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नीतीश कुमार के साइलेंट वोट बैंक पर पड़ी कांग्रेस की नज़र, क्या लगा पाएगी सेंध ?

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तमाम सियासी दलों ने अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने बिहार में एक विशेष अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की है... इसके साथ पार्टी राज्य भर में ब्लॉक स्तर तक जाकर महिलाओं के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुनेगी.

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बिहार विधानसभा के चुनाव में अब कुछ ही महीनों का समय बचा है. इसको लेकर तमाम राजनीतिक दल कमर कसते हुए चुनावी तैयारी में जुट गए हैं. विधानसभा के चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए का नेतृत्व कर रहे हैं और गठबंधन की तरफ से वो एक बार फिर मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार भी हैं. साल 2005 से नीतीश कुमार लगातार बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर काबिज हैं. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह है कि उनको आधी आबादी यानी राज्य की 48% महिलाओं का वोट के रूप में आशीर्वाद मिलता है. इन मतदाताओं को साइलेंट वोटर के रूप में माना जाता है. जो चुनावी नतीजे में जीत और हार की बड़ी वजह बनते हैं . बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव समेत अन्य राजनीतिक दल भी इस बात को अच्छे तरीके से समझते हैं. 
महिलाएं क्यों देती हैं नीतीश का साथ?
चुनावी राज्य बिहार में 2 करोड़ से ज्यादा जीविका दीदी है. जो खास वोटर के रूप में नीतीश कुमार का साथ देती हैं. इन महिला वोटर्स पर इन सियासी दलों की नजरें भी हैं. इन मतदाताओं को साधने के लिए तेजस्वी यादव ने माई बहन योजना की घोषणा की है तो वहीं विपक्षी महागठबंधन में राजद की साथी कांग्रेस भी इन महिला वोटर्स को साधने की तैयारी में जुटी है और एक बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रही है. इसके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शराबबंदी का फैसला महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रखा है. जेडीयू लगातार इस बात पर बल दे रही है कि अगर सरकार बदलती है तो विपक्ष फिर से राज्य में शराबबंदी के फैसले को निरस्त करते हुए फिर से शराब की दुकानें खुलवानी शुरू करेगा.
कांग्रेस का नया अभियान
महिला वोटर्स को साधने का जिम्मा कांग्रेस की महिला अध्यक्ष अलका लांबा ने उठाया है. बिहार की राजधानी पटना में अलका ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए अब उनके पास पहुंचेगी. इसके लिए महिला कांग्रेस एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है. जिसका नाम रखा गया है 'महिला की बात कांग्रेस के साथ'. कांग्रेस इस अभियान के तहत बिहार की मौजूदा सरकार पर निशाना साधेगी, जिसके तहत महिलाओं के लिए जो योजनाएं बन रही हैं उस पर कथित तौर पर अपराध और भ्रष्टाचार के हावी होने को उजागर किया जाएगा. महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी दो दिवसीय महिला शिविर की भी शुक्रवार से शुरुआत की है. इस शिविर में महिलाओं के लिए नई घोषणाएं नहीं बल्कि न्याय पथ तैयार किया जा रहा है.

इसके बाद 20 अप्रैल से महिला की बात कांग्रेस के साथ अभियान की शुरुआत होगी जो 31 में तक चलेगी. महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि "हमारी पार्टी की महिला कार्यकर्ता सिर्फ शहर स्तर पर नहीं बल्कि गांव और ब्लॉक स्तर पर भी महिलाओं के साथ बैठक करेंगी. कार्यक्रम के तहत हमारी पार्टी की कोशिश होगी कि हम आधी आबादी से ज्यादा से ज्यादा मिल सकें और उनकी समस्याओं पर चर्चा करें. इन महिलाओं में मुख्य रूप से सभी जीविका दीदी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी की महिलाएं समेत तमाम महिलाओं के साथ कांग्रेस बात करेगी. 
डबल इंजन हुआ फेल!
विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता महिलाओं के साथ बैठक करते हुए उन्हें इस बात से अवगत कराएंगी कि डबल इंजन की सरकार ने राज्य की महिलाओं को ठगा है. उनके लिए कोई भी ठोस कदम या योजनाएं राज्य या केंद्र सरकार द्वारा नहीं चलाई गई हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी महिलाओं के साथ मजबूती से खड़ी है. और चुनाव के बाद भी महिलाओं के न्याय लिए कांग्रेस पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी. 

बताते चलें कि बिहार में आगामी चुनाव के लिए सत्तारूढ़ NDA से लेकर विपक्ष की इंडिया गठबंधन में शामिल दल अपनी अपनी रणनीति के साथ चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. इसके अलावा बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है. हाल ही में इंडिया गठबंधन की पहली औपचारिक बैठक में चुनाव के लिए कोऑर्डिनेशन कमिटी का ऐलान किया गया जिसकी कमान बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के हाथों में सौंपी गई है.

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