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लगातार चुनावी हार से परेशान गांंधी परिवार को एक और झटका, नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया-राहुल से कोर्ट ने मांगा जवाब
नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने ED की याचिका पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत सात आरोपियों को नोटिस जारी किया है. यानी कि गांधी परिवार फिर से पूरे मामले में घिरता नजर आ रहा है.
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लगातार मिल रही चुनावी हार से पहले से ही परेशान कांग्रेस और गांधी खानदान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी बुरी तरह घिरते नजर आ रहे हैं. दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक याचिका पर सोनिया-राहुल सहित तमाम आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. ED ने अपनी याचिका में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है.
ED ने निचली अदालत के फैसले को दी है चुनौती
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राऊज एवेन्यू कोर्ट के कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संज्ञान लेने से इनकार करने वाले फैसले को चुनौती देने वाली ईडी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है. राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था. इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस रविंद्र दुडेजा की अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 मार्च 2026 के लिए निर्धारित कर दी है.
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ED के वकील तुषार मेहता क्या दलील दी?
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ईडी की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील तुषार मेहता ने अपनी दलील में कहा कि अंतिम निष्कर्ष यह है कि 50 लाख रुपए की राशि के बदले आरोपियों को 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ति प्राप्त हुई है. जून 2014 में एक व्यक्ति द्वारा प्राइवेट कंप्लेन दायर की गई, जिसपर निचली अदालत ने संज्ञान लिया था और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस पर स्टे लगा दिया था.
तुषार मेहता ने कहा कि अगर कोई एक पेज की FIR फाइल करता है, तब वह ईडी के अपराध का मामला हो सकता है, लेकिन सेक्शन 200 सीआरपीसी के तहत कोर्ट द्वारा संज्ञान लेना क्या ईडी शिकायत का आधार नहीं हो सकता? अदालत ने कहा कि अगर कोर्ट ने निजी शिकायत का संज्ञान लिया है, तो ईडी कुछ नहीं कर सकती.
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निचली अदालत ने बड़ी गलती की: तुषार मेहता
वरिष्ठ वकील तुषार मेहता ने कहा कि निचली अदालत ने बड़ी गलती की है. यह सिर्फ इसी केस की बात नहीं है, बल्कि इसका असर कई दूसरे मामलों पर भी पड़ेगा क्योंकि कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी कोर्ट ने प्राइवेट शिकायत पर संज्ञान लिया है, तो ईडी कुछ नहीं कर सकती है. इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने ईडी की शिकायत को विधिवत न मानते हुए संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था.
हालांकि, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को राहत देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईडी कानून के अनुसार अपनी जांच जारी रखने के लिए स्वतंत्र है. गांधी परिवार के अलावा, ईडी ने सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डॉटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को भी इस मामले में प्रस्तावित आरोपी बनाया है. इससे पहले इसी महीने ED की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की EOW ने नई FIR दर्ज की थी. इसमें सोनिया गांधी-राहुल गांधी, सैम पित्रोदा के साथ-साथ कुछ 6 लोगों और तीन कंपनियों को आरोपी बनाया था.
किस-किस के FIR में हैं नाम?
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FIR में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा (इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख), सुमन दुबे और सुनील भंडारी को आरोपी बनाया गया है. साथ ही साथ तीन कंपनियों मसलन AJL, Young Indian, Dotex Merchandise Pvt Ltd के नाम भी इस FIR में शामिल हैं. इन सबको प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है.
आरोप है कि डोटेक्स जो कोलकाता की कथित शेल कंपनी है, जिसने Young Indian को ₹1 करोड़ दिए थे. आरोप है कि इस लेन-देन की मदद से Young Indian ने कांग्रेस को ₹50 लाख देकर करीब ₹2,000 करोड़ की संपत्ति वाली AJL पर नियंत्रण पा लिया. इस कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की अधिकांश हिस्सेदारी है.
यह हाई-प्रोफाइल मामला उन आरोपों से संबंधित है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने नेशनल हेराल्ड अखबार के मूल प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने के लिए साजिश रची. उन्होंने यंग इंडियन के माध्यम से मात्र 50 लाख रुपए की मामूली रकम का भुगतान किया, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी शेयरधारक हैं.
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सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत पर शुरू हुआ केस
इस विवाद की शुरुआत 2012 में हुई, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि एजेएल के अधिग्रहण की प्रक्रिया में कांग्रेस नेताओं ने धोखाधड़ी और भरोसे का उल्लंघन किया.
जवाहरलाल नेहरू ने की थी नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना
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बता दें कि नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी. इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की ओर से किया जाता था. आर्थिक संकट के कारण 2008 में अखबार बंद कर दिया गया, जिसके बाद विवाद की शुरुआत हुई. साल 2010 में 'यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है.