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PM मोदी की चाय पार्टी में क्यों गईं प्रियंका गांधी? सांसद ने उठाए सवाल, बताया- विपक्ष के स्टैंड के खिलाफ
शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन प्रियंका गांधी की सत्ता पक्ष के सांसदों के साथ खिलखिलाती तस्वीर का विरोध होने लगा है. INDIA के ही नेताओं ने सवाल उठा दिए हैं.
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हर समय हंगामे और शोर से गूंजने वाली संसद में जब पक्ष-विपक्ष के सांसदों का दोस्ताना अंदाज दिखा तो चर्चा होना लाजमी है. ऐसी ही तस्वीर शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सामने आई. जब PM मोदी संग कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी चाय पर चर्चा करती दिखीं. चर्चा तो ठीक है लेकिन अब प्रियंका की इस मीटिंग का विरोध होने लगा. विपक्षी INDIA के एक दल ने इस मीटिंग पर कड़ी आपत्ति जताई.
CPI (M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने प्रियंका गांधी और कांग्रेस पर चाय पार्टी को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, संसद में मनरेगा को खत्म किए जाने के घंटों बाद यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने एक आम चाय पार्टी में शामिल होना चुना.
विपक्ष के सामूहिक स्टैंड के खिलाफ
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जॉन ब्रिटास ने दावा किया कि ऐसे नजारे से कांग्रेस नेता भी असहज थे. प्रियंका गांधी का PM मोदी के साथ चाय पार्टी में शामिल होना विपक्ष के सामूहिक स्टैंड के खिलाफ है. उन्होंने इसे विपक्ष का नैतिक पतन और भारतीय लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया. जॉन ब्रिटास ने यह भी कहा कि जब विपक्ष के कई लोगों ने इसका विरोध किया तो प्रियंका गांधी वहां क्यों गई. जबकि उनके (प्रियंका गांधी) पास कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी के स्ट्रक्चर में कोई औपचारिक पद नहीं है.
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मनरेगा को बदलने पर बिफरे सांसद
CPI(M) सांसद का ये रुख पूर्व मनमोहन सरकार की MGNREGA को VBGRAMG करने के बाद आया है. उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, जब यह कानून लगभग 50 करोड़ गरीब लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है, तब प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर के साथ विपक्षी नेताओं का चाय पर दिखना बेहद विचलित करने वाला है. ब्रिटास ने इसे अलोकतांत्रिक करार दिया.
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इन विपक्षी दलों ने किया था बहिष्कार
जॉन ब्रिटास ने उन सांसदों का जिक्र किया जिन्होंने इस चाय पार्टी से दूरी बनाई. उन्होंने कहा, ‘DMK के वरिष्ठ नेता टी.आर. बालू और कनिमोझी भी नहीं गए. साथ ही साथ समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने भी बैठक का पूरी तरह बहिष्कार किया.’ हालांकि जॉन ब्रिटास का ये दावा गलत है क्योंकि ‘चाय पर चर्चा’ में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव साफ नजर आए थे.
जॉन ब्रिटास को सबसे ज्यादा प्रियंका का इस मीटिंग में शामिल होना खटका. उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से गलत संदेश बताया. उन्होंने पहले की उन बैठकों की याद दिलाई जिसमें केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में विपक्ष ने ऐसी बैठकों का बहिष्कार किया था.
सोनिया गांधी ने भी किया था मनरेगा में बदलाव का विरोध
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कांग्रेस राज में आई Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) में बदलाव कर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB–G RAM G) करने पर विपक्ष का हमला जारी है. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने BJP पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने वीडियो जारी कर सरकार को घेरा है. सोनिया गांधी ने कहा, 20 साल पहले जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब संसद में आम सहमति से मनरेगा कानून पास किया गया था. यह एक क्रांतिकारी कदम था, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला. खासतौर पर गरीब, वंचित और अत्यंत गरीब वर्ग को रोजी-रोटी का बड़ा सहारा मिला. उन्होंने कहा, ‘सरकार ने जरूरतमंदों को रोजगार देने वाले मनरेगा पर बुलडोजर चलाया है. अब किसको, कितना, कहां और किस तरह रोजगार मिलेगा, यह जमीनी हकीकत से दूर दिल्ली में बैठकर सरकार तय करेगी.’