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'तुरंत वापस आओ...', भारत क्या आया Apple, तिलमिला गया चीन, अब कर रहा है ‘टैलेंट ब्लॉक’ की गंदी हरकत, अपने इंजीनियर्स को दी चेतावनी!

तुरंत वापस आओ! Apple के भारत आते ही बौखलाया ड्रैगन, iPhone का उत्पादन रोकने के लिए खेलने लगा गंदे खेल, अपने इंजीनियर्स को रोकने के लिए कर रहा गंदी हरकत, दे रहा धमकी...पूरी स्टोरी.

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दुनिया के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग देश, चीन से टेक जायंट्स, मल्टीनेशनल कंपनियों का पलायन जारी है. कोरोना कॉल में पैदा हुई स्पलाई चेन समस्या की वजह से तमाम देशों को चीनी निर्भरता के खतरों के बारे में पता चला. हालांकि इन परेशानियों का हल भारत और ईस्ट एशिया के कई देश बनकर उभरे. बीजिंग में चीप लेबर के अलावा आने वाली चुनौतियों ने एप्पल जैसी कंपनियों को वहां से अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शिफ्ट होने पर मजबूर होना पड़ा. इसी से ड्रैगन तिलमिला गया है और वह हर संभव कोशिश कर रहा है कि कैसे नई दिल्ली की तरक्की और विकास में अवरोध पैदा किया जाए. इसके लिए वो नीच हरकत करने पर उतारू हो गया है. जब वह कंपनियों को नहीं रोक पा रहा है तो दबाव डालकर अपने कुशल इंजीनियर्स और प्रोफेश्नल्स को चीन से बाहर तक नहीं जाने दे रहा है.

भारत से वापस गए 300 से अधिक चीनी इंजीनियर
इसी बीच ऐप्पल के सबसे बड़े iPhone निर्माता फॉक्सकॉन ने भारत में अपने उत्पादन केंद्रों से 300 से अधिक चीनी इंजीनियरों और टेक्निकल स्पेश्लिस्ट्स को वापस बुला लिया है, जिससे iPhone 17 के निर्माण की तैयारी के दौरान कंपनी को गंभीर ऑपरेशनल और कामकाज की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

भारत से अपने इंजीनियर्स को बुला रहा चीन!
चीनी इंजीनियर्स का मॉस पलायन दो महीने पहले शुरू हुआ. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार फॉक्सकॉन के दक्षिण भारत स्थित संयंत्रों में अब केवल ताइवानी सपोर्ट स्टाफ ही बचे हैं. यह घटनाक्रम उस वक्त हो रहा है जब एप्पल भारत में अपनी कंपनी के विस्तार को गति देने की कोशिश कर रहा है और फॉक्सकॉन एक नया iPhone असेंबली संयंत्र बना रहा है. हालांकि रिपोर्ट की मानें तो बड़े पैमाने पर हो रहे चीनी प्रोफेशनल्स के पलायन से उत्पाद की गुणवत्ता पर तो इसका सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन iPhone की उत्पादन प्रक्रिया निश्चित रूप से प्रभावित हो सकती है, खासकर उस समय जब नेक्स्ट जेनरेशन के iPhone के निर्माण की तैयारी चल रही है.

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भारत पर छुप कर वार कर रहा चीन
iPhone की असेंबली भारत में लगने से चीन बिल्कुल खुश नहीं दिखाई दे रहा है. वो इसे रोकने के लिए हर हथकंडे अपना रहा है. बीजिंग ने ब्रेन ड्रेन, ट्रेन्ड टैलेंट और अपने स्किल्ड टेक्निशियन के भारत और ईस्ट एशिया में पलायन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कुशल श्रमिकों की आपूर्ति पर दबाव डालना शुरू कर दिया है.

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लेबर, स्किल्ड इंजीनियर और टेक्नोलॉजिकल प्रोडक्ट्स भी रोक रहा चीन.
ब्लूमबर्ग न्यूज़ के अनुसार, यह एक सोची समझी और संगठित प्रयास है ताकि अमेरिकी-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच चीनी कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमताएं किसी दूसरे या प्रतिस्पर्धी देशों (जैसे कि भारत, वियतनाम और अमेरिका) में स्थानांतरित न कर सकें. इस रणनीति के तहत केवल लेबर, ह्यूमेन रिसोर्स ही नहीं, बल्कि उन विशेष उपकरणों और टेक्निकल इन्फॉरमेंशन को भी शामिल किया गया है जो हाई लेवल टेक्नोलॉजी वाले प्रोडक्ट्स के उत्पादन के लिए आवश्यक हैं. दूसरी ओर, भारत और वियतनाम जैसे देश वैश्विक तकनीकी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए आक्रामक रणनीतियां अपना रहे हैं, जिससे वे चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकें. चीन की इसी कोशिश को देखकर कहा जा सकता है कि भारत, वियतनाम, अमेरिका और अन्य देश जो औद्योगिक उत्पादन के हब के तौर पर उभर रहे हैं उसकी यही वजह है.

iPhone के उत्पादन का पांचवा हिस्सा भारत में.
ऐप्पल के सीईओ टिम कुक ने चीनी (चीन में मौजूद iPhone असेंबली फैसिलिटी) कर्मचारियों की विशेषज्ञता को कई बार जरूरी और बताया है और उनके कौशल को प्रोडक्ट की गुणवत्ता के लिए आवश्यक माना है, न कि सिर्फ लागत कम करने के लिए. भारत वर्तमान में वैश्विक iPhone उत्पादन का एक-पांचवां हिस्सा करता है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि चार साल पहले ही यहां बड़े पैमाने पर असेंबली शुरू हुई थी. ऐप्पल ने 2026 के अंत तक अमेरिका में बिकने वाले अधिकांश iPhones का निर्माण भारत में करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तकनीकी विशेषज्ञता की कमी के चलते इस समय सीमा में देरी हो सकती है.

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क्या अमेरिका में बढ़ जाएगी iPhone की असेंबली.
यह घटनाक्रम उन जटिल चुनौतियों को उजागर करता है जिनका सामना बहुराष्ट्रीय कंपनियों को करना पड़ता है, जब वे जियोपॉलिटिकल प्रतिद्वंद्विता के बीच अपने आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ाना, विभिन्न देशों में करना चाहती हैं. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ऐप्पल की विदेशी निर्माण योजनाओं की आलोचना की है और अमेरिका में iPhone निर्माण को बढ़ावा देने की मांग की है, हालांकि अमेरिका में लेबर कॉस्ट को देखते हुए यह व्यावसायिक रूप से कठिन है. वहीं, भले ही हाल में कुछ कूटनीतिक प्रयास हुए हों लेकिन चीन और भारत के बीच राजनीतिक रिश्ते भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं.

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