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मोदी सरकार की ‘राफेल डील’ पर कांग्रेसी थरूर गदगद, AI समिट की भी जमकर की तारीफ, आज सम्मेलन में रहेंगे मौजूद

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत-फ्रांस राफेल डील का समर्थन करते हुए कहा कि मजबूत रक्षा जरूरी है ताकि कोई देश भारत को कमजोर न समझे. उन्होंने एआई शिखर सम्मेलन की भी सराहना की और कहा कि बड़े आयोजनों में छोटी तकनीकी दिक्कतें सामान्य हैं.

Shashi Tharoor (File Photo)
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने भारत-फ्रांस राफेल डील का खुलकर समर्थन किया है और साफ कहा है कि मजबूत रक्षा व्यवस्था किसी भी देश की गरिमा और सुरक्षा की बुनियाद होती है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है और साथ ही वैश्विक स्तर पर आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में भी भारत की सक्रिय भूमिका चर्चा में है.

रक्षा सौदा क्यों है जरूरी?

थरूर ने कहा कि रक्षा का मतलब युद्ध की इच्छा नहीं, बल्कि मजबूत प्रतिरोध क्षमता है. उनके शब्दों में, भारत को इसलिए सशक्त होना चाहिए ताकि कोई देश हमें कमजोर समझने की गलती न करे. उन्होंने इसे रक्षात्मक सुरक्षा बताया और कहा कि इस मामले में वह सरकार के साथ खड़े हैं. यह बयान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुटता का संकेत देता है.

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मेक इन इंडिया को मिलेगी ताकत

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राफेल डील पर बोलते हुए थरूर ने खास तौर पर इस बात को रेखांकित किया कि फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) द्वारा बनाए जाने वाले विमानों के कई हिस्सों का निर्माण भारत में किया जाएगा. यह पहल मेक इन इंडिया को मजबूती देगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी. जानकारी के मुताबिक 114 विमानों में से 18 विमान सीधे उड़ान की स्थिति में आपूर्ति किए जाएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में चरणबद्ध तरीके से होगा. इसमें लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण का उपयोग किया जाएगा.

वायु सेना की मौजूदा स्थिति

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यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि भारतीय वायु सेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या स्वीकृत 42 के मुकाबले घटकर 31 रह गई है. ऐसे में आधुनिक मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल जैसे अत्याधुनिक विमान भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता और रणनीतिक बढ़त को मजबूत करेंगे.

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी

भारत-फ्रांस संबंधों पर भी इस डील का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने हाल ही में कहा कि यह सौदा सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मेक इन इंडिया इस कार्यक्रम का मुख्य पहलू होगा और फ्रांस भारत के साथ पनडुब्बी सहयोग बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है.

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एआई शिखर सम्मेलन पर थरूर ने दी प्रतिक्रिया

दूसरी ओर एआई शिखर सम्मेलन को लेकर  की भी खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में कुछ तकनीकी दिक्कतें जरूर आईं, लेकिन इतने बड़े आयोजनों में ऐसा होना सामान्य बात है. उनके अनुसार सबसे प्रभावशाली पहलू यह रहा कि कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विश्व नेता इसमें शामिल हुए और उन्होंने यह संदेश दिया कि एआई विकास का मूल सिद्धांत समाज पर सकारात्मक प्रभाव होना चाहिए. थरूर स्वयं शुक्रवार को इस सम्मेलन में भाषण देने वाले हैं.

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बताते चलें कि अब यह स्पष्ट है कि एक ओर भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और शक्ति संतुलन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर उभरती तकनीकों जैसे एआई में भी वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है. राफेल डील और एआई सम्मेलन पर थरूर के बयान यह संकेत देते हैं कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर व्यापक सहमति बनती दिख रही है. आने वाले समय में यह रणनीतिक मजबूती भारत की वैश्विक स्थिति को और सशक्त कर सकती है.

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