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हिंदूवादी नेताओं की गिरफ्तारी से इंकार, पूर्व ATS प्रमुख को मिली सजा! UPA सरकार पर सनसनीखेज आरोप

केपी रघुवंशी की जीवनी Troubleshooter में कांग्रेस राज पर कई सनसनीखेज दावे किए गए हैं. किताब में बताया गया है कि उन पर बाल ठाकरे और RSS नेता इंद्रेश कुमार की गिरफ्तारी के लिए दबाव डाला गया.

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पूर्व IPS और पूर्व ATS प्रमुख केपी रघुवंशी ने रिटायरमेंट के 10 साल बाद UPA सरकार पर सनसनीखेज दावा किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर पूर्व शिवसेवना प्रमुख बाल ठाकरे और RSS नेता इंद्रेश कुमार को अरेस्ट करने के लिए राजनीतिक दबाव डाला गया था, जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो इसकी कीमत चुकानी पड़ी थी. 

केपी रघुवंशी की जीवनी Troubleshooter में इन बातों का उल्लेख किया गया है. जो जितेंद्र दीक्षित ने लिखी है. जिसमें साल 2010 के मालेगांव ब्लास्ट का जिक्र किया गया है. किताब के मुताबिक, साल 2010 में रघुवंशी को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही महाराष्ट्र ATS प्रमुख पद से हटा दिया गया था. उस समय UPA सरकार के एक वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्री ने उन पर 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में RSS पदाधिकारी इंद्रेश कुमार को गिरफ्तार करने का दबाव डाला गया था, लेकिन केपी रघुवंशी ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए गिरफ्तार करने से इंकार कर दिया था. जिसके बाद मंत्री को ये भी लगा था कि केपी रघुवंशी आरोपियों के साथ मिले हुए हैं. 

राजनीतिक कारण से ट्रांसफर का दावा

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किताब में बताया गया कि साल 2010 में केपी रघुवंशी को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही महाराष्ट्र ATS प्रमुख पद से हटाकर ट्रांसफर कर दिया गया था. किताब Troubleshooter में बताया गया है कि ATS में अपनी पिछली तैनाती के दौरान रघुवंशी ने एक अन्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को अधिकारियों के लिए वर्कशॉप लेने के लिए बुलाया था. उस समय पुरोहित मिलिट्री इंटेलिजेंस में थे और रघुवंशी उन्हें ट्रेनिंग के लिए योग्य मानते थे. बाद में पुरोहित की गिरफ्तारी के बाद उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें रघुवंशी उनका स्वागत करते दिख रहे थे. इससे मंत्री के मन में शक बढ़ गया.

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‘छगन भुजबल ने किया था अपमानित’

किताब में केपी रघुवंशी का दावा है कि उन्हें ATS से हटाने की साजिश मंत्री ने ही बात न मानने पर रची थी. जीवनी Troubleshooter में यह भी बताया गया कि 1993 मुंबई दंगों के मामले में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की गिरफ्तारी को लेकर तत्कालीन महाराष्ट्र गृह मंत्री छगन भुजबल ने उन्हें अपमानित किया था. बताया जाता है कि साल 2000 में जब रघुवंशी ने कहा कि वे ठाकरे को गिरफ्तार नहीं कर सकते, तब भुजबल ने कहा कि रघुवंशी या सूर्यवंशी, तुम जो भी हो, बाल ठाकरे को गिरफ्तार करने से डर क्यों रहे हो?

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किताब में दावा है कि छगन भुजबल की धमकी के पीछे उनकी राजनीतिक मंशा और द्वेष छिपा हुआ था. किताब में कहा गया है कि 1991 में वे शिवसेना छोड़कर शरद पवार के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे. 1997 में शिवसैनिकों ने उनके बंगले पर हमला किया था, जिससे बचने के लिए उन्हें बाथरूम में बंद होना पड़ा था. इसलिए वे बाल ठाकरे की गिरफ्तारी चाहते थे. किताब Troubleshooter में यह भी दावा किया गया है कि महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने भी उन पर कार्रवाई के लिए दबाव डाला था. वह केपी रघुवंशी को दिल्ली भी लेकर गए थे. Troubleshooter में रघुवंशी के करियर की कई घटनाएं शामिल हैं. जिसमें नक्सल प्रभावित गढ़चिरोली का दौर, नेताओं, आतंकियों, गैंगस्टरों और अपने ही विभाग के अधिकारियों से टकराव के बारे में बताया गया है. 

कौन हैं केपी रघुवंशी? 

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केपी रघुवंशी (K. P. Raghuvanshi या Krishipal Raghuvanshi) एक प्रसिद्ध पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र कैडर से थे. वे 1980 बैच के IPS अधिकारी रहे और अपने 35 साल के करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे. 

  • केपी रघुवंशी महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के प्रमुख (चीफ) रहे 
  • 26/11 मुंबई हमलों (2008) के बाद हेमंत करकरे की शहादत के तुरंत बाद वे दोबारा ATS चीफ बने और आतंकी कसाब से पूछताछ सहित जांच में शामिल रहे 
  • 2006 मालेगांव ब्लास्ट मामले की जांच में भी प्रमुख भूमिका निभाई 
  • गढ़चिरौली में नक्सलवाद के खिलाफ C-60 कमांडो यूनिट की स्थापना में योगदान दिया
  • 2010 में ATS प्रमुख पद से हटाए गए (ट्रांसफर) और 2015 में महाराष्ट्र सिक्योरिटी फोर्स के डायरेक्टर जनरल के पद से रिटायर हुए
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