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उपमुख्यमंत्री का पद और 80 सीटें…सुपरस्टार थलापति विजय को BJP का मेगा ऑफर, गरमाई तमिलनाडु की सियासत

Tamil Nadu Elections 2026: जानकारी के मुताबिक, 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, भाजपा ने अभिनेता थलापति विजय को उपमुख्यमंत्री का पद और 80 सीटों का बड़ा ऑफर दिया है, जिसके बाद राज्य की सियासत गरमा गई है.

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जैसे-जैसे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत में हलचल बढ़ती जा रही है. मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, अभिनेता विजय की नई-नवेली पार्टी 'तमिझगा वेत्री कड़गम' (TVK) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच चुनावी गठबंधन को लेकर चर्चाएं बहुत ज्यादा तेज हैं और ऐसा लग रहा है कि दोनों ही पार्टियां गठबंधन को लेकर बहुत जल्द ही कोई निर्णायक फैसला लेने वाली हैं.

बीजेपी ने क्या दिया ऑफर?

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी ने थलापति विजय को लुभाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है. चर्चा है कि भाजपा ने उन्हें विधानसभा की 80 सीटें और सरकार बनने की स्थिति में 'उपमुख्यमंत्री' का पद ऑफर किया है. जानकारी के अनुसार, दोनों पार्टियों में गतिरोध की वजह भी मुख्यमंत्री का पद ही बताया जा रहा है, क्योंकि थलापति विजय भी खुद मुख्यमंत्री बनकर राज्य की कमान संभालना चाहते हैं. 

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BJP क्यों चाहती है विजय का साथ?

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी हर संभव कोशिश कर रही है कि विजय एनडीए (NDA) का हिस्सा बनें. इस गठबंधन को अमलीजामा पहनाने के लिए बीजेपी दूसरे राज्य के एक उपमुख्यमंत्री के माध्यम से गुप्त बातचीत करा रही है. बीजेपी के लिए थलापति विजय का साथ इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उनकी भारी-भरकम फैन फॉलोइंग राज्य की चुनावी समीकरण को बदलने का माद्दा रखती है.

बीजेपी ने सेट किया चुनावी गणित!

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बीजेपी के चुनावी रणनीतिज्ञ ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि तमिलनाडु में मुकाबला बहुत कांटे का होता है. यहां महज 2 फीसदी वोट शेयर का अंतर भी जीत और हार का फैसला तय कर सकता है. ऐसे में बीजेपी को विजय का साथ चुनावी परिणाम को किसी भी दिशा में मोड़ने का माद्दा रखता है. इसलिए बीजेपी किसी भी तरह थलापति विजय की पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में ताल ठोकना चाहती है.

थलापति विजय को सता रहा है एक डर?

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वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के साथ संभावित गठबंधन की खबरों ने विजय के खेमे में भी हलचल बढ़ा दी है. उनके चुनावी रणनीतिकारों और सलाहकारों का एक बड़ा वर्ग इस पहलू पर लगातार सोच-विचार कर रहा है, क्योंकि राजनीतिक करियर की शुरुआत में ही किसी बड़े राष्ट्रीय पार्टी के साथ गठबंधन में शामिल होने से पार्टी की ‘स्वतंत्र पहचान’ प्रभावित हो सकती है. सलाहकारों को डर है कि एनडीए का हिस्सा बनने से उनकी वह साख और राजनीतिक नैरेटिव कमजोर पड़ सकता है, जिसके आधार पर उन्होंने राजनीति में नई शुरुआत की है.

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