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ब्राजील से कोलंबिया तक… कई देशों की यात्रा पर राहुल गांधी हुए रवाना, जानें क्या है इस दौरे की बड़ी वजह

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दक्षिण अमेरिका के चार देशों की महत्वपूर्ण यात्रा शुरू की है. इस दौरान वे राजनीतिक नेताओं, विश्वविद्यालयों के छात्रों और व्यापारिक समुदाय से मुलाकात करेंगे. कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी ब्राजील और कोलंबिया में छात्रों से संवाद करेंगे और कई देशों के राष्ट्रपतियों व वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे. इ

Rahul Gandhi (File Photo)
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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दक्षिण अमेरिका के चार देशों की अहम यात्रा पर रवाना हो गए है. इस दौरे को कांग्रेस ने ऐतिहासिक महत्व का बताया है. पार्टी का मानना है कि यह यात्रा भारत और दक्षिण अमेरिका के पुराने संबंधों को और मजबूती देगी और नए अवसरों के द्वार खोलेगी. इस दौरान वे राजनीतिक नेताओं, विश्वविद्यालय के छात्रों और व्यापारिक समुदाय के साथ मुलाकात करेंगे. राहुल गांधी के विदेशी दौरे की जानकारी पार्टी की मीडिया और प्रचार विभाग के प्रभारी पवन खेड़ा ने साझा की है. 

विश्वविद्यालयों में छात्रों से करेंगे संवाद 

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जानकारी दी है कि राहुल गांधी इस दौरान राजनीतिक नेताओं, विश्वविद्यालय के छात्रों और व्यापारिक समुदाय के साथ संवाद करेंगे. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ब्राजील और कोलंबिया में विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ विचार-विमर्श करेंगे. माना जा रहा है कि इन संवादों के जरिए वे युवाओं से लोकतंत्र, शिक्षा और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे. राहुल गांधी कई देशों के राष्ट्रपतियों और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे.

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व्यापार नेताओं से भी होगी अहम मुलाकात 

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कांग्रेस ने बताया कि राहुल गांधी व्यापारिक नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे. अमेरिकी टैरिफ और बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच यह मुलाकात भारत के लिए नए व्यापार और साझेदारी के अवसर खोजने में मददगार साबित हो सकती है. पार्टी का कहना है कि दक्षिण अमेरिका में तकनीक, स्थिरता और संसाधनों के क्षेत्र में भारत के लिए बड़े मौके हैं. कांग्रेस ने इस यात्रा को गुट-निरपेक्ष आंदोलन और वैश्विक दक्षिण की एकजुटता से जोड़ते हुए कहा कि भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच दशकों से मजबूत रिश्ते रहे. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के इस दौर में राहुल गांधी की पहल इन संबंधों को आगे बढ़ाने में अहम कदम साबित होगी.

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बताते चलें कि पार्टी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी की यह यात्रा सिर्फ राजनीतिक या आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को भी नई ऊंचाई देगी. विश्वविद्यालयों में बातचीत से वैश्विक नेताओं की अगली पीढ़ी के साथ भारत के रिश्ते और मजबूत होंगे. हालांकि कांग्रेस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि राहुल गांधी किन-किन देशों की यात्रा करेंगे और यह दौरा कितने दिन का होगा. इसके बावजूद यह यात्रा विपक्ष की ओर से भारत की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को रेखांकित करने और वैश्विक साझेदारी को आकार देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.

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