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Modi की काशी में Aurangzeb की निशाना मिटाने की उठी मांग, सपा को लगी मिर्ची !

Maharashtra से उठी औरंगजेब की कब्र उखाड़ने की मांग अब महादेव की काशी तक पहुंच गई, क्या काशी से मिटाएगी योगी सरकार औरंगजेब की निशानी ?

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जिस हिंदुस्तान पर मुगलों ने सैकड़ों साल तक राज किया, उसी हिंदुस्तान में मुगलों ने हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। जहां-जहां उन्हें मठ-मंदिर नजर आते थे, उन्हें तोड़कर मस्जिदें खड़ी कर दी जाती थीं। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है अयोध्या, काशी और मथुरा। अयोध्या में तो सैकड़ों साल बाद बाबरी ढांचा भी हटा दिया गया और भव्य राम मंदिर भी बन गया, लेकिन काशी और मथुरा में मंदिर-मस्जिद की लड़ाई अभी भी जारी है। तो वहीं अब महाराष्ट्र से लेकर महादेव की काशी तक, मुगल आक्रांता औरंगजेब की एक-एक निशानी मिटाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

हिंदुस्तान के लिए भला इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है कि जिस औरंगजेब ने भारत के मठ-मंदिरों को तोड़े, हिंदुओं पर अत्याचार किया, उस औरंगजेब की कब्र आज भी महाराष्ट्र के खुल्दाबाद इलाके में है, जिसे तोड़ने की लगातार मांग उठ रही है। लेकिन मुगलों के कुछ हिमायती इसका विरोध कर रहे हैं, जिसकी वजह से अब तक औरंगजेब की कब्र नहीं उखाड़ी गई। तो वहीं अब ये विवाद महादेव की काशी तक पहुंच गया है, जहां आज भी औरंगजेब के नाम पर एक मोहल्ला है, जिसका नाम है औरंगाबाद। लेकिन अब लगता है औरंगजेब की ये निशानी भी मिटने वाली है, क्योंकि औरंगाबाद का नाम बदल कर लक्ष्मी कुंड या नारायणी धाम रखने की मांग हो रही है और ये मांग की है हिंदूवादी संगठन विश्व वैदिक सनातन न्यास के अध्यक्ष संतोष सिंह ने, जिन्होंने इस मामले में नगर आयुक्त और मेयर को ज्ञापन भी सौंप दिया है।

काशी के जिस औरंगाबाद मोहल्ले का नाम बदलने की मांग उठ रही है, ये मोहल्ला शहर के बीचोंबीच, यानी बाबा काशी विश्वनाथ धाम से महज कुछ ही दूरी पर है। और सबसे बड़ी बात ये है कि इसी औरंगाबाद मोहल्ले में कांग्रेस के कद्दावर नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी का भी मकान है, और ये मकान आज भी औरंगाबाद हाउस के नाम से ही जाना जाता है। और अब जब औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग उठ रही है, तो लगता है समाजवादी पार्टी को रास नहीं आ रहा है। इसीलिए सपा प्रवक्ता अजीज खान समर्थन करने की बजाय कह रहे हैं कि…

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बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अब तक शहरों के नाम बदलने के साथ-साथ रंग बदला है, उसने ना कोई विकास का काम किया है और ना महंगाई और रोजगारी खत्म करने का प्लान है, गरीबों के उत्थान के लिए भी कोई कार्यक्रम नहीं है, बीजेपी का मकसद सिर्फ और सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति और धार्मिक उन्माद को पैदा करना है।

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आजादी के बाद कई सरकारें आईं और चली गईं। किसी भी सरकार ने औरंगाबाद मोहल्ले का नाम बदलने की जहमत नहीं उठाई। यहां तक कि फैजाबाद और इलाहाबाद का नाम बदलने वाले सीएम योगी भी साल 2017 के बाद सैकड़ों बार काशी आए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने भी औरंगाबाद मोहल्ले का नाम बदलने की कोई पहल नहीं की। जबकि ये बात हर कोई जानता है कि जिस औरंगजेब के नाम पर औरंगाबाद मोहल्ले का नाम रखा गया है, उसी औरंगजेब के राज में मुगलों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में तोड़फोड़ मचाई थी और मंदिर की दीवारों पर ही मस्जिद का गुंबद रख दिया था, जिसे आज लोग ज्ञानवापी मस्जिद के नाम से जानते हैं। लेकिन सीएम योगी आज भी इसे ज्ञानवापी मंदिर ही मानते हैं।

जिस ज्ञानवापी को मुसलमान मस्जिद कहते हैं, और कुछ नेता तो इसे मंदिर कहने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते हैं, उस ज्ञानवापी को डंके की चोट पर मंदिर कहने वाले सीएम योगी के राज में ही इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज किया गया, मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन किया गया, और फैजाबाद का नाम बदल कर अयोध्या किया गया। तो क्या अब योगी राज में काशी के औरंगाबाद मोहल्ले का भी नाम बदला जाएगा? क्या काशी से औरंगजेब की निशानी मिटाई जाएगी?

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