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6 साल बाद चीन के दौरे पर जाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के संकेत, जानें कितना खास है यह दौरा

2020 गलवान घाटी संघर्ष के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहली बार चीन के दौरे पर जाने वाले हैं. वह अगले हफ्ते 10 देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लेंगे. इसमें चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी शामिल है. इस बैठक में आतंकवाद विरोधी उपायों, सुरक्षा सहयोग, और कनेक्टविटी बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अगले हफ्ते चीन के दौरे पर रवाना होने वाले हैं. वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे. साल 2020 गलवान संघर्ष के बाद भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी. इस बैठक में 10 देशों के रक्षा मंत्री शिरकत करेंगे. इसमें सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद विरोधी उपायों और कनेक्टविटी बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. 

भारत-चीन के बीच होगी द्विपक्षीय वार्ता!

इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चीनी समकक्ष और रूसी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं. साल 2024 में भारत-चीन सीमा समझौते के बाद चीनी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पहली मुलाकात होगी. इस दौरान पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए सैनिकों की वापसी और गश्त की बहाली पर सहमति बनी थी. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के साथ कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी. भारत की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद को सीधा समर्थन देने की वजह से कोई वार्ता संभव नहीं है. 

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10 देशों के रक्षा मंत्री लेंगे हिस्सा 

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SCO की इस बैठक में भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान सहित 10 देशों के रक्षा मंत्री हिस्सा लेंगे. भारतीय रक्षा मंत्री किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कजाकिस्तान जैसे कई मध्य एशियाई देशों के साथ मुलाकात करेंगे. 

भारत-चीन रिश्तों में सुधार के बड़े संकेत

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रक्षा मंत्री के इस दौरे पर भारत-चीन के बीच बिगड़े रिश्तों में सुधार के बड़े संकेत मिल रहे हैं. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकात के बाद दोनों ही देशों की तरफ से विश्वास-बहाली पर कई बड़े उपाय  किए गए हैं. इनमें मानसरोवर यात्रा की बहाली, नदियों के जल का डेटा साझा करना, सीधी हवाई यात्रा की उड़ानों की बहाली और वीजा प्रक्रिया को आसान करने जैसे कई बड़े कदम हैं. 

कितना खास है यह दौरा?

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साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में आए ठहराव के बाद यह दौरा काफी खास माना जा रहा है. अक्टूबर 2024 के बाद दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता को बनाए रखने में बड़ा कदम उठाया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लाओस में आयोजित 11वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में भी एडमिरल डोंग जुन से मुलाकात की थी. यह सीमा समझौते के बाद पहली मुलाकात थी. 

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