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सपा विधायक के बेटे से शादी कराने पर सुरेंद्र सागर को BSP ने पार्टी से निकाला? मायावती ने दिया जवाब
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुरेंद्र सागर को पार्टी से निकाल दिया है। इसको लेकर कई तरह की चर्चा हो रही थी। अब इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि लोग स्वतंत्र हैं, जहां चाहे वहां रिश्ता करें।
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पिछले दो दिनों से ये सवाल राजनीतिक गलियारों में शोर मचा रही है। क्योंकि बसपा चीफ मायावती अपने ही लोगों पर गाज गिरा रही है। बैक-टू-बैक अपने ही पार्टी के नेताओं पर धाकड़ एक्शन ले रही है। बीते दिन ही बसपा सुप्रीमो ने पूर्व जिलाध्यक्ष और दर्जा प्राप्त मंत्री रहे सुरेंद्र सागर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इधर ये खबर आउट हुई उधर चर्चा होने लगी कि क्या बसपा नेता सुरेंद्र सागर को अपनी बेटे की शादी सपा विधायक त्रिभूवन दत्त के बेटी से कराना भारी पड़ गया? इससे पहले मुनकाद अली के बेटे की शादी में शामिल होने पर पूर्व मंडल प्रधान प्रभारी प्रशांत गौतम को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
तो क्या शादियों के कारण ही बसपा नेता हो रहें पार्टी आउट?
बसपा नेताओं पर हुए एक्शन को लेकर जब मायावती पर सवाल उठने लगे। मायावती को कटघरे में खड़ा किया गया। तो आखिरकार मायावती को इसपर अपनी सफाई देनी पड़ी। बैक-टू-बैक ट्वीट कर उनपर उठ रहे सभी सवालों का जवाब दिया।
उन्होंने पहले मुनकाद अली को निकाले जाने पर ट्वीट कर लिखा की अवगत कराना है कि श्री मुनकाद अली, BSP Ex-MP के लड़के की शादी में, पार्टी के लोगों को इसलिए रोका गया, क्योंकि इनकी लड़की मीरापुर से सपा से विधानसभा का उपचुनाव लड़ रही थी, उनके खिलाफ BSP भी यह उपचुनाव लड़ रही थी।
इसी ट्वीट को टैग करते हुए वो एक और पोस्ट कर लिखती है ऐसे में, शादी में दोनों पार्टियों के लोगों के आपस में टकराने की आम चर्चा थी, उससे बचाने के लिए पार्टी को फिर मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन इसे दूसरे तरीके से जो प्रचारित किया जा रहा है, यह ठीक नहीं।
इसके बाद वो सुरेंद्र सागर पर सफाई देती है, दो और ट्वीट करती है और लिखती है कि इसी प्रकार रामपुर जिले का पूर्व पार्टी अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र सागर व इसके बाद पार्टी अध्यक्ष श्री प्रमोद कुमार का इनसे आपसी झगड़ा चरम पर था, जिससे पार्टी के कार्य सफर कर रहे थे, तब फिर दोनों को एक साथ निकाला गया, जिसका शादी-विवाह का कोई सम्बन्ध नहीं।
दूसरे ट्वीट में लिखती है अर्थात् कौन किस पार्टी के लोगों के साथ अपना रिश्ता बना रहा है उसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। लोग स्वतंत्र हैं जहाँ चाहें वहाँ रिश्ता करें। यह सब उनकी सोच पर निर्भर करता है। लेकिन ऐसे लोगों से ज़रूर सर्तक रहें जो इसका भी गलत प्रचार कर रहे हैं।
बता दें कि सुरेंद्र सागर बरेली मंडल के दिग्गज नेताओं में शुमार है। वो कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके है। सुरेंद्र सागर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और अनुशासनहिनता का आरोप लगा है। इसी को बुनियाद बनाते हुए मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाला और ज्ञान प्रकाश बौद्ध को नया जिला अध्यक्ष घोषित कर दिया। हालांकि सुरेंद्र सागर कह रहे है कि उन्होंने कोई अनुशासनहिनता नहीं की, उन्होनें सिर्फ अपने बेटी की शादी सपा विधायक के बेटे से की। और इसी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है।
सुरेंद्र सागर का कहना है कि उन्होंने कोई अनुशासनहिनता नहीं की दूसरी तरफ मायावती ट्वीट के माध्यम से उनपर पार्टी विरोधी गतिविधियां करने का आरोप लगा रही है।
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