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ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को 'सच से सामना' कराने वालीं कर्नल सोफिया को मिला बड़ा सम्मान, Republic Day पर सरकार का ऐलान

Republic Day 2026 Gallantry Award: नपी-तुली भाषा, सटीक संचार शैली और प्रोफेशनलिज्म...ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिसने बताया था Indian Army और पाक फौज में मूल अंतर, जिसने दो टूक और जोरदार तरीके से पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब किया था.

Col. Sofia Qureshi (File Photo)
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भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर कृतज्ञ राष्ट्र अपने जांबाज सैनिकों की वीरता, योगदान और देशप्रेम को सलाम कर रहा है. इसी क्रम में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की सेवा में उत्कृष्ट, साहसिक और अनुकरणीय योगदान के लिए वीरता पुरस्कारों की घोषणा की है, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की सुरक्षा में अतुलनीय योगदान और अद्भुत रण-रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को भी सम्मानित किया जा रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को सच का सामना कराने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को बड़ा सम्मान मिलने जा रहा है, जिसका ऐलान सरकार ने रिपब्लिक डे की पूर्व संध्या पर किया. अपनी नपी-तुली भाषा, सटीक संचार शैली और उच्च स्तर के प्रोफेशनलिज्म के साथ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस अधिकारी ने भारतीय सेना और पाकिस्तानी फौज के बीच मूल अंतर को दुनिया के सामने स्पष्ट किया और दो टूक व जोरदार तरीके से पाकिस्तान के झूठ और प्रोपेगेंडा को बेनकाब किया, वह थीं कर्नल सोफिया कुरैशी. 

कर्नल सोफिया को बड़ा सम्मान

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इसी दौरान सरकार और सेना ने देश की बहादुर बेटी कर्नल सोफिया कुरैशी को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी ने अदम्य साहस, तथ्यपरक प्रस्तुति, हाजिरजवाबी और वाकपटुता का ऐसा परिचय दिया कि पाकिस्तान के झूठ और दुष्प्रचार की धज्जियां उड़ गईं और पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर गया. इस ऑपरेशन के दौरान वह देश और भारतीय सेना का सशक्त चेहरा बनकर सामने आईं और अब इसी योगदान के लिए इस गणतंत्र दिवस पर उन्हें विशेष सम्मान दिया जा रहा है. 

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कर्नल सोफिया को मिलेगा ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM)

जानकारी के अनुसार, 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) प्रदान करने की घोषणा की गई है, जो उन्हें उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए दिया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को तथ्यात्मक और प्रभावी तरीके से बेनकाब किया था. 

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक को किया था बेनकाब

उन्होंने न केवल सेना के ऑपरेशनल विवरणों को स्पष्टता के साथ दुनिया के सामने रखा बल्कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. उनकी सटीक, टू-द-प्वाइंट, फैक्ट-बेस्ड संवाद शैली, नपी-तुली भाषा और गंभीर व्यक्तित्व ने विश्व स्तर पर भारत और उसके सशस्त्र बलों की साख को और मजबूत किया तथा यह स्पष्ट किया कि भारतीय सेना और पाकिस्तानी फौज के बीच वास्तविक अंतर क्या है. 

301 सैन्य अलंकरणों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी

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इसके साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सशस्त्र बलों और बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड के कुल 98 कर्मियों को ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ देने की स्वीकृति दी है, जिनमें पांच सम्मान मरणोपरांत प्रदान किए गए हैं. इन 98 सम्मानों में भारतीय सेना के 81 कर्मी, भारतीय नौसेना के 15 कर्मी और बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड के दो कर्मी शामिल हैं, जिन दोनों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है. गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के लिए कर्नल अमित कुमार यादव और कर्नल विनय कुमार पांडेय को भी सम्मानित किया गया है, जबकि राष्ट्रपति ने इसके अतिरिक्त कुल 301 सैन्य अलंकरणों को भी मंजूरी दी है. 

किस कैटेगरी के कितने मेडल? 

इन 301 सैन्य अलंकरणों में 30 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 56 अति विशिष्ट सेवा मेडल, 9 युद्ध सेवा मेडल, 2 बार टू सेना मेडल, 43 सेना मेडल, 8 नौसेना मेडल, 14 वायु सेना मेडल और 135 विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं. भारतीय सेना के जवानों को विभिन्न अभियानों और विशेष कार्यों में अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए सम्मानित किया गया है. 

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अन्य ऑपरेश में शामिल जांबाजों को भी सम्मान

मरणोपरांत सम्मान पाने वाले वीरों में हवलदार याकूब मसीह, नायक नवीन पौडेल, अग्निवीर अजीत सिंह राजपूत, बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड के सीपी स्किल्ड गणेश सिंह और सीपी मेट ढुन्ना टुडू शामिल हैं. ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ प्राप्त करने वाले सेना कर्मियों में ऑपरेशन सिंदूर, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफाजत, ऑपरेशन ऑर्किड, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन राइनो, रेस्क्यू ऑपरेशन, ऑपरेशन कैजुअल्टी एवैकुएशन, ऑपरेशन सॉफेन और विभिन्न अन्य अभियानों से जुड़े कर्मी शामिल हैं. 

किन्हें दिया जाता है ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’?

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इन अभियानों में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, सीमावर्ती सुरक्षा संचालन, उच्च ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती, विशेष बलों के ऑपरेशन, आपदा राहत, चिकित्सा और हवाई निकासी जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य शामिल रहे हैं. भारतीय नौसेना के 15 अधिकारियों और नाविकों को समुद्री सुरक्षा, परिचालन तत्परता, तकनीकी दक्षता और राष्ट्रहित में किए गए विशिष्ट योगदान के लिए ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ से सम्मानित किया गया है, जबकि बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड के दो कर्मियों को दुर्गम और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में राष्ट्र के सामरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और रखरखाव में सर्वोच्च बलिदान के लिए यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है. 

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‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ उन कर्मियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान असाधारण साहस, निष्ठा और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया हो, और यह सम्मान देश की सुरक्षा, अखंडता और नागरिकों की रक्षा में सशस्त्र बलों के निरंतर समर्पण का प्रतीक है.

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