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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का दावा, यूपी में हो रहा मुआवजा घोटाला !
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का दावा है कि मौनी अमावस्या पर मची भगदड़ में मारे गए लोगों को के आश्रितों को यूपी पुलिस 25 लाख रुपये के बजाय पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दे रही है।
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ सनातन का सबसे बड़ा आयोज महाकुंभ भले ही सम्पन्न हुए कई दिन बीत गए हो लेकिन इसको लेकर सूबे में सियासत फ़िलहाल खत्म होते नही दिखाई दे रही है। इस कड़ी में समाजवादी पार्टी के बाद कांग्रेस ने प्रदेश की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का दावा है कि मौनी अमावस्या पर मची भगदड़ में मारे गए लोगों को के आश्रितों को यूपी पुलिस 25 लाख रुपये के बजाय पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दे रही है। राय ने कहा अब प्रदेश में बीजेपी मुआवजे के सहारे नया घोटाला कर रही है। यही वजह है की सरकार हदसे के दौरान मारे गए लोगों की सूची नहीं जारी कर रही है।
प्रमाणपत्र क्यों नहीं हुई जारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों के सामने आपनी बात रखते हुए महाकुंभ में मची भगदड़ के दौरान मृतकों की सूची और उनके आश्रितों को मिलने वाले मुआवजे की राशि को लेकर गंभीर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा "मौनी अमावस्या पर हुई हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी लेकिन सरकार ने काफी देरी से सिर्फ़ 30 लोगों की मौत को स्वीकार किया। अब मृतकों के आश्रित कोई ख़ुलासा न करें इसके लिए यूपी पुलिस बिना प्रमाण पत्र जारी किए मृतकों के परिवार के लोगों को नकद मुआवजा दे रही है।" इसके आगे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने एक तस्वीर दिखाई जिसमें यह दिख रहा है कि यूपी पुलिस झारखंड में एक परिवार को मुआवजा देने गई। और कहा यह तस्वीर बता रही है कि बीजेपी सरकार सच को छिपाने की हर मुमकिन प्रयास कर रही है।
यूपी पुलिस छिपा रही सच
प्रेसवार्ता के दौरान अजय राय ने दावा किया है कि " झारखंड के र्वी सिंहभूम जिले में रहने वाले शिवराज गुप्ता की मौनी अमावस्या के दिन हुई भगदड़ में मौत हो गई थी लेकिन यूपी पुलिस ने उनके नाम को मृतकों की सूची में अंकित नही किया था। अब यूपी पुलिस झारखंड में शिवराज गुप्ता के घर पहुंचकर उनके आश्रितों मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपए देने का प्रयास किया। लेकिन उनके बेटे ने इसे लेने से इनकार किया और कहा कि सरकार ने पच्चीस लाख देने का एलान किया था। वही अजय राय ने यह भी दावा किया की यूपी पुलिस ने झारखंड के अधिकारियों से इस बाबत कोई सम्पर्क भी नही साधा। इसी तरह का काम यूपी पुलिस ने पश्चिम बंगाल में किया। बिना स्थानीय अधिकारियों से बात किए वहां भी दो परिवारों को सरकार ने पांच-पांच लाख रुपये दिए गए है। अजय राय ने कहा कि बड़ा सवाल यह है कि यूपी पुलिस इस तरह से काम करके क्या छिपाने की कोशिश कर रही है। बताते चले कि 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तकि चले महाकुंभ में लगभग 66 करोड़ से भी ज़्यादा श्रद्धालु शामिल हुए थे। इस दौरान मौनी अमावस्या के दिन अत्यधिक भीड़ होने के चलते भगदड़ मची जिसमें सरकारी आकड़ों के मुताबिक़ 30 लोगों की मौत हुई जबकि विपक्ष के सभी सियासी दल बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने का दावा कर रहे है।
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