Advertisement

Loading Ad...

चुनाव आयोग का मॉडल बना वैश्विक मिसाल... 40 से ज्यादा देशों में लागू होगा SIR, EC के दिल्ली डिक्लेरेशन पर बनी सहमति

भारत की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैश्विक समर्थन मिला है. भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों ने मतदाता सूची के शुद्धीकरण और सभी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र देने पर सहमति जताई.

Screengrab
Loading Ad...

लोकतंत्र को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में भारत ने एक बार फिर वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण पेश किया है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगी. दुनिया के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों ने इस व्यवस्था को अपनाने पर सहमति जता दी है.

दरअसल, भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ में 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों और 27 देशों के मिशन प्रमुखों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में सभी देशों ने एकमत होकर अपने-अपने देशों में मतदाता सूची के शुद्धीकरण को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया. ‘भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन सम्मेलन’ (IICDEM-2026) के अंतिम दिन यह साफ संदेश सामने आया कि शुद्ध मतदाता सूची के बिना निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संभव नहीं हैं. सम्मेलन में यह भी तय किया गया कि हर पात्र मतदाता को फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी होगी.

लोकतंत्र की मजबूती का क्या है आधार 

Loading Ad...

समापन सत्र में ‘दिल्ली घोषणा 2026’ को पढ़ते हुए भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची की शुद्धता सबसे अहम आधार है. उन्होंने बताया कि घोषणा पत्र के पांच मुख्य स्तंभ तय किए गए हैं. इनमें मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव संचालन, अनुसंधान और प्रकाशन, प्रौद्योगिकी का उपयोग, तथा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण शामिल हैं. ज्ञानेश कुमार ने यह भी कहा कि सभी चुनाव प्रबंधन निकाय समय-समय पर अपनी प्रगति की समीक्षा करेंगे. इसके साथ ही 3, 4 और 5 दिसंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान में दोबारा बैठक करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी देशों ने स्वीकार किया.

Loading Ad...

तीन दिवसीय सम्मेलन में हुई चर्चा 

भारत मंडपम में आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में SIR प्रक्रिया पर गहन चर्चा हुई. कई देशों ने भारत के अनुभव को सीखने योग्य बताया और अपने यहां इसी तरह की प्रणाली लागू करने पर जोर दिया. समापन सत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि कानून के अनुसार सभी पात्र मतदाताओं के नामों से युक्त शुद्ध मतदाता सूची ही किसी भी लोकतंत्र की असली नींव होती है. इससे चुनाव प्रक्रिया आसान, भरोसेमंद और पारदर्शी बनती है.

Loading Ad...

विपक्ष उठता रहा सवाल

दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भले ही 40 से अधिक देशों ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को अपनाने पर सहमति जताई हो, लेकिन भारत में इसे लेकर सियासी विवाद भी तेज हो गया है. विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को ग़लत बताते हुए चुनाव आयोग पर केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए हैं.

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया. यह सम्मेलन न सिर्फ चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की मजबूत छवि को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत की चुनावी प्रक्रियाएं अब वैश्विक मानक बनती जा रही हैं. लोकतंत्र को मजबूत करने की यह पहल आने वाले वर्षों में दुनिया भर के चुनावों की दिशा और दशा बदल सकती है.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...