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चुनावी नतीजों से हताश शरद पवार अपनी पार्टी को लेकर लेने वाले है बहुत बड़ा फ़ैसला !
महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों में सबसे बुरी स्थिति में शरद पवार की पार्टी एनसीपी रही। ऐसे में अब शरद पवार अपनी पार्टी को मज़बूत करने के लिए कई बड़े बदलाव की प्लानिंग कर रहे है।
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में एक बार फिर से महायुति की सरकार बन गई है। लेकिन इन चुनावी नतीजों में सबसे बुरी स्थिति में शरद पवार की पार्टी एनसीपी रही। ऐसे में अब शरद पवार अपनी पार्टी को मज़बूत करने के लिए कई बड़े बदलाव की प्लानिंग कर रहे है। सूत्रों के मुताबिक़ एनसीपी के कई बड़े पदों पर बदलाव हो सकते है।
नतीजों को लेकर शरद पवार काफ़ी चिंतित है, पार्टी को फिर से मज़बूती देने के लिए वो कई बड़े फ़ैसले जल्द ले सकते है। बताया जा रहा है कि नए साल में नए तरीक़े से पार्टी को पुनर्जीवित करने की प्लानिंग होगी। 8 और 9 जनवरी को मुंबई में NCP शरद पवार गुट की मैराथन बैठक होने वाली है। इस बैठक में पार्टी के युवा अध्यक्ष, महिला अध्यक्ष, छात्र अध्यक्ष समेत अलग-अलग प्रकोष्ठ के प्रमुख को बदले पर फ़ैसला लिया जा सकता है। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष की इस चुनाव में भूमिका की जांच की जा रही है, लेकिन इन सबके बीच पार्टी का एक गुट इस बात को लेकर अड़ा हुआ है कि जयंत पाटील को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
शरद पवार पार्टी नेताओं से करेंगे मंथन
शरद पवार की होने वाली 8 जनवरी की बैठक में सभी प्रकोष्ठ, विधायक, सासंद शामिल होंगे, वही अगले दिन यानी 9 जनवरी को जिला अध्यक्षों और शहर अध्यक्षों को बैठक के लिए बुलाया जा सकता है। इस दो दिवसीय बैठक में पार्टी प्रमुख विभिन्न नेताओं से पार्टी को मज़बूत करने के लिए राय लेंगे और उसके बाद बदलाव के फ़ैसले पर अंतिम मुहर लगायेंगे।
विधानसभा में सिर्फ़ 10 सीट पर सिमट गई थी पार्टी
बताते चले कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में शरद पवार की पार्टी महाविकास अघाड़ी के गठबंधन में चुनावी मैदान में उतरी थी। गठबंधन के तहत शरद पवार की पार्टी 87 विधानसभा सीट पर चुनाव लदी थी लेकिन जीत का दावा करने के बावजूद पार्टी केवल दस सीटों पर चुनाव जितने में कामयाब रही थी। इसके साथ ही इस चुनाव में पूरी महाविकास अघाड़ी को भारी नुक़सान हुआ था। वही लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए यह माना जा रहा था कि शरद पवार की महाराष्ट्र की राजनीति में वापसी होगी। क्योंकि पार्टी 10 में से 8 लोकसभा जीतें हासिल करने के बाद एनसीपी-एसपी नेताओं का मनोबल बढ़ गया था।
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