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पहले GRAM G का विरोध, अब राहुल के पोस्ट पर रिएक्शन, क्या कांग्रेस और शशि थरूर के बीच हो गया सब कुछ ठीक?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार के कामकाज की तारीफ की थी. जबकि कांग्रेस की मीटिंग से नदारद रहे. लेकिन अब फिर शशि थरुर बदले-बदले अंदाज में नजर आए हैं.

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संसद का शीतकालीन सत्र अब खत्म हो चुका है. इस सत्र के दौरान सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष के बीच कई बहस से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा. इस बीच राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों को निगाहें कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर टिकी थी. जिनको लेकर लंबे समय से यह अनुमान लगाया जा रहा है की 

कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही थी कि उनका और पार्टी की शीर्ष लीडरशिप का रिश्ता पहले जैसा सहज नहीं रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार के कामकाज की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी. इसके साथ ही वे कांग्रेस नेतृत्व की ओर से बुलाई गई कुछ अहम बैठकों से भी दूर नजर आए. इन घटनाओं ने यह अटकलें तेज कर दी थीं कि थरूर पार्टी से नाराज हैं या फिर अपनी अलग राजनीतिक राह तलाश रहे हैं. हालांकि, अब हालात कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में शशि थरूर का रुख फिर से कांग्रेस के पक्ष में झुकता दिख रहा है. उन्होंने न केवल पार्टी के मुद्दों पर खुलकर बोलना शुरू किया है, बल्कि राहुल गांधी के एक अहम पोस्ट को साझा कर सियासी संदेश भी दे दिया है.

राहुल गांधी का पोस्ट शेयर कर दिया संकेत

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शशि थरूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर काफी सक्रिय रहते हैं. आमतौर पर वे राहुल गांधी के कई पोस्ट साझा करते रहे हैं, लेकिन हाल के महीनों में उन्होंने ऐसा करना लगभग बंद कर दिया था. इसी वजह से कांग्रेस के भीतर मतभेद की चर्चाएं और तेज हो गई थीं. अब थरूर ने राहुल गांधी के मनरेगा से जुड़े पोस्ट को शेयर कर कांग्रेस के रुख का खुला समर्थन किया है. थरूर ने अपने पोस्ट में लिखा कि मनरेगा योजना भारत की महान विकास कहानियों में से एक रही है. यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए एकमात्र मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवच है. उन्होंने साफ कहा कि इस योजना को खत्म करना एक पीछे जाने जैसा कदम है और इसे वापस लिया जाना चाहिए.

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मनरेगा बनाम VB-G RAM G का विवाद

दरअसल, केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को समाप्त कर उसकी जगह VB-G RAM G नामक नया बिल पेश किया है. इस बिल को पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा से भी मंजूरी मिल चुकी है. कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने रोजगार की गारंटी देने वाली योजना को कमजोर कर दिया है. राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा था कि मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस साल खत्म कर दिए. उन्होंने कहा कि VB-G RAM G कोई सुधार नहीं है, बल्कि यह अधिकार आधारित और मांग आधारित रोजगार गारंटी को समाप्त कर देता है. राहुल के मुताबिक, यह योजना अब दिल्ली से नियंत्रित होने वाली राशन आधारित व्यवस्था बन गई है, जो मूल रूप से गांव विरोधी है.

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ग्रामीण गरीबों पर असर की चेतावनी

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को मोलभाव की ताकत दी. इससे शोषण और मजबूरी में होने वाला पलायन कम हुआ. मजदूरी बढ़ी, काम की परिस्थितियों में सुधार हुआ और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भी हुआ. उन्होंने चेतावनी दी कि नई व्यवस्था इस ताकत को तोड़ने का काम करेगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोविड काल के दौरान जब अर्थव्यवस्था ठप हो गई थी, तब मनरेगा ने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया था. इस योजना से महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा हुआ, क्योंकि साल दर साल महिलाओं का योगदान आधे से अधिक मानव-दिवस में रहा. राहुल गांधी के मुताबिक, रोजगार योजनाओं में कटौती का सबसे पहले असर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, भूमिहीन मजदूरों और गरीब ओबीसी समुदायों पर पड़ता है.

थरूर के बदले तेवर क्यों अहम हैं?

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शशि थरूर का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कुछ समय पहले तक वे सरकार के कुछ कदमों की सराहना करते नजर आ रहे थे. ऑपरेशन सिंदूर के बाद उन्होंने मोदी सरकार की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि की तारीफ की थी. केरल के तिरुवनंतपुरम में हुए निकाय चुनाव को लेकर भी उन्होंने भाजपा की प्रशंसा की थी, जिससे पार्टी के भीतर असहजता बढ़ी थी. लेकिन इसके बाद थरूर ने कई मुद्दों पर कांग्रेस की लाइन को मजबूती से रखा. हाल ही में उन्होंने लोकसभा में परमाणु ऊर्जा से जुड़े विधेयक पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि इस विधेयक में रेडियोधर्मी विकिरण और परमाणु अपशिष्ट से पैदा होने वाले जोखिमों को नजरअंदाज किया गया है.

परमाणु ऊर्जा विधेयक पर सरकार को घेरा

भारत के रूपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन विधेयक, 2025’ पर चर्चा के दौरान थरूर ने कहा कि यह विधेयक भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को लेकर स्पष्ट दिशा नहीं देता. उन्होंने दावा किया कि इससे यह अनिश्चितता बढ़ती है कि देश का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम किस दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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क्या वाकई सब ठीक हो गया है

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शशि थरूर के हालिया कदमों ने कांग्रेस के भीतर नई चर्चा को जन्म दे दिया है. राहुल गांधी के पोस्ट का समर्थन करना और पार्टी लाइन पर मुखर होकर बोलना इस ओर इशारा कर रहा है कि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच की दूरी कम हो रही है. हालांकि, राजनीति में संकेतों के कई मायने होते हैं. फिलहाल इतना तय है कि थरूर का बदला हुआ अंदाज आने वाले समय में कांग्रेस की सियासत को नई दिशा दे सकता है.

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