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डिफेंस, स्पेस, AI, एविएशन...नाहयान का दो घंटे का दौरा और भारत ने निकाल दी PAK के 'इस्लामिक NATO' की हवा, जानें कैसे
UAE के राष्ट्रपति के महज दो घंटे के संक्षिप्त दौरे में भारत ने पाकिस्तान के ख्वाबों पर पानी फेर दिया है. नाहयान के इस दौरे में भारत और यूएई के बीच ऐसे-ऐसे करार हुए हैं कि पाकिस्तान के इस्लामिक NATO की हवा निकल जाएगी.
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का 2 घंटे का आधिकारिक दौरा सफलतापूर्वक संपन्न हो गई. भारत के द्विपक्षीय संबंध और मौजूदा वैश्विक हालात के मद्देनजर को विदेश मंत्रालय ने इसे काफी बड़ा करार दिया है. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ और समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए. दोनों नेताओं का संयुक्त बयान जारी किया गया.
आपको बता दें कि नाहयान की ये यात्रा ऐसे समय में हुई, जब वैश्विक स्तर पर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के रुख, टैरिफ को लेकर बवाल, ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन और सऊदी-पाक-तुर्किये के बीच रक्षा समझौते के बीच यूएई के राष्ट्रपति का आपातकालीन भारत दौरा काफी अहम हो जाता है. एक ओर जहां यूएई और सऊदी अरब के बीच तनाव की खबरें आ रही हैं और गाजा में पाकिस्तान अपनी भूमिका बढ़ाना चाह रहा है, वहां ऐसे माहौल में भारत और यूएई के दोनों नेताओं की मुलाकत के काफी रणनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. इसे सीधे-सीधे पाकिस्तान को संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
इंडिया-UAE के बीच करार अहम क्यों?
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आपको बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत से मार खाने वाला पाकिस्तान अपनी आवाम को दिखाने के लिए अपनी कूटनीति सक्रियता बढ़ाना चाह रहा है. मुनीर दिखाना चाह रहा है कि उसकी और पाक की पूरी दुनिया में पूछ बढ़ी है, तभी तो ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मुनीर को डिनर के लिए बुलाया. वहीं सऊदी के साथ म्यूचुअल डिफेंस पार्टनरशिप हुई. हालाकिं दोनों ही चीजों की फोटो ऑप से ज्यादा कोई अहमियत नहीं है.
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भारत ने पाकिस्तान के इस्लामिक नाटो के प्लान की निकाली हवा!
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इस दौरान पाकिस्तान दक्षिण एशिया से बाहर अपनी सैन्य कूटनीति और रक्षा पहुंच बढ़ाने के लिए हाथ पैर मार रहा है. चाहे बांग्लादेश को फाइटर जेट की सप्लाइ हो या फिरा गाजा में भूमिका को बढ़ाना, पाकिस्तान खुल को एक अल्टरनेटिव के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में नाहयान के संक्षिप्त, लेकिन बेहद अहम दौरे ने पाकिस्तान के इस्लामिक नाटो के ख्वाब की हवा निकाल दी है. भारत-UAE रक्षा गठजोड़ गेम चेंजर साबित होने जा रहा है. भारत और UAE ने आतंकवाद के खिलाफ भी एक स्पष्ट और सख्त संदेश दिया. दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद समेत हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हुए कहा कि इसके दोषियों, फाइनेंसर्स और समर्थकों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए. इतना ही नहीं टेरर फाइनेंशिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के तहत सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी.
भारत ने पाकिस्तान को दिखा दी जगह
पाकिस्तान के प्लान को इससे पहले कि तुर्की अपनी सहमति देता, इस्लामिक नाटो जमीन पर आता, पीएम मोदी ने अपने कूटनीतिक चाल से पाकिस्तान के पर काट दिए हैं. यूएई वो देश है जिसे पाकिस्तान हलके में नहीं ले सकता. यूएई लंबे समय से पाकिस्तानी मजदूरों को काम देने वाला देश, रेमिटेंश का जरिया और बड़ा इस्लामिक मुल्क रहा है. ऐसे में यूएई जब भारत के साथ मजबूती से खड़ा है तो पाकिस्तान की चू भी नहीं निकलेगी. अब भारत ने बड़े ही शानदार तरीके से पड़ोसी देश के इस कोशिश को नाकाम करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. खाड़ी के देशों से भारत लगातार अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है.
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विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान से पहले यात्रा को लेकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यूएई के राष्ट्रपति का एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनका स्वागत किया, जो एक खास इशारा है और दोनों नेताओं के बीच बहुत गर्मजोशी भरे और करीबी रिश्तों को दिखाता है. इसके बाद वे एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ गए, जहां सीमित और फिर बड़े फॉर्मेट में बातचीत हुई, जिसमें प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने एक-दूसरे से बात की. नेताओं की मौजूदगी में कई डॉक्यूमेंट्स का भी आदान-प्रदान हुआ. इस यात्रा का महत्व यूएई के राष्ट्रपति के साथ आए प्रतिनिधिमंडल की बनावट से समझा जा सकता है. इसमें अबू धाबी और दुबई दोनों के शाही परिवारों के सदस्य, और कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल थे."
इंडिया-यूएई के बीच 100 बिलियन डॉलर के पार बाइलेटरल ट्रेड
विदेश सचिव ने आगे कहा, "व्यापार के मोर्चे पर, 2022 में दोनों देशों के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने के बाद से, द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है. इसे देखते हुए, दोनों नेताओं ने लक्ष्य को बढ़ाने और 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर करने का फैसला किया. यह भी तय किया गया कि एमएसएमई उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरेशियाई क्षेत्रों में आसान बनाया जाएगा."
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रक्षा, स्पेस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
अहम समझौतों की बात करें तो रक्षा क्षेत्र में सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए दोनों देशों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर काम करने का फैसला किया है. इसके अलावा, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़े समझौते हुए. भारतीय संस्था इन-स्पेस और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच एक समझौता हुआ है, जिसका मकसद स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करना है. इस पहल के तहत दोनों देश मिलकर नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट बनाने की फैक्ट्रियां, संयुक्त अंतरिक्ष मिशन और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करेंगे.
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रेल, एविएशन सेक्टर में भी बड़े करार
बयान के अनुसार, सबसे बड़ा निवेश समझौता गुजरात के धोलेरा को लेकर हुआ है. जिसके तहत यूएई गुजरात के धोलेरा में बन रहे 'स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन' के विकास में भागीदार बनेगा. इस समझौते के बाद धोलेरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, विमानों की मरम्मत के लिए एमआरओ (एमआरओ) सेंटर, नया बंदरगाह (ग्रीनफील्डपोर्ट) और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. साथ ही रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे.
न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भी साथ आए भारत-यूएई
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दोनों पक्षों ने एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर विचार करने का फैसला किया है, जिसमें बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का डेवलपमेंट और डिप्लॉयमेंट, साथ ही एडवांस्ड रिएक्टर सिस्टम, न्यूक्लियर पावर प्लांट ऑपरेशन, मेंटेनेंस और न्यूक्लियर सेफ्टी में सहयोग शामिल है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सहयोग के लिए प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया गया.
यूएई की पार्टनरशिप से भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहयोग करने का फैसला किया गया. यूएई भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर भी विचार करेगा. मंत्रालय के अनुसार, यह अपेक्षाकृत नई अवधारणा है, लेकिन यह देखने के लिए काम किया जाएगा कि इन्हें आपसी मान्यता प्राप्त संप्रभुता समझौतों के तहत कैसे स्थापित किया जा सकता है.
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भारत-यूएई के बीच 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य
आपको बताएं कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सोमवार को भारत-यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया.
दोनों नेताओं ने 2022 में व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर के बाद से व्यापार और आर्थिक सहयोग में हुई मजबूत वृद्धि का स्वागत किया. बयान में कहा गया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
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MSME सेक्टर को कनेक्ट करने पर जोड़
नेताओं ने सितंबर 2025 में आयोजित 13वीं उच्चस्तरीय निवेश टास्क फोर्स और दिसंबर 2025 में हुई 16वीं भारत-यूएई संयुक्त आयोग बैठक तथा 5वीं रणनीतिक वार्ता के परिणामों का समर्थन किया. उन्होंने दोनों देशों की सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों को आपस में जोड़ने के लिए अपनी टीमों को दिशा-निर्देश दिए.
इस संदर्भ में ‘भारत मार्ट’, ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ और ‘भारत-अफ्रीका सेतु’ जैसी प्रमुख पहलों के शीघ्र क्रियान्वयन का आह्वान किया गया, ताकि मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया क्षेत्र में एमएसएमई उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सके.
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पहले नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की सफलता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को 2026 में प्रस्तावित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में भागीदारी पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया.
भारतीय कंपनियों को खाड़ी में मिलेगी मदद
दोनों नेताओं ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक (एफएबी) की शाखाओं की स्थापना का स्वागत किया, जिससे गिफ्ट सिटी एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभर रही है. एफएबी की गिफ्ट सिटी शाखा भारतीय कंपनियों और निवेशकों को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) तथा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी.
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दोनों पक्षों ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-यूएई सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और सतत आपूर्ति शृंखलाओं तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने सतत कृषि को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, नवाचार और ज्ञान आदान-प्रदान की भूमिका पर जोर दिया.
10 वर्ष के लिए LNG आपूर्ति पर भी समझौता
ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी की मजबूती पर संतोष व्यक्त करते हुए नेताओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा में यूएई के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और एडीएनओसी गैस के बीच 10 वर्षीय एलएनजी आपूर्ति समझौते के हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिसके तहत 2028 से प्रति वर्ष 0.5 मिलियन टन एलएनजी की आपूर्ति होगी.
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पेमेंट सिस्टम को लेकर भी बनी सहमति
नेताओं ने वित्तीय क्षेत्र में गहराते सहयोग की भी सराहना की और सीमा-पार भुगतान को तेज, सस्ता और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने पर काम करने का निर्देश दिया.
स्पेस सेक्टर में भी अभूतपूर्व सहयोग
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अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर भी सहमति बनी. इस संदर्भ में अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से वाणिज्यीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त पहल पर हुए समझ को सराहा गया. इस पहल का उद्देश्य एक एकीकृत अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, संयुक्त भारत-यूएई मिशनों को सक्षम बनाना, वैश्विक वाणिज्यिक सेवाओं का विस्तार, उच्च-कौशल रोजगार और स्टार्टअप सृजन तथा सतत व्यावसायिक मॉडलों के जरिए द्विपक्षीय निवेश को मजबूत करना है.
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दोनों नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवाचार में, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया. भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने में सहयोग के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने देश में डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी सहमति जताई.