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भारत-EU रिश्तों को नई रफ्तार, बेल्जियम जा रहे विदेश मंत्री एस जयशंकर; जानें क्यों अहम है यह दौरा

विदेश मंत्री एस जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर बेल्जियम जा रहे हैं. ब्रसेल्स में वे ईयू विदेश मामलों की परिषद में हिस्सा लेंगे और यूरोपीय संघ के नेताओं व सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे.

S. Jaishankar (File Photo)
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर रविवार को बेल्जियम (Belgium) की अपनी यात्रा पर जाएंगे. विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार बेल्जियम की यात्रा पर वे European Union (ईयू) विदेश मामलों की परिषद में भाग लेंगे और यूरोपीय संघ के नेतृत्व और बेल्जियम के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे.

दो दिवसीय दौरे पर ब्रसेल्स पहुंचेंगे

विदेश मंत्री एस जयशंकर दो दिवसीय दौरे पर बेल्जियम पहुंच रहे हैं. 16 मार्च तक वह Brussels में ही रहेंगे. उन्हें ईयू की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कैलास ने निमंत्रण दिया था. विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, डॉ. जयशंकर का ये दौरा 16वें इंडिया-ईयू समिट के तुरंत बाद हो रहा है. इस दौरे का मकसद हाल की बातचीत को आगे बढ़ाते हुए रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है. इस दौरे के दौरान, विदेश मंत्री यूरोपीय यूनियन के नेतृत्व और बेल्जियम और दूसरे ईयू सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ भी मुलाकात करेंगे.

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भारत-ईयू संबंध नई ऊंचाई पर

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भारत-ईयू के संबंध 2026 में ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी आर्थिक और भू-राजनीतिक तालमेल में बदल गई है. दोनों पक्षों ने व्यापार, सुरक्षा, तकनीक, सतत विकास और वैश्विक मुद्दों पर संबंधों को मजबूत किया है.

मुक्त व्यापार समझौते से बढ़ा सहयोग

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बता दें, जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता हुआ. ईयू और भारत के बीच ये समझौता तब हुआ, जब अमेरिका टैरिफ का दबाव बनाकर सभी देशों के साथ अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता था.

2007 से शुरू हुई थी बातचीत

भारत और यूरोपीय संघ ने व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने का पहला प्रयास 2007 में किया था. शुल्क, बाजार पहुंच और नियमों को लेकर बातचीत कई वर्षों तक ठप रही. बातचीत 2021 में फिर से शुरू हुई. समझौते का पूरा प्रभाव सामने आने में समय लगेगा. हालांकि,वाशिंगटन डीसी से आ रही प्रतिक्रियाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जैसे-जैसे मुक्त व्यापार के साझेदार आगे बढ़ेंगे, अमेरिका को अपनी व्यापार रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पड़ सकती है.

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बताते चलें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इस दौरे से व्यापार, तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और गति मिल सकती है.

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