों और वाहन संचालकों पर पड़ेगा सीधा असर


इस फैसले का सबसे ज्यादा असर स्कूलों पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें पुराने वाहनों की जगह नए और सुरक्षित वाहन खरीदने होंगे. टूरिस्ट कंपनियों और बस ऑपरेटरों को भी अपनी डीजल गाड़ियों को समय रहते बदलना पड़ेगा, वरना परमिट नवीनीकरण में परेशानी हो सकती है. खासकर एनसीआर रूट पर चलने वाले डीजल वाहन चालकों को 10 साल पूरे होते ही गाड़ी सड़क से हटानी होगी.

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7 दिन के भीतर दे सकते हैं सुझाव और आपत्तियां

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फिलहाल यह नियम ड्राफ्ट के तौर पर जारी किया गया है. यदि किसी व्यक्ति, चालक यूनियन, स्कूल प्रबंधन या परिवहन से जुड़े संगठन को इस पर कोई आपत्ति या सुझाव देना है, तो वह 7 दिन के भीतर परिवहन विभाग को भेज सकता है. सरकार का कहना है कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम लागू किया जाएगा. यह फैसला हरियाणा में सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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