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ईडी ने QFX घोटाले में 9.31 करोड़ की संपत्तियां अटैच, आरोपियों के आर्थिक नेटवर्क पर बड़ा हमला

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) चंडीगढ़ ने पीएमएलए, 2002 के तहत क्यूएफएक्स/वाईएफएक्स/यॉर्करएफएक्स/बॉटब्रो घोटाले के मुख्य आरोपी नवाब उर्फ लैविश चौधरी, सहयोगी राजेंद्र कुमार सूद और उनके परिजनों की कुल 9.31 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कीं. इसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में फैली 45 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें फ्लैट, प्लॉट और कृषि भूमि शामिल है.

Source: Social Media
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 9.31 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच कर लिया है. ये संपत्तियां क्यूएफएक्स/वाईएफएक्स/यॉर्करएफएक्स/बॉटब्रो घोटाले के मुख्य आरोपी नवाब उर्फ लैविश चौधरी, उनके सहयोगी राजेंद्र कुमार सूद और अन्य एजेंटों व उनके परिजनों की बताई जा रही हैं.

कार्रवाई और जांच का विवरण

ईडी ने जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, उनमें 45 अचल संपत्तियां शामिल हैं. इनमें आवासीय फ्लैट, प्लॉट और कृषि भूमि शामिल हैं, जो उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में फैली हुई हैं. इसके अलावा, बैंक बैलेंस के रूप में चल संपत्तियां भी जब्त की गई हैं. जांच में पता चला कि 2019 से 2025 के बीच अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों के जरिये घुमाकर इन संपत्तियों में निवेश किया गया. अक्सर इन खातों को आरोपियों के रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम से संचालित किया गया, ताकि काले धन के स्रोत को छिपाया जा सके.

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धोखाधड़ी कर इकट्ठा किया धन 

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ईडी के आदेश के अनुसार यह घोटाला पोंजी और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) स्कीम के रूप में संचालित हुआ. क्यूएफएक्स ग्रुप ने निवेशकों को 5–6 प्रतिशत मासिक रिटर्न का झांसा देकर धन इकट्ठा किया, जबकि वास्तव में कोई फॉरेक्स ट्रेडिंग नहीं की गई. निवेशकों से प्राप्त राशि को अलग-अलग बैंक खातों में लेयरिंग के माध्यम से डाला गया और आरोपियों व उनके परिजनों के नाम पर संपत्तियों और कंपनियों में निवेश किया गया.

इस बार अटैच की गई संपत्तियों में 8.20 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति और 1.1 करोड़ रुपए की चल संपत्ति शामिल है. ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई घोटाले की वित्तीय जड़ को तोड़ने की दिशा में अहम कदम है और अब तक की जांच और जब्ती की प्रक्रिया को और मजबूत करेगी.

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बता दें कि ईडी की यह कार्रवाई घोटाले के आरोपियों की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर उनके आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच और आवश्यक जब्तियों के जरिए क्यूएफएक्स ग्रुप और संबंधित व्यक्तियों के वित्तीय सौदों की गहराई तक पहुंचने का प्रयास जारी रहेगा, ताकि निवेशकों का धन सुरक्षित किया जा सके और भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.

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