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लोकतंत्र व्यवस्था नहीं, हमारे मौलिक मूल्यों का हिस्सा… घाना संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बताई भारत की महानता

प्रधानमंत्री मोदी ने घाना की संसद को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने अपने भाषण देते हुए कहा कि "आज इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत गौरव का अनुभव हो रहा है. घाना में होना सौभाग्य की बात है, यह एक ऐसी भूमि है जो लोकतंत्र की भावना से ओतप्रोत है."

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त घाना में मौजूद है, जहां उन्होंने और राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा की उपस्थिति में भारत और घाना ने चार महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. ये समझौते दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने घाना की संसद को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने अपने भाषण देते हुए कहा कि "आज इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत गौरव का अनुभव हो रहा है. घाना में होना सौभाग्य की बात है, यह एक ऐसी भूमि है जो लोकतंत्र की भावना से ओतप्रोत है." 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगे कहा, "विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रतिनिधि के रूप में, मैं अपने साथ 1.4 अरब भारतीयों की सद्भावना और शुभकामनाएं लेकर आया हूं. घाना को सोने की भूमि के रूप में जाना जाता है, न केवल आपकी धरती के नीचे छिपी हुई चीजों के लिए, बल्कि आपके दिल में मौजूद गर्मजोशी और ताकत के लिए भी..."

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, "कल शाम का अनुभव बहुत ही मार्मिक था, मेरे प्रिय मित्र राष्ट्रपति जॉन महामा से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करना सम्मान की बात है...भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से मैं इस सम्मान के लिए घाना के लोगों को धन्यवाद देता हूं..."

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मोदी ने कहा, "आज मुझे हमारे दूरदर्शी और राजनेता तथा घाना के प्रिय पुत्र डॉ. क्वामे नक्रूमा को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. उन्होंने एक बार कहा था कि जो ताकतें हमें एकजुट करती हैं, वे उन प्रभावों से कहीं अधिक बड़ी हैं जो हमें अलग रखती हैं. उनके शब्द हमारी साझा यात्रा का मार्गदर्शन करते रहेंगे..."

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घाना गणराज्य की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत लोकतंत्र की जननी है. हमारे लिए लोकतंत्र महज एक व्यवस्था नहीं है; यह हमारे मौलिक मूल्यों का हिस्सा है...भारत में 2,500 से अधिक राजनीतिक दल हैं, 20 अलग-अलग दल अलग-अलग राज्यों पर शासन करते हैं, 22 आधिकारिक भाषाएं हैं, हजारों बोलियां हैं. यही कारण है कि भारत आने वाले लोगों का हमेशा खुले दिल से स्वागत किया गया है."

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों की ऐतिहासिक यात्रा पर हैं. सबसे पहले पीएम घाना पहुंचे. वे पिछले 30 वर्षों में घाना जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं. घाना पहुंचने पर राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने हवाई अड्डे पर स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के साथ-साथ 21 तोपों की सलामी भी दी गई, जो दोनों देशों के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है. यह यात्रा भारत-घाना संबंधों को एक नई दिशा देने के साथ-साथ अफ्रीकी देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल भारत और घाना के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि यह भारत-अफ्रीका सहयोग को भी नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है. 

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