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इथियोपिया के ज्वालामुखी से उठी राख, क्या दिल्ली की एयर क्वालिटी को कर रही और खराब? एक्सपर्ट की गंभीर चेतावनी

इथियोपिया में फटा हायली गुबी ज्वालामुखी दिल्ली में खतरनाक एयर पॉल्यूशन की स्थिति को और खराब बना सकता है.

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दिल्ली (Delhi) का एयर क्वालिटी इंडेेक्स (Air Quality Index) खतरनाक श्रेणी में पहुंच चुका है. इस बीच इथियोपिया के ज्वालामुखी विस्फोट से उठी राख दिल्ली पहुंची तो कई तरह की आशंकाओं ने घेर लिया. इस नई प्राकृतिक परिस्थिति ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है. 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है. सुबह उठते ही राष्ट्रीय राजधानी धुंध की मोटी चादर में लिपटी दिखती है. इथियोपिया में फटा हायली गुबी ज्वालामुखी इस सिचुएशन को और खराब बना सकता है. 

12 साल बाद फटा ज्वालामुखी 

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इथियोपिया का हेली गुब्बी ज्वालामुखी 12 हजार साल बाद फट गया. इस विस्फोट से उठने वाली राख और सल्फर डाइऑक्साइड करीब 15 किमी ऊंचाई तक पहुंच गई. यह लाल सागर पार करते हुए यमन और ओमान तक फैल गई. 24 जनवरी की देर रात तक यह राख इथियोपिया से 4300 किलोमीटर दूर भारत के कई इलाकों में फैल गई. इनमें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब शामिल हैं. 

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि राख के बादल मंगलवार शाम 7:30 बजे तक भारत से साफ हो जाएंगे और चीन की ओर बढ़ जाएंगे. हवा की तेज दिशा और गति के कारण ये राख यमन और ओमान होते हुए भारत पहुंच गई. 100-120 किलोमीटर प्रतिघंटा के रफ्तार से राख का गुबार दिल्ली गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा पहुंचा. 

AIIMS के एक्सपर्ट ने क्या कहा? 

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दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर ने IANS को बताया, ‘इथियोपिया से बहकर आ रही ज्वालामुखी की राख, बारीक कणों और जहरीले धातुओं को मिलाकर दिल्ली की हवा की गुणवत्ता को और खराब कर सकती है.’

उन्होंने आगे कहा, ये बेहद बारीक कण फेफड़ों में जा सकते हैं, जिससे सांस की दिक्कतें बढ़ सकती हैं और अस्थमा हो सकता है. शहर में पहले से ही प्रदूषण से जुड़े हेल्थ रिस्क के बीच बच्चों, बुज़ुर्गों और कैंसर के मरीजों में खतरा बढ़ सकता है. 

दिल्ली-NCR में प्रदूषण से बिगड़े हालात

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बिगड़ते वायु प्रदूषण से दिल्ली वालों को सेहत से जुड़ी कई दिक्कतें हो रही हैं, जैसे आंखों से पानी आना, अस्थमा के लक्षण, त्वचा में खुजली और गले में जलन की शिकायत लोग कर रहे हैं. AIIMS दिल्ली के पल्मोनरी मेडिसिन और स्लीप डिसऑर्डर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और हेड, डॉ. अनंत मोहन ने बताया, वायु प्रदूषण से शरीर का कोई भी हिस्सा बिना असर के नहीं रहता. हमारी श्वसन प्रणाली सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. नाक, कान और फेफड़े हवा के सीधे संपर्क में रहते हैं, इसलिए सांस की बहुत सारी बीमारियां होती हैं. एक्सपर्ट ने चेताया कि, खराब हवा से दिमाग से लेकर शरीर के किसी भी हिस्से को दिक्कत हो सकती है. हार्ट अटैक या स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है. 

प्रेग्नेंट महिलाओं को चेतावनी 

एक्सपर्ट ने हवा के इस स्तर को गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए खतरनाक माना. एक्सपर्ट ने कहा, प्रदूषण के इस स्तर से कोई नहीं बच सकता, इसमें उम्र मायने नहीं रखती. न ही शरीर का कोई अंग इससे अछूता रह सकता है. दिल्ली में डेंजर लेवल वाली AQI के चलते राजधानी को इमरजेंसी क्षेत्र घोषित करने जैसी मांग भी की जा रही है. डॉक्टर्स का कहना है कि एयर पॉल्यूशन कैंसर के रिस्क फैक्टर के तौर पर उभर रहा है. इससे नॉन-स्मोकिंग महिलाओं और वयस्कों में लंग कैंसर के बढ़ते मामलों की बड़ी वजह एयर पॉल्यूशन है. 

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ज्वालामुखी फटने के बाद DGCA ने जारी की गाइडलाइन 

भारत के DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने एयरलाइन्स के लिए डिटेल गाइडलाइंस जारी की है. हालांकि राख बहुत ऊंचाई पर थी, इसलिए टेकऑफ और लैंडिंग में कोई बड़ा खतरा नहीं था लेकिन ऐहतियातन गाइड लाइन जारी की गई. 

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DGCA ने कहा, अगर किसी विमान को राख के संपर्क में आने का जरा भी संदेह हो, जैसे इंजन की परफॉर्मेंस में गड़बड़ी, केबिन में धुआं या बदबू तो एयरलाइन को इसकी जानकारी तुरंत देनी होगी. अगर राख एयरपोर्ट ऑपरेशन को प्रभावित करती है, तो संबंधित एयरपोर्ट को रनवे, टैक्सीवे और एप्रन की तुरंत जांच करनी होगी. DGCA ने सभी एयरलाइंस और एयरपोर्ट को चेतावनी दी थी कि वे सावधानी बरतें.  वहीं, ज्वालामुखी की राख के कारण कई उड़ानें रद्द हो गईं. 

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