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सादगी में बेमिसाल थे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, जानिए उनकी पसंदीदा कार का अनसुना क़िस्सा
देश के पूर्व प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री और कांग्रेस पपार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ मनमोहन सिंह 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। गुरुवार की रात राजधानी दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉ सिंह का विद्वान होने के साथ-साथ अपने शांत स्वभाव और सादगी के साथ-साथ कुशल नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाते थे।
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देश के पूर्व प्रधानमंत्री, अर्थशास्त्री और कांग्रेस पपार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ मनमोहन सिंह 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। गुरुवार की रात राजधानी दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉ सिंह का विद्वान होने के साथ-साथ अपने शांत स्वभाव और सादगी के साथ-साथ कुशल नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाते थे। उनके निजी जीवन से जुड़े कई ऐसे क़िस्से है जिसके चलते डॉ मनमोहन सिंह हमारे बीच न रहकर भी हम सभी की यादों के इतिहास के पन्ने में हमेशा दर्ज रहेंगे। अब उनके निधन के बाद उनसे जीवन से जुड़ी कई बातों को याद किया जा रहा है। इसमें सबसे रोचक क़िस्सा है उनकी पसंदीदा कार का, जैसे उनकी पसंदीदा कार – मारुति 800। वह कहते थे कि मुझे इसमें (लग्जरी कार) चलना पसंद नहीं, मेरी गड्डी तो मारुति 800 है।
मनमोहन सिंह के सुरक्षा गार्ड रहे असीम अरुण ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए एक दिलचस्प कहानी का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया कि मनमोहन सिंह को अपनी मारुति 800 से बेहद लगाव था। असीम अरुण ने लिखा, "मैं 2004 से लगभग तीन साल तक डॉ. मनमोहन सिंह का बॉडी गार्ड रहा। एसपीजी में प्रधानमंत्री की सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा होता है – क्लोज प्रोटेक्शन टीम और मुझे इस टीम का नेतृत्व करने का अवसर मिला था। यह वह टीम होती है, जो पीएम से कभी भी अलग नहीं होती और यदि कोई एक बॉडी गार्ड उनके साथ रह सकता है, तो वह वही व्यक्ति होता है।"असीम अरुण ने बताया, "डॉ. साहब के पास एक ही कार थी – मारुति 800। प्रधानमंत्री निवास में चमचमाती काली बीएमडब्ल्यू खड़ी रहती थी, लेकिन डॉ. मनमोहन सिंह हमेशा मुझे कहते थे, असीम, मुझे इस कार में चलना पसंद नहीं, मेरी गड्डी तो यह है (मारुति)।'
असीम ने आगे कहा कि मैं उन्हें समझाता था कि सर, यह गाड़ी आपके ऐश्वर्य के लिए नहीं है, इसके सिक्योरिटी फीचर्स एसपीजी के द्वारा निर्धारित किए गए हैं। लेकिन, जब कारकेड (सुरक्षा के लिए तैनात कारों का काफिला) के दौरान मारुति 800 सामने से गुजरती, तो वह हमेशा उसे एक नजर देखते। मानो वह संकल्प दोहरा रहे हों कि मैं एक मिडिल क्लास आदमी हूं और मेरी जिम्मेदारी है आम आदमी की चिंता करना। करोड़ों की गाड़ी प्रधानमंत्री की है, लेकिन मेरी तो यह मारुति है।" मनमोहन सिंह की ने हमेशा अपने जीवन को व्यक्तिगत आराम और भौतिकवाद से दूर रखा। उन्होंने हमेशा अपने कर्तव्यों का पालन किया। पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकाल और सादगी को हमेशा याद किया जाएगा।
हालांकि डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी सेवाओं के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया। 1987 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियां दीं। लेकिन क्या आप जानते हैं मनमोहन सिंह का कार्यकाल जहां उपलब्धियों से भरा रहा, वहीं कुछ विवाद भी हुए। 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला घोटाले जैसे मुद्दों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया। हालांकि, उनकी ईमानदारी और विनम्रता को किसी ने सवालों के घेरे में नहीं रखा। मनमोहन सिंह की नेतृत्व शैली हमेशा शांत, सुलझी और तथ्य-आधारित रही। उन्होंने कभी व्यक्तिगत प्रचार को प्राथमिकता नहीं दी। उनके सुधारों ने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने की नींव प्रदान की।
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