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पहले किया Modi सरकार का समर्थन, फिर Shashi Tharoor ने क्यों मारी पल्टी?
Modi सरकार की ओर से लाए गये जिस संविधान संशोधन बिल के खिलाफ विपक्ष बवाल काट रहा है कांग्रेस सांसद शशि थरूर उसी बिल के समर्थन में उतर आए लेकिन जब उनके बयान पर बवाल मचा तो सुनिये सफाई में क्या कह रहे हैं ?
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राजधानी दिल्ली का मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल महीनों तक भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में ही रहे… लेकिन इसके बावजूद कुर्सी पर बैठे रहे... जेल जाने के बावजूद नैतिकता के आधार पर कुर्सी छोड़ना बेहतर नहीं समझा... जेल से ही सरकार चलाने लगे… जब सवाल उठने लगा तब जाकर उन्होंने इस्तीफा दिया… देश में ऐसे कई मामले रहे हैं जब मुख्यमंत्री और मंत्री रहे नेताओं ने एक महीने तक जेल में गुजारने के बावजूद पद नहीं छोड़ा... यही वजह है कि मोदी सरकार को लोकसभा में 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 लाना पड़ा… लेकिन जैसे ही गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में बिल पेश किया… विपक्ष ने इसका जबरदस्त विरोध किया… यहां तक कि कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और गृहमंत्री अमित शाह के बीच जबरदस्त भिड़ंत भी हो गई…
मोदी सरकार की ओर से लाए गये जिस संविधान संशोधन बिल के खिलाफ पूरा विपक्ष एक हो गया... उसी बिल पर मोदी सरकार को एक विपक्षी सांसद का साथ मिल गया… जिनका नाम है शशि थरूर…
जी हां आपने सही सुना… जिस संविधान संशोधन बिल के खिलाफ विपक्ष बवाल काट रहा है... कांग्रेस सांसद शशि थरूर उसी बिल के समर्थन में उतर आए हैं… और एक बयान में उन्होंने कहा…'अगर आप 30 दिन जेल में हैं तो क्या आप मंत्री रह सकते हैं ? ये तो कॉमन सेंस की बात है, मेरे ख्याल में इसमें तो कोई गलत चीज तो मैं नहीं देखता हूं लेकिन अगर इसके पीछे कुछ और सोच है तो पहले उसे पढ़ना होगा'
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एक तरफ जहां पूरा विपक्ष इस संशोधन बिल का विरोध कर रहा है… तो वहीं विपक्ष का सांसद होने के बावजूद शशि थरूर का ये बयान सुनकर हर कोई हैरान था… क्योंकि उन्होंने पार्टी से अलग स्टैंड लिया था... लेकिन जैसे ही उनके इस बयान पर सियासी बवाल मचा… खुद शशि थरूर अपने बयान पर सफाई देने के लिए मैदान में उतर गये… और एक ट्वीट में उन्होंने कहा…'मैंने वास्तव में क्या कहा बनाम मीडिया ने क्या रिपोर्ट किया, मैंने विशेष रूप से कहा था कि मैंने विधेयक का अध्ययन नहीं किया था लेकिन पहली नजर में मुझे इस प्रस्ताव में कुछ भी गलत नहीं लगा कि गलत काम करने वालों को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, मैंने आगे कहा कि मैं विधेयक का अध्ययन किये बिना ना तो उसका समर्थन कर रहा हूं और ना ही विरोध कर रहा हूं'
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शशि थरूर के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल बयान उन्होंने उस वक्त दिया था जब विपक्ष ने बिल पर कोई रुख नहीं अपनाया था… लेकिन इसके बावजूद मीडिया ने जिस तरह से उनके बयान को बिल का समर्थन करने वाला बताया… भड़के शशि थरूर ने मीडिया पर ही अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि…'मेरे कहने का मतलब साफ था कि अगर कोई मंत्री 30 दिन जेल में बिताता है तो यह सामान्य ज्ञान है कि वह पद पर नहीं रह सकता लेकिन विधेयक के व्यापक उद्देश्य का अध्ययन किया जाना चाहिए, पत्रकारिता का वेश धारण कर सनसनी फैलाना लोकतंत्र के लिए क्षति है, मैं देख रहा हूं कि मीडिया ने अपना वही पुराना काम किया है'
शशि थरूर ने पहले तो बिल का समर्थन किया और जब उनके बयान पर बवाल मचा तो सफाई देने लगे कि उनके बयान को मीडिया ने तोड़मरोड़ कर पेश किया है... अब अपनी सफाई में शशि थरूर कुछ भी कहें... वैसे मोदी सरकार का समर्थन करने का उनका रिकॉर्ड बहुत पुराना है...
साल 2019 में शशि थरूर ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि अगर मोदी कुछ सही करते हैं तो उसकी सराहना करना जरूरी है, मोदी को नजरअंदाज करना मूर्खता होगी क्योंकि वो 2014 से 2019 तक 13 करोड़ लोगों का वोट हासिल करके दोबारा सत्ता में आए थे.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जून 2025 में शशि थरूर ने मोदी सरकार की कूटनीतिक पहुंच की तारीफ करते हुए कहा था कि यह भारत की दृढ़ता और प्रभावशाली संवाद का उदाहरण है, ये बयान ऐसे समय आया जब कांग्रेस लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना कर रही थी.
इसी साल जून में शशि थरूर ने एक कॉलम में पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा, गतिशीलता और सहभागिता की इच्छा ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति में पहुंचाया है, वह भारत के लिए एक प्राइम एसेट हैं, लेकिन इस अभियान को और समर्थन की जरूरत है.
वक्त-वक्त पर मोदी सरकार का समर्थन करने की वजह से शशि थरूर को कांग्रेस आलाकमान से नाराजगी का सामना भी करना पड़ा है… लेकिन इसके बावजूद वो मानते हैं कि उनके लिए देश पहले है… इसीलिये एक बयान में उन्होंने कहा था कि…'बहुत से लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं क्योंकि मैंने अपनी सेना और सरकार का समर्थन किया है, हमारे देश में और हमारी सीमाओं पर जो कुछ हुआ, उस पर मैंने जो रुख अपनाया है, उसके लिए मेरी आलोचना हो रही है, लेकिन मैं अपने रुख पर कायम रहूंगा क्योंकि मुझे लगता है कि यह देश के लिए सही है और जब मैं भारत की बात करता हूं, तो मैं सभी भारतीयों की बात करता हूं, न कि सिर्फ उन लोगों की जो मेरी पार्टी को पसंद करते हैं'
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शशि थरूर का बयान बता रहा है कि वो कई मौके पर मोदी सरकार की तारीफ करते रहे हैं… यही वजह है कि इस बार जब उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की गिरफ्तारी से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर बयान दिया तो उनके बयान को बिल के समर्थन के तौर पर देखा गया… जिससे वो नाराज हो गये और सफाई देते हुए कहा कि मैंने विशेष रूप से कहा था कि मैंने विधेयक का अध्ययन नहीं किया था लेकिन पहली नजर में मुझे इस प्रस्ताव में कुछ भी गलत नहीं लगा कि गलत काम करने वालों को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए... यानि शशि थरूर भी इस बिल के मसले पर फिलहाल पार्टी के साथ हैं… वैसे आपको क्या लगता है… क्या तीस दिन तक जेल में रहने वाले मुख्यमंत्री, मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री जैसे बड़े ओहदे पर बैठे नेताओं को भी इस्तीफा दिलाने वाला ये कानून लाना चाहिए…