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दिल्ली ब्लास्ट केस: NIA ने आतंकी उमर नबी के साथी को पकड़ा, धमाके से पहले दी थी पनाह, सामान भी मुहैया करवाया

NIA ने हरियाणा के फरीदाबाद के धौज गांव के रहने वाले शोएब अहमद को अरेस्ट किया है. इस केस में अब तक यह सातवीं गिरफ्तारी है.

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दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने एक और आरोपी को अरेस्ट किया है. गिरफ्तार आरोपी सुसाइड बॉम्बर उमर नबी का साथी है.

NIA ने हरियाणा के फरीदाबाद के धौज गांव के रहने वाला शोएब अहमद को अरेस्ट किया है. इस केस में अब तक यह सातवीं गिरफ्तारी है. NIA के मुताबिक, शोएब ने लाल किले के पास कार ब्लास्ट करने वाले उमर को धमाके से ठीक पहले सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराया था और उसे लॉजिस्टिक सपोर्ट भी दिया था. 

बड़े आतंकी संगठन से कनेक्शन की आशंका

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NIA के प्रवक्ता ने बताया कि शोएब ने उमर को न केवल अपने घर में पनाह दी थी, बल्कि उसे विस्फोटक सामग्री पहुंचाने, सुरक्षित रास्ते बताने और फरार होने में भी मदद की थी. उसकी लोकेशन और कॉल डिटेल्स की जांच से कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. NIA को शक है कि सोयब का ताल्लुक किसी बड़े आतंकी नेटवर्क से भी हो सकता है. 

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NIA की प्रेस रिलीज के मुताबिक, केस नंबर आरसी-21/2025/एनआईए/डीएलआई में पहले ही 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें आतंकी उमर उन नबी के करीबी साथी शामिल हैं, जो धमाके की पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे. शोएब की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और व्यापक हो गया है. NIA अब शोएब को विशेष NIA अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है. जांच एजेंसी शोएब से पूछताछ कर रही है ताकि बाकी फरार आरोपियों तक पहुंचा जा सके. दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही NIA ने देश के कई राज्यों में छापेमारी तेज कर दी है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में एक साथ सर्च ऑपरेशन चल रहे हैं. 

दिल्ली कार ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत 

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गौरतलब है कि 10 नवंबर की शाम दिल्ली में लाल किले के एक कार में भीषण धमाका हुआ था. जिसकी चपेट में आने से 15 लोगों की मौत हो गई. जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं. धमाका इतना तेज था कि लाल किले के आसपास खड़ी कई गाड़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी. 

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जांच एजेंसियों के मुताबिक उमर ही वह आतंकी है जो विस्फोटक से लदी कार चला रहा था और खुद भी आत्मघाती हमले में मारा गया. अभी हाल ही में उमर का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसे फिदायीन हमले से पहले का बताया जा रहा है. वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिकल फैकल्टी था. यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का कहना है कि उमर शुरू से ही बेहद कम क्लास लेता था. वो हफ्ते में एक या दो लेक्चर ही लेता था और वो भी ज्यादा-ज्यादा 15-20 मिनट में खत्म कर वापस अपने रूम में चला जाता था. 

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