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दिल्ली बम ब्लास्ट में मारे गए आतंकी के दोस्त डॉक्टर आरिफ को ATS ने कानपुर से उठाया, डॉ शाहीन और उमर से रोज होती थी चैट और कॉल

खबरों के मुताबिक, डॉक्टर आरिफ मीर (32)  जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के खागुनसादीवारा इलाके का रहने वाला है. उसके पिता का नाम गुलाम हसन मीर है. साल 2024 में उसने SKIMS मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से MBBS की पढ़ाई की है. बताया जा रहा है कि आरिफ ने दिल्ली ब्लास्ट में शामिल मृतक आतंकी डॉक्टर उमर के साथ पढ़ाई की थी.

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दिल्ली कार ब्लास्ट करने वाले आतंकी डॉक्टर उमर के दोस्त को कानपुर से गिरफ्तार किया गया है. ATS ने कानपुर के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर आरिफ को गिरफ्तार किया है, जिसका कनेक्शन मारे गए आतंकी डॉक्टर उमर और उसकी सहयोगी लेडी टेररिस्ट डॉक्टर शाहीन से मिला है. आरिफ लगातार मारे गए आतंकी उमर और गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन के संपर्क में था. जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों हर रोज चैट और कॉल के जरिए बातचीत करते थे. इसके अलावा दोनों कई अन्य संदिग्धों के भी संपर्क में थे. जांच एजेंसियां कानपुर में रहने वाले कश्मीरी मूल के 48 छात्रों की प्रोफाइल की जांच कर रही है. यह सभी हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट है. वहीं डॉक्टर आरिफ पहले लखनऊ था, लेकिन उसके बाद वह कानपुर चला गया. NIA और ATS ने कानपुर से जुड़े कई अन्य डॉक्टर से भी पूछताछ की है.  

कौन है डॉक्टर आरिफ? 

खबरों के मुताबिक, डॉक्टर आरिफ मीर (32)  जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के खागुनसादीवारा इलाके का रहने वाला है. उसके पिता का नाम गुलाम हसन मीर है. साल 2024 में उसने SKIMS मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से MBBS की पढ़ाई की है. बताया जा रहा है कि आरिफ ने दिल्ली ब्लास्ट में शामिल मृतक आतंकी डॉक्टर उमर के साथ पढ़ाई की थी. दोनों एक-दूसरे से कई सालों से संपर्क में थे और उमर के जरिए ही डॉक्टर आरिफ, लेडी आतंकी डॉक्टर शाहीन से जुड़ा था. 

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डॉ शाहीन ने आरिफ को टारगेट किया 

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जांच में पाया गया है कि डॉक्टर शाहीन ने आरिफ को टारगेट किया, जिसके बाद अगस्त 2025 में आरिफ कानपुर आ गया. यहां उसने LPS इंस्टीट्यूट आफ कार्डियोलॉजी से MD यानी डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन में एडमिशन लेकर अपनी पढ़ाई की. आरिफ, उमर और शाहीन की चैटिंग और ईमेल भी ATS को मिले हैं. इसके अलावा आरिफ का लैपटॉप भी जब्त किया गया है. जिसमें कई अहम डेटा है. 

लखनऊ छोड़कर कानपुर क्यों गया डॉक्टर आरिफ?  

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जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हुई हैं कि आखिर डॉक्टर आरिफ ने लखनऊ छोड़कर कानपुर शहर को क्यों चुना? इस सवाल पर हृदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ राकेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि आरिफ अगस्त 2025 में फर्स्ट ईयर के रिजल्ट के रूप में कार्डियोलॉजी में ज्वाइन किया था. इससे पहले काउंसलिंग में उसने लखनऊ के SGPGI में प्रवेश लेने के लिए अप्लाई किया था. हालांकि, उसने सेकंड राउंड की काउंसलिंग में लखनऊ को छोड़कर कानपुर शहर चुना. वहीं टेररिस्ट के निशाने पर यूपी के कई शहर थे, इनमें कानपुर भी एक था. आतंकी हर शहर में सीरियल ब्लास्ट की तैयारी में थे. 

डॉक्टर आरिफ जैश-ए-मोहम्मद के प्लान का हिस्सा था 

बताया जा रहा है कि डॉक्टर शाहीन के फरीदाबाद शिफ्ट होने के बाद कानपुर शहर में ऐसा कोई नहीं था, जो जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को खड़ा कर सके. ऐसे में माना जा रहा है कि डॉक्टर आरिफ का कानपुर आना. इस प्लान का एक बड़ा हिस्सा था. डॉक्टर शाहीन साल 2006 से 2013 तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में थी. इसके बाद वह बिना कुछ बताए ही कानपुर शहर छोड़कर चली गई और फिर फरीदाबाद से उसकी गिरफ्तारी हुई. 

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डॉ शाहीन के नेटवर्क को संभाल रहा था आरिफ 

कानपुर में रहने के दौरान डॉक्टर शाहीन ने कई मुस्लिम इलाकों में अपना नेटवर्क मजबूत किया था. इसी कड़ी में उसने डॉक्टर आरिफ से भी संपर्क जोड़े. उसने मुस्लिम लोगों का ब्रेनवाश भी किया, फिलहाल यह नेटवर्क कहां-कहां फैला है? कितने लोग इससे जुड़े हैं और आरिफ ने कितने लोगों को इसमें शामिल किया है. इन सभी की जांच सुरक्षा एजेंसियां द्वारा की जा रही हैं.

कैसे गिरफ्तार हुआ डॉक्टर आरिफ? 

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बता दें कि डॉ शाहीन से हुई पूछताछ में उसने डॉक्टर आरिफ के बारे में बताया. उसके बाद जब 12 नवंबर को ATS कानपुर पहुंची, तो आरिफ अस्पताल से घर लौट रहा था. इसी दौरान ATS ने उसे रास्ते में पकड़ लिया और उसके किराए के मकान तक पहुंची, जो तीन मंजिला मकान अशोकनगर स्थित फातिमा स्कूल के बगल में बना हुआ है. 

ताला तोड़कर तलाशी ली 

ATS के पहुंचने के बाद डॉक्टर आरिफ के कमरे का ताला तोड़कर तलाशी ली गई और करीब 20 मिनट तक पूरे फ्लैट की बारीकी से जांच हुई. इस दौरान ATS कई अहम दस्तावेज भी अपने साथ ले गई. फिलहाल फ्लैट में ताला लगा हुआ है और फ्लैट में डॉक्टर आरिफ के पार्टनर अभिषेक दहशत में है. 

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दिल्ली कार ब्लास्ट मामले के बाद जांच एजेंसियां लगातार एक्शन मोड में है. इस दौरान यूपी के 5 जिलों में लगातार छापेमारी हुई है. इनमें सहारनपुर, लखनऊ, मुजफ्फरनगर, कानपुर, हापुड़ में बड़ा एक्शन हुआ है. जांच एजेंसियों ने इस दौरान 2 और सीनियर डॉक्टर को उठाया है. 

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