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दिल्ली कैबिनेट के बड़े फैसले: होलंबी कलां में ई-वेस्ट ईको पार्क, डीटीसी को बस संचालन और जल संरचनाओं के संरक्षण को मंजूरी

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कैबिनेट बैठक में राजधानी दिल्ली की जल संरचनाओं (वाटर बॉडीज) के संरक्षण और पुनरुद्धार को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. राजस्व विभाग की इस योजना के लिए एक नया प्रमुख मद (मेजर हेड) खोलने को भी मंजूरी दी गई.

Image Credits_Xgupta_rekha
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में  मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में कैबिनेट बैठक हुई. इसमें राजधानी के विकास और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. 

बैठक में होलंबी कलां में ई-वेस्ट ईको पार्क स्थापित करने, दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बस सेवाओं के संचालन को और बेहतर बनाने की योजना, राजधानी की जल संरचनाओं (वाटर बॉडीज) के संरक्षण एवं पुनरुद्धार तथा अगले माह दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र आयोजित करने जैसे अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.

होलंबी कलां में बनेगा देश का मॉडल ई-वेस्ट ईको पार्क

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मुख्यमंत्री का कहना है कि ये निर्णय दिल्ली को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित राजधानी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इन प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि राजधानी का विकास केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा लाभ आम नागरिकों, विशेषकर गरीब, मध्यम वर्ग और वंचित तबकों तक पहुंचे.

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार स्वच्छ पर्यावरण, मजबूत सार्वजनिक परिवहन, जल संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास को प्राथमिकता दे रही है. ई-वेस्ट ईको पार्क जैसी परियोजनाएं जहां पर्यावरण संरक्षण और हरित रोजगार को बढ़ावा देंगी, वहीं डीटीसी बसों के बेहतर संचालन से आम लोगों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिलेगी. राजधानी के जलाशयों के पुनरुद्धार से न केवल जल संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी मजबूत होगा.

हमारी सरकार का मानना है कि दिल्ली को एक ऐसी आधुनिक राजधानी के रूप में विकसित किया जाए, जहां विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय, पर्यावरण सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं का समान रूप से ध्यान रखा जाए. इसी सोच के तहत सरकार दीर्घकालिक और जन-केंद्रित नीतियों पर निरंतर काम कर रही है.

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कैबिनेट की बैठक में होलंबी कलां में ईको पार्क को मंजूरी

राजधानी दिल्ली में ई-वेस्ट ईको पार्क स्थापित होने जा रहा है. रेखा गुप्ता के अनुसार, कैबिनेट की बैठक में होलंबी कलां में ईको पार्क को मंजूरी दे दी गई है. इस परियोजना से जुड़े कई अहम चरण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं. परियोजना के शुरू होने के बाद होलंबी कलां का यह ई-वेस्ट ईको पार्क देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभरेगा और स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य की दिशा में दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा.

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि दिल्ली में हर साल लगभग 2.5 लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा (ई-वेस्ट) पैदा होता है. फिलहाल इसका करीब 90 प्रतिशत हिस्सा असंगठित क्षेत्र के जरिए निपटाया जाता है. उन्होंने बताया कि ई-वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक निपटान के लिए होलंबी कलां में यह ई-वेस्ट ईको पार्क विकसित किया जाएगा.

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मुख्यमंत्री के अनुसार, होलंबी कलां में पहले चरण में यह ईको पार्क लगभग 11.4 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा. इसकी न्यूनतम प्रसंस्करण क्षमता 51,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी. यह केंद्र ई-वेस्ट (प्रबंधन) नियम, 2022 के तहत अधिसूचित 100 से अधिक प्रकार के ई-वेस्ट के निपटान में सक्षम होगा. यहां ई-वेस्ट का संग्रह, खोलना, रीसाइक्लिंग, उपयोगी धातुओं की रिकवरी और वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग से संबंधित गतिविधियां की जाएंगी.

परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पर्यावरण विभाग की ओर से दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम को सौंपी गई है. निजी भागीदार द्वारा इसमें लगभग 250 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है, जबकि इस चरण में सरकार की ओर से किसी प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है.

मुख्यमंत्री के अनुसार, परियोजना से जुड़े कई अहम चरण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी मिल चुकी है और जून 2025 में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा भूमि उपयोग को आवासीय से उपयोगिता श्रेणी में बदलने की स्वीकृति भी दी जा चुकी है. सरकार का मानना है कि परियोजना के क्रियान्वयन के बाद होलंबी कलां का यह ई-वेस्ट ईको पार्क देश में वैज्ञानिक और टिकाऊ ई-वेस्ट प्रबंधन का उदाहरण बनेगा.

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दिल्ली की जल संरचनाओं के संरक्षण को मंजूरी

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कैबिनेट बैठक में राजधानी दिल्ली की जल संरचनाओं (वाटर बॉडीज) के संरक्षण और पुनरुद्धार को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. राजस्व विभाग की इस योजना के लिए एक नया प्रमुख मद (मेजर हेड) खोलने को भी मंजूरी दी गई.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य राजधानी में उपेक्षित और क्षतिग्रस्त जल निकायों को पुनर्जीवित कर भूजल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करना है. उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विभागों और भूमि स्वामित्व एजेंसियों के अधीन जल निकाय आते हैं, वे सभी अपने-अपने क्षेत्र में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करें.

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मुख्यमंत्री के अनुसार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा पहले ही जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए 19 करोड़ 62 लाख 95 हजार रुपए राजस्व विभाग को हस्तांतरित किए जा चुके हैं. इन निधियों का उपयोग राजस्व विभाग, पंचायत निदेशालय और खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जल निकायों के पुनरुद्धार पर किया जाएगा.

इस योजना के तहत जलाशयों की गाद निकासी, चारदीवारी, पैदल पथ या वॉकिंग ट्रैक का निर्माण और उनके पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार जैसे कार्य किए जाएंगे. प्रत्येक राजस्व जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति इस योजना की प्रगति की निगरानी करेगी.

डीआईएमटीएस से हटकर डीटीसी संभालेगा बस संचालन

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एक अन्य अहम फैसले में कैबिनेट ने दिल्ली की बस सेवाओं का संचालन डीआईएमटीएस से हटाकर डीटीसी को सौंपने को मंजूरी दी है. यह व्यवस्था अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से बस सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, रूट रेशनलाइजेशन आसान होगा और ड्राइवर-कंडक्टरों को अधिक स्थिरता मिलेगी.

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