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GST 2.0 में इन विपक्षी राज्यों ने अड़ाई थी टांग, वोटिंग की नौबत आई तो डरे! जानें मोदी सरकार के बड़े फैसले की इनसाइड स्टोरी

केंद्र सरकार ने GST में बड़ी कटौती करते हुए 28% और 12% टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया है. अब केवल 5% और 18% ही लागू होगा. सरकार के इस बड़े फैसले के पीछे कई महीनों का होमवर्क और कई दौर की वार्ता है. इस दौरान कई अड़चनें और असहमतियां और चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा. जानते हैं इस बड़े फ़ैसले की इनसाइड स्टोरी

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15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल क़िले से नेक्स्ट जेनरेशन GST रिफॉर्म्स लेकर आने की बात कही थी. PM के ऐलान के क़रीब 19 दिन बाद यानी 3 दिसंबर की देर शाम मिडिल क्लास के लिए राहत भरी ख़बर आई. केंद्र सरकार ने GST में बड़ी कटौती करते हुए 28% और 12% टैक्स स्लैब को ख़त्म कर दिया है. अब केवल 5% और 18% ही लागू होगा. इसी के साथ खाने, पीने बर्तन से लेकर वाहन तक कई चीजें सस्ती हो जाएंगी. सरकार के इस बड़े फ़ैसले के पीछे कई महीनों का होमवर्क और कई दौर की वार्ता है. इस दौरान कई अड़चनें और असहमतियां और चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा. जानते हैं इस बड़े फ़ैसले की इनसाइड स्टोरी 

नेक्स्ट जेनरेशन GST रिफॉर्म्स के ज़रिए पीएम मोदी का टारगेट मीडिया क्लास को बड़ी राहत देना था. इसके संकेत भले ही पीएम ने 15 अगस्त को दिए हों, लेकिन इसकी तैयारियां काफ़ी पहले ही शुरू हो गई थीं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण GST काउंसिल और ग्रुप ऑफ मिनिस्टर के साथ बैठक की तैयारियां कर ली थीं. 

अमित शाह ने खुद संभाला मोर्चा

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टैक्स में छूट की पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हो और इसका बोझ राजकोष पर भी न पड़े इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने ख़ुद मोर्चा संभाला. किन प्रोडेक्ट पर टैक्स छूट दी जाएगी? मिडिल क्लास पर इसका आर्थिक असर पड़ेगा या नहीं? राजस्व पर नकारात्मक असर तो नहीं होगा? इस तरह के तमाम संशयों को दूर करने के लिए अमित शाह ने अधिकारियों के साथ कई बैठक की. 

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विपक्षी राज्य GST कटौती का विरोध क्यों कर रहे?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने GoM के सदस्यों के साथ GST को लेकर लगातार कई बैठकें की. GoM के सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री या मंत्री शामिल होते हैं. मीटिंग के दौरान कई राज्यों जहां विपक्ष की सरकार है. उन्होंने विरोध किया था. विपक्ष शासित राज्यों को सरकार के इस फ़ैसले से अपने राजस्व में घाटे का डर सताने लगा. 

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GST परिषद की बैठक में तगड़ा विरोध 

3 सितंबर को GST काउंसिल की बैठक में फ़ैसले पर आख़िरी मुहर लगने वाली थी. इस दौरान कुछ राज्यों ने टैक्स में कटौती का विरोध किया. इसमें पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल और कर्नाटक शामिल थे. जानकारी के मुताबिक़, विरोध के कारण ही बैठक ख़त्म होने में क़रीब ढाईं घंटे की देरी हुई. यानी जो बैठक शाम 7 बजे ख़त्म होने वाली थी वो रात 9.30 बजे ख़त्म हुई. 

रात भर बैठने को तैयार थीं वित्त मंत्री सीतारमण 

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जो राज्य GST रिफॉर्म का विरोध कर रहे थे उनकी कोशिश थी कि इस पर बातचीत जारी रहे. वह बातचीत को 4 सितंबर यानी अगले दिन के लिए टालना चाहते थे, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ़ कर दिया था कि, चाहे उन्हें रातभर बैठना पड़े फ़ैसला इसी बैठक में होगा. दरअसल, केरल और कर्नाटक सरकार का कहना था कि, राज्यों कोो होने वाले घाटे को कैसे भरा जाएगा, सरकार इस पर मज़बूत आश्वासन दे. 

वोटिंग के विकल्प से डरे विपक्षी!

बैठक में गतिरोध के चलते जो राज्य सहमत थे वो भी परेशान हो उठे. इस बीच छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने वोटिंग की सलाह दी. उन्होंने कहा, 28% वाले स्लैब को हटाने पर वोटिंग कर लेते हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि, अगर सदस्य वोटिंग चाहते हैं तो वे इसके लिए भी तैयार हैं. हालांकि बिना वोटिंग के ही सहमति बन गई. 

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पश्चिम बंगाल ने दिया दखल 

दरअसल, वोटिंग की बात सुन विपक्षी राज्य भी पीछे हटने लगा, क्योंकि वोटिंग में विरोध करते तो जनता की नाराज़गी झेलनी पड़ती. ऐसे में पश्चिम बंगाल ने दखल देते हुए कर्नाटक और केरल को मनाया. कई दौर की बातचीत के बात आख़िरकार GST कटौती पर एक राय बनी 

वित्त मंत्री ने राज्यों को क्या आश्वासन दिया? 

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बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को पूरे न्याय का भरोसा दिया. उन्होंने कहा, अगर फ़ैसले से राज्यों को नुक़सान हो रहा है तो केंद्र को भी उतना ही नुक़सान हो रहा है, लेकिन हमारा मक़सद आम जनता को राहत देना है. निर्मला सीतारमण ने कहा, इस लक्ष्य को केंद्र और राज्य को मिलकर पूरा करना होगा. इस दौरान राज्यों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा. 

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आपको बता दें कि, GST का स्लैब कम किए जाने से रोजमर्रा के सामान, जीवन रक्षक दवाएं, खाने-पीने की चीजें, छोटी कार, बाइक, सीमेंट जैसी चीजें सस्ती हो जाएगी. GST काउंसिल की बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत होंगे. अब जीएसटी स्लैब 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत को समाप्त कर दिया गया है. 

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