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दिल्ली हाई कोर्ट ने सेना के अफसर को नौकरी से निकाले जाने के फैसले को सही ठहराया, धार्मिक कार्यक्रम में जाने से किया था मना, जानें क्या है मामला

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेजीमेंट के एक धार्मिक कार्यक्रम में अफसर द्वारा ड्यूटी से मना करने पर सेना द्वारा बर्खास्त किए जाने के फैसले को सही ठहराया है. यह पूरा मामला साल 2017 से जुड़ा है.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने उस एक ऐसे फैसले को सही ठहराया है, जिसमें अफसर ने एक धार्मिक कार्यक्रम में जाने से मना कर दिया था. पूरा मामला साल 2017 से जुड़ा है. ईसाई धर्म के अफसर ने दूसरे धर्म का कार्यक्रम होने की वजह से यह फैसला लिया था. उसने कहा था कि वह ईसाई धर्म से है और वह इसमें शामिल नहीं हो सकता है. 

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि दिल्ली में तैनात ईसाई धर्म के एक अफसर सैमुअल कमलेसन ने रेजीमेंट के एक धार्मिक परेड में शामिल होने से मना कर दिया था. जिसके बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया था. कमलेसन ने अपनी बर्खास्तगी को लेकर हाई कोर्ट में अपील की थी. उसने दलील में कहा था कि उसे बिना पेंशन और ग्रेच्युटी के निकाला गया है. मुझे दोबारा से नौकरी पर रखा जाए. 

कमलेसन ने अपनी याचिका में कहा था?

कमलेसन ने दिल्ली हाई कोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उसमें कहा कि उनकी रेजिमेंट में सिर्फ एक मंदिर और एक गुरुद्वारा है. वहां सभी धर्मों के लोगों के लिए कोई 'सर्व धर्म स्थल' नहीं है. इसके अलावा परिसर में कोई चर्च भी नहीं है.'

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कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा? 

30 मई को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नवीन चावला और शालिंदर कौर की बेंच ने कहा कि 'हमारे सशस्त्र बलों में सभी धर्मों, जातियों, पंथों, क्षेत्रों और विश्वासों के कर्मी शामिल हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य देश को बाहरी आक्रमणों से बचाना है. वह अपने धर्म, जाति या क्षेत्र से विभाजित होने के बजाय अपनी वर्दी से एकजुट हैं. इसमें सभी धर्मों, जातियों, संप्रदायों, क्षेत्रों और आस्थाओं के लोग हैं.' कोर्ट की बेंच ने कमलेसन के व्यवहार पर भी बड़ा सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि 'यह फैसला सेना के धर्मनिरपेक्ष नियमों के खिलाफ था. सेना में रेजिमेंट के नाम धर्म या क्षेत्र से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इससे सेना के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर कोई असर नहीं पड़ता. हम सेना अपने सैनिकों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं.

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कमलेसन सेना में बतौर लेफ्टिनेंट हुए थे शामिल

बता दें कि कमलेसन मार्च साल 2017 सेना में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल हुआ था. उन्हें थर्ड कैवेलरी रेजिमेंट में तैनात किया गया था. इसमें सिख, जाट और राजपूत सैनिक हैं. वहीं कमलेसन को स्क्वाड्रन B का टूप लीडर भी बनाया गया था. जिसमें कई सिख सैनिक हैं.

'कमलेसन ने अपने धर्म को सीनियर के आदेश के ऊपर रखा'

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि 'कुछ युद्ध उद्घोष ऐसे होते हैं जो सुनने में धार्मिक लग सकते हैं, लेकिन उनका मकसद सैनिकों में एकता और जोश पैदा करना होता है. कमलेसन ने अपने धर्म को अपने सीनियर के आदेश से ऊपर रखा. यह पूरी तरीके से अनुशासनहीनता है. सेना में अनुशासन का स्तर अलग होता है.'

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'कमलेसन को कई बार समझाया गया'

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 'कमलेसन को कई बार समझाया गया था. लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी. यही वजह है कि उन्हें नौकरी से निकाला गया. हमने यह फैसला कई पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया. सेना में अनुशासन बहुत जरूरी है. अगर यहां अनुशासन नहीं होगा, तो सेना ठीक से काम नहीं कर पाएगी. 

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'सेना एक धर्मनिरपेक्ष संस्था है'

कमलेसन पर फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि 'सेना एक धर्मनिरपेक्ष संस्था है. जहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है. लेकिन, यहां नियम है कि किसी भी सैनिक को अपने धर्म को सेना के नियमों से ऊपर रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

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