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दिल्ली पर मंडराया डबल अटैक का साया, अफजल गुरु के नाम पर धमकी और खालिस्तानी मंसूबों का हुआ बड़ा खुलासा

दिल्ली में स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के साथ-साथ संसद को दहलाने की भी धमकी दी गई है. फांसी के फंदे पर लटक चुके अफजल गुरु का नाम लेते हुए आतंकियों ने अपने नापाक मंसूबे जाहिर किए हैं.

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अफजल गुरु को फांसी तो दे दी गई, लेकिन अभी भी अफजल के चाहने वाले मौजूद हैं. और समय-समय पर उसके नाम की हाजिरी लगाते रहते हैं. साल 2001 आपको याद होगा जब संसद पर हमला हुआ था. इस हमले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल तो उठाये ही थे इसके साथ-साथ आतंकियों के मंसूबों को नाकाम भी किया था. संसद पर हमले के दो दशक से भी ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी राजधानी दिल्ली को बार-बार दहलाने की धमकी और कोशिश की जाती रही है. 

10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी

सोमवार की सुबह उस वक्त स्कूलों में हड़कंप मच गया जब राजधानी की 10 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली. आतंकवादी अफजल गुरू का नाम लेते हुए मंसूबे जाहिर किए गए, और दिल्ली को खालिस्तान बनाने की धमकी भी दी गई. हालांकि इस धमकी के बाद दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और बम निरोधक दस्तों ने मौके पर पहुंचकर स्कूल परिसरों की छानबीन शुरू कर दी. 

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खाली कराए गए सभी स्कूल

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स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी जैसे ही मिली तो स्कूल प्रबंधन ने होशियारी से काम लिया. सबसे पहले तो बच्चों को किसी सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा किया गया. इसके साथ ही दिल्ली पुलिस को इसकी सूचना दी गई. वहीं, धमकियों के बाद बड़े पैमाने पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है. 

13 तारीख को संसद पर हमले की धमकी

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स्कूलों को भेजे गए ईमेल में कई धमकी लिखी हुई थी. इसमें दिल्ली को खालिस्तान बनाने की बात भी लिखी गई थी. ईमेल भेजने वाले ने लिखा था कि 13 फरवरी को दोपहर 1:11 पर यह धमाका होगा. आपको बता दें कि साल 2001 में संसद पर हुए हमले की तारीख भी 13 ही थी, हालांकि महीना दिसंबर का था. इस ईमेल्स में अफजल गुरू को भी याद किया गया है, जिसे आज ही के दिन साल 2013 में फांसी की सजा दी गई थी. 

अफजल गुरु कौन था?

अफजल गुरु वो आतंकी था जिसे साल 2001 में पार्लियामेंट पर हुए आतंकवादी हमले की साजिश रचने और उसमें शामिल होने का दोषी ठहराया गया था. अफजल गुरु की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के बाद, उसे 9 फरवरी 2013 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह फांसी दे दी गई. उसे जेल परिसर के अंदर ही दफनाया गया था. 

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