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सपा सांसद Rambhual Nishad की सांसदी पर मंडराया खतरा, Supreme Court ने भेजा नोटिस !

Lok Sabha Election के दौरान Sultanpur से सिटिंग सांसद मेनका गांधी को चुनाव हराकर सपाई रामभुआल निषाद ने इतिहास रच दिया था लेकिन लगता है अब जल्द ही रामभुआल निषाद की सांसदी जाने वाली है क्योंकि मामला सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट चला गया है !

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लोकसभा चुनाव हो गया। नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री भी बन गये। लेकिन लोकसभा चुनाव की लड़ाई लगता है अभी खत्म नहीं हुई है।और ये लड़ाई है उत्तर प्रदेश की सबसे हॉट लोकसभा सीट में से एक सुल्तानपुर की। जहां से एक तरफ बीजेपी ने मेनका गांधी को टिकट देकर उतारा था।तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने राम भुआल निषाद को टिकट देकर मैदान में उतारा था। लेकिन जब चुनावी नतीजे आए तो सिटिंग सांसद मेनका गांधी को चुनाव हराकर सपाई रामभुआल निषाद ने इतिहास रच दिया। लेकिन लगता है अब जल्द ही रामभुआल निषाद की सांसदी जाने वाली है। क्योंकि मामला सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट चला गया है


दरअसल सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर साल 2014 में बीजेपी नेता वरुण गांधी ने जीत हासिल की थी। जबकि साल 2019 में उनकी मां और बीजेपी नेता मेनका गांधी ने जीत दर्ज की थी। तो वहीं साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर उन्हें इसी सीट से टिकट देकर मैदान में उतारा था। लेकिन इस बार वो जीत हासिल नहीं कर पाईं। सपा उम्मीदवार रामभुआल निषाद ने उन्हें 43 हजार से भी ज्यादा वोटों से हरा दिया था। लेकिन अब रामभुआल निषाद की सांसदी खतरे में पड़ गई है। क्योंकि मेनका गांधी ने उन पर आरोप लगाया है कि राम भुआल निषाद ने नामांकन के वक्त दाखिल हलफनामे में अपने खिलाफ दर्ज सभी 12 मुकदमों की जानकारी नहीं दी है। इसी मामले को लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने की समय सीमा खत्म होने की वजह से मेनका गांधी की याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद वो सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं। और रामभुआल निषाद के हलफनामे के साथ साथ चुनाव आयोग के समय सीमा वाले नियम के खिलाफ भी याचिका दाखिल कर दी। जिस पर सात जनवरी को सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने सपा सांसद रामभुआल निषाद के साथ ही चुनाव आयोग को भी नोटिस भेज कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। और अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो रामभुआल निषाद की सांसदी भी जा सकती है।

मेनका गांधी की एक याचिका खारिज ।


सुप्रीम कोर्ट ने सपाई सांसद रामभुआल निषाद के चुनावी हलफनामे के खिलाफ दायर याचिका तो स्वीकार कर ली और इस मामले में नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब भी मांग लिया। लेकिन मेनका गांधी की दूसरी याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में मेनका गांधी ने जनप्रतिनिधित्व कानून के उस प्रावधान सेक्शन 81 को चुनौती दी थी जिसके तहत इलेक्शन पिटीशन दाखिल करने की 45 दिन की समय सीमा का उल्लेख है। जिसकी वजह से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। और अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून बनाना हमारा काम नहीं है, इसमें हम दखल नहीं देंगे, इस तरह से कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने लगे तो मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से साफ है कि जनप्रतिनिधित्व कानून का सेक्शन 81 बरकरार रहेगा। जिसके तहत इलेक्शन पिटीशन 45 दिन के अंदर ही दाखिल की जा सकती है।लेकिन कोर्ट ने मेनका गांधी की पहली याचिका पर सुनवाई करते हुए सपा सांसद रामभुआल निषाद और चुनाव आयोग को जरूर नोटिस जारी कर दिया है। और चार हफ्ते में जवाब मांगा है। अगर 12 मुकदमे छुपाने के आरोप साबित हो जाते हैं तो उनकी सांसदी भी जा सकती है।

कौन हैं रामभुआल निषाद ?


रामभुआल निषाद पहले बीजेपी में ही थे और साल 2012 में उन्होंने गोरखपुर ग्रामीण से टिकट मांगा था लेकिन बीजेपी ने टिकट नहीं दिया जिससे नाराज पार्टी छोड़ दी थी। और साल 2014 में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बीएसपी के टिकट से चुनाव भी लड़े लेकिन हार गये। बाद में बसपा ने भी उन्हें विवादित बयानबाजी की वजह से पार्टी से निकाल दिया था। और अब वो सुल्तानपुर से सपा सांसद हैं। लेकिन उनकी सांसदी पर भी तलवार लटक रही है।अगर उनकी सांसदी जाती है तो सपा के पास 36 सांसद ही बचेंगे। वैसे आपको क्या लगता है। सपा सांसद रामभुआल निषाद की सांसदी जाएगी या बचेगी। 
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