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PM के संसदीय क्षेत्र के लिए CM योगी का मेगा प्लान... ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर बनेगा ‘ग्रेटर वाराणसी’, निवेशकों की लगेगी लॉटरी
योगी सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत ग्रेटर वाराणसी के लिए मास्टर प्लान 2031 तैयार किया है. रिंग रोड के आसपास 1200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में छह नई टाउनशिप बसाने की योजना है.
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वह शहर, जिसे दुनिया मोक्ष, मंत्र और गंगा की लहरों से पहचानती है, अब विकास और आधुनिकता की नई पहचान गढ़ रहा है. सदियों से अपनी आध्यात्मिक विरासत को संजोए रखने वाली काशी आज बदलते वक्त के साथ खुद को नए रूप में ढाल रही है. पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर बदला है, उसने वाराणसी को केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि उभरते महानगर की कतार में खड़ा कर दिया है. चौड़ी सड़कें, भव्य कॉरिडोर, आधुनिक ट्रांसपोर्ट और अब ग्रेटर वाराणसी (Greater Banaras) की परिकल्पना इस बदलाव की साफ तस्वीर पेश करती है.
वाराणसी के लिए मास्टर प्लान तैयार
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत 'ग्रेटर नोएडा' की तर्ज पर 'ग्रेटर वाराणसी' को विकसित करने का मास्टर प्लान 2031 तैयार किया है. वाराणसी विकास प्राधिकरण रिंग रोड के आसपास 1200 एकड़ से अधिक भूमि पर छह नई टाउनशिप बसाने की तैयारी में है. इसका मकसद बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव और आवासीय जरूरतों को संतुलित करते हुए शहर को भविष्य के लिए तैयार करना है.
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शुरुआती चरण के लिए फंड आवंटित
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सरकार द्वारा तैयार किया गया न्यू टाउनशिप मॉडल इस योजना की रीढ़ माना जा रहा है. मास्टर प्लान 2031 के अनुसार हरहुआ से राजातालाब के बीच चार से छह हाईटेक टाउनशिप विकसित की जाएंगी. इन टाउनशिप में आधुनिक आवास, चौड़ी सड़कों का जाल, सीवरेज, ड्रेनेज, ग्रीन जोन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. योजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने शुरुआती चरण के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये का फंड आवंटित कर दिया है, जबकि भूमि अधिग्रहण की कुल लागत 6000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. यहां मॉल, फाइव स्टार होटल, आईटी पार्क और वर्ल्ड क्लास अस्पताल बनाने की भी तैयारी है, जिससे ग्रेटर वाराणसी का स्वरूप नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसा नजर आएगा.
कई क्षेत्र बने निवेश के नए हॉटस्पॉट
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इस विकास का सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखाई दे रहा है. वाराणसी के कई इलाके निवेश के नए हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं. रिंग रोड फेज-1 और फेज-2 के किनारे जमीन की कीमतों में पिछले दो वर्षों में तेज उछाल आया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में यहां बड़े कमर्शियल हब विकसित होंगे. वहीं बाबतपुर एयरपोर्ट रोड होटल, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है. गंगा के दूसरी ओर रामनगर और पड़ाव क्षेत्र बेहतर कनेक्टिविटी के कारण नए आवासीय प्रोजेक्ट्स का केंद्र बन रहे हैं. मध्यम आय वर्ग के लिए शिवपुर और सारनाथ विस्तार सबसे भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरे हैं.
निवेश के लिए बेहतर मौका लेकिन सतर्कता जरूरी
आंकड़े बताते हैं कि वाराणसी का प्रॉपर्टी बाजार इस समय अपने सबसे अहम मोड़, यानी इन्फ्लेक्शन पॉइंट पर है. यहां निवेश पर औसतन 15 से 20 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिल रहा है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद हर साल 10 करोड़ से अधिक पर्यटकों के आगमन से रेंटल प्रॉपर्टी और होमस्टे कारोबार को जबरदस्त बढ़ावा मिला है. इसके साथ ही देश का पहला शहरी रोपवे सिस्टम, गंगा पर नए पुल और मल्टी मोडल टर्मिनल जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स वाराणसी को आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब में बदल रहे हैं. हालांकि, तेजी से उभरते इस बाजार में निवेश करते समय सावधानी भी उतनी ही जरूरी है. निवेश से पहले UP RERA की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर जांचें. रिंग रोड के आसपास जमीन खरीदते समय अधिग्रहण से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज न करें. यह सुनिश्चित करें कि चुनी गई भूमि किसी सरकारी परियोजना के दायरे में न आती हो. स्थानीय स्तर पर विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों से दूरी बनाए रखें और केवल वाराणसी विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नक्शों वाली संपत्तियों में ही निवेश करें.
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बहरहाल, ग्रेटर वाराणसी की योजना काशी को उसके गौरवशाली अतीत के साथ एक आधुनिक भविष्य से जोड़ने की कोशिश है. यह बदलाव न सिर्फ शहर की तस्वीर बदलेगा, बल्कि रोजगार, निवेश और जीवन स्तर को भी नई ऊंचाई देगा. काशी अब केवल आस्था की नहीं, बल्कि अवसरों की नगरी बनने की ओर बढ़ रही है.