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प्रदेशवासियों को 'योगी की पाती': CM ने राम मंदिर पर ध्वजारोहण को बताया नए युग की शुरुआत, कहा- साकार हो रहा अयोध्या विजन 2047

अयोध्या में 25 नवंबर को विवाह पंचमी पर श्रीराम मंदिर के शिखर पर केसरिया धर्म ध्वजा फहराई जाएगी. अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पुष्प वर्षा के बीच होने वाले इस ध्वजारोहण में पीएम मोदी, सीएम योगी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल होंगे.

Yogi Adityanatah / Ram Mandir
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Ayodhya Ram Mandir Dhwajarohan: अयोध्या एक बार फिर अपनी दिव्यता और वैभव का नया अध्याय लिखने जा रही है. वह अयोध्या जिसने दुनिया को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का अलौकिक दृश्य दिखाया था, अब विवाह पंचमी के पावन अवसर पर एक और ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने को तैयार है. 25 नवंबर को श्रीराम मंदिर के शिखर पर केसरिया धर्म ध्वजा फहराई जाएगी. यह केवल एक प्रतीकात्मक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वह अध्यात्मिक पुनर्जागरण है जो सदियों से हिंदू आस्था की पहचान रहा है. इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत( Mohan Bhagwat) की उपस्थिति इसे और अधिक ऐतिहासिक बनाने वाली है.

दुल्हन की तरह सज रही राम नगरी 

शहर में इस समय ऐसा माहौल है मानो पूरा नगर प्रभु श्रीराम की स्मृतियों में खो गया हो. हर गली, हर चौराहा और हर दीपक इस महापर्व की प्रतीक्षा में जैसे थम गया है. ध्वज स्थापना अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होगी. जैसे ही ध्वज शिखर पर पूर्ण रूप से स्थापित होगा, ठीक 10 सेकेंड तक शंखध्वनि गूंजेगी और आकाश में पुष्प वर्षा के साथ आस्था का यह क्षण अमर हो जाएगा. राज्य सरकार इस आयोजन को ऐतिहासिक और सुरक्षित बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ रही है. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रोज़ाना जानकारी ले रहे हैं और अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश दे रहे हैं. पूरे आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं.

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धर्म ध्वजा से नए युग का आरंभ होगा: योगी आदित्यानाथ 

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अयोध्या के इस दिव्य आयोजन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि 'मेरे प्रिय प्रदेश वासियों, 25 नवंबर, 2025 को श्री अयोध्या धाम का नाम पुनः इतिहास के पृष्ठ पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होगा. आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन से श्री अयोध्या धाम में हो रहा हर कार्य प्रभु श्री राम के जीवन मूल्यों से प्रेरित है. मेरी यही कामना है कि धर्म-ध्वजा की पुनर्स्थापना से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि का नया युग आरंभ हो.'

7.5 हजार से अधिक अतिथि होंगे शामिल

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि कार्यक्रम में कुल 7.5 हजार विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया है. उन्होंने पुष्टि की कि ध्वज चढ़ाने का ट्रायल सफल रहा है और हर तैयारी सटीक व व्यवस्थित तरीके से अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. कार्यक्रम के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के लगभग 7 हजार लोगों को निमंत्रण दिया गया है. इसके अलावा मंदिर निर्माण में दिन-रात लगे 600 से अधिक कर्मियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. यह अपने आप में उनके समर्पण और परिश्रम का सम्मान है. राम मंदिर ट्रस्ट के व्यवस्था प्रमुख गोपाल जी राव ने बताया कि ध्वज स्थापना के दौरान पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठेगा. संतों-महंतों की उपस्थिति, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा के साथ यह आयोजन ऐसा प्रतीत होगा जैसे स्वयं त्रेता युग की स्मृतियां फिर से जीवित हो गई हों.

पूरी अयोध्या में फहरेगा केसरिया ध्वज

तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसे रामलला के महाप्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की श्रृंखला का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है. ट्रस्ट ने अयोध्या के सभी संतों और महंतों से अपील की है कि शहर के लगभग 5000 मंदिरों पर केसरिया ध्वज फहराया जाए. इसके साथ ही आम नागरिकों से भी आग्रह किया गया है कि अपने-अपने घरों पर ध्वज फहराएं ताकि पूरा नगर राम भक्ति के रंग में रंग जाए. शहर के मुख्य चौराहों, मार्गों और घाटों को विशेष सजावट से सुसज्जित किया गया है. दीप, पुष्प और ध्वजों की एक अद्भुत छवि शहर में उभरने वाली है. कई परिवार इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए यादगार क्षण बता रहे हैं.

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ध्वज पर कोविदार वृक्ष और ऊं का पवित्र चिन्ह

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राम मंदिर पर फहराया जाने वाला केसरिया ध्वज अपने आप में विशेष है. सनातन संस्कृति में केसरिया रंग त्याग, वीरता, पराक्रम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. यह वही रंग है जो रघुवंश की वीर परंपरा के साथ जुड़ा रहा है और आज भी हिंदू आस्था का श्रेष्ठतम प्रतीक है. ध्वज पर कोविदार वृक्ष का चिन्ह अंकित है. इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और वाल्मीकि रामायण के अनुसार भरत के ध्वज पर भी यही प्रतीक था. इसके साथ ही ध्वज पर ‘ऊं’ की आकृति अंकित है जो पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है.

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