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लव जिहाद से लेकर ISI तक... छांगुर बाबा की करतूतें बेनकाब, ATS-ED की जांच में बड़ा खुलासा!

उत्तर प्रदेश एटीएस और ईडी की जांच में छांगुर बाबा के धर्मांतरण रैकेट से जुड़े खतरनाक खुलासे सामने आए हैं. यह मामला सिर्फ धर्मांतरण का नहीं, बल्कि भारत में आईएसआई के लिए जासूसी नेटवर्क खड़ा करने और सांप्रदायिक जहर फैलाने की साजिश से जुड़ा है. बाबा ने हिंदू लड़कियों को फंसाकर उनका धर्म बदला, निकाह कराया और फिर नेपाल के जरिए आईएसआई एजेंटों से जोड़ने की योजना बनाई. जांच में पाकिस्तान दूतावास में हुई गोपनीय बैठक और विदेशी फंडिंग के सबूत भी मिले हैं.

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उत्तर प्रदेश एटीएस और ईडी की संयुक्त जांच ने 12 जून 2025 को एक ऐसे संगठित अपराध का खुलासा किया, जिसने पूरे देश को चौंका दिया. यह मामला सिर्फ अवैध धर्मांतरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी जड़ें राष्ट्रविरोधी साजिशों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी जुड़ती नजर आईं. इस पूरे प्रकरण का केंद्र बिंदु है छांगुर बाबा, जो धर्म की आड़ में एक बड़ा षड्यंत्र रच रहा था.

भारत विरोधी एजेंडा था असली मकसद
छांगुर बाबा पर आरोप है कि उसने देश के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर उनका ब्रेनवॉश किया, फिर उन्हें इस्लाम कबूल करवाकर निकाह करवाने की साजिश रची. लेकिन इससे भी खतरनाक बात ये है कि इन लड़कियों को नेपाल में स्थित आईएसआई एजेंटों के साथ जोड़ा जाता था, जिससे वे जासूसी के नेटवर्क का हिस्सा बन सकें. जांच एजेंसियों को सूत्रों से जानकारी मिली है कि नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास में छांगुर के नेटवर्क से संपर्क साधने की कोशिश की गई. एक गोपनीय बैठक में इस एजेंडा पर चर्चा की गई. छांगुर बाबा ने नेपाल के जरिए ISI से सीधे जुड़ने का प्रयास किया और भारत में सांप्रदायिक विष फैलाने की योजना बनाई.

कोडवर्ड से चलता था पूरा गैंग 
एटीएस की रिपोर्ट में ख़ुलासा हुआ है कि छांगुर बाबा ने लव जिहाद के लिए 1000 मुस्लिम युवकों की एक टीम तैयार किया था. पिछले तीन वर्षों में उन्हें नियमित रूप से कैश पेमेंट दी गई. इन युवकों का काम था हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण के लिए मजबूर करना. सबसे चिंताजनक बात यह कि इस नेटवर्क को विदेशी फंडिंग के जरिए मजबूत किया गया. पूरी साजिश इतनी संगठित थी कि इसमें हर प्रक्रिया के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल होता था. लड़कियों को 'प्रोजेक्ट', ब्रेनवॉश को 'काजल करना', मिलने को 'दीदार कराना' और धर्मांतरण को 'मिट्टी पलटना' कहा जाता था. यह सब इसलिए ताकि कोई बाहरी व्यक्ति इस नेटवर्क को समझ न सके.

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करोड़ों की विदेशी फंडिंग का खुलासा
ईडी की जांच में अब तक छांगुर बाबा और उसके नेटवर्क से जुड़े 18 बैंक खातों की जानकारी मिली है. इन खातों में कुल 68 करोड़ रुपए जमा हुए हैं. केवल तीन महीनों में ही करीब 3 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए. इतना ही नहीं, इस साजिश में छांगुर की सबसे बड़ी राजदार नीतू वोहरा उर्फ नसरीन भी शामिल थी. उसके खाते में चार महीनों में 14 करोड़ रुपए आए, जिन्हें तुरंत निकाल भी लिया गया.

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योगी सरकार का सख़्त रुख
इस राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख़्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि भारत को तोड़ने की कोई भी कोशिश अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि इस नेटवर्क की पूरी जड़ तक पहुंचा जाए और इसमें शामिल हर व्यक्ति को कड़ी सजा मिले.

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गौरतलब है कि छांगुर बाबा का चेहरा अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है. धर्मांतरण के नाम पर देश को बांटने और कमजोर करने की जो कोशिश की गई थी, उसे यूपी एटीएस और ईडी की सतर्कता ने समय रहते पकड़ लिया. यह केस न सिर्फ धर्म और कानून का उल्लंघन है, बल्कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा पर सीधा हमला भी है. 

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