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CM रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान, बिल्डिंग बनाने के लिए अब नहीं लेनी होगी पुलिस परमिशन

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए भवन निर्माण के लिए पुलिस अनुमति की बाध्यता को समाप्त कर दिया है। पहले, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पुलिस से मंजूरी लेना आवश्यक था, जिससे भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी होती थी। अब, नई व्यवस्था के तहत, केवल दिल्ली नगर निगम (MCD) और अन्य स्थानीय निकायों से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि अब राजधानी में भवन निर्माण के लिए पुलिस से अनुमति लेना आवश्यक नहीं होगा। यह कदम निर्माण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

अब तक, दिल्ली में भवन निर्माण के लिए पुलिस से अनुमति लेना एक मानक प्रक्रिया थी। हालांकि, यह प्रक्रिया जटिल और समय-साध्य थी, जिससे निर्माणकर्ताओं को अनावश्यक देरी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की संभावनाएँ भी बढ़ गई थीं, जिससे आम जनता को असुविधा होती थी।

नया निर्णय, प्रक्रिया में सरलता

शहरी विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली नगर निगम (MCD) और अन्य स्थानीय निकायों के पास अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में निर्माण कार्यों को नियंत्रित करने का अधिकार है। दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 (DMC Act, 1957) की धारा 312, 313, 336 और 346 में लेआउट प्लान को अंतिम रूप देने, भवन योजना की मंजूरी देने और अधिभोग या पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान है। इन धाराओं में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि भवन निर्माण के लिए पुलिस की अनुमति आवश्यक है। 

गलतफहमियों का निराकरण

शहरी विकास मंत्रालय ने यह भी बताया कि भवन निर्माण के लिए पुलिस से अनुमति लेने की आवश्यकता के बारे में एक गलत धारणा प्रचलित थी। कई बार इसका दुरुपयोग किया गया, जिससे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की घटनाएँ सामने आईं। इस संदर्भ में, दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे अपने फील्ड अधिकारियों को जागरूक करें ताकि इस कानून का दुरुपयोग न हो और जनता को सही जानकारी मिल सके। 

पुलिस और नगर निगम के बीच सहयोग

हालांकि, पुलिस की अनुमति अब आवश्यक नहीं है, लेकिन पुलिस विभाग नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों को उनके वैधानिक कार्यों में पूरा सहयोग प्रदान करेगा। DMC अधिनियम की धारा 475 के तहत, पुलिस को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे नगर निगम के अधिकारियों को गैरकानूनी निर्माण के मामलों में सहायता प्रदान करें। 

शहरी विकास मंत्रालय ने आम जनता से अपील की है कि भवन निर्माण से पहले MCD या अन्य संबंधित निकायों से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करें और किसी भी गलत सूचना से बचें। यदि कोई व्यक्ति पुलिस की अनुमति लेने के लिए बाध्य करता है या अवैध रूप से पैसे मांगता है, तो तुरंत इसकी शिकायत करें। इस कदम से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार का यह निर्णय दिल्ली में भवन निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाने और भ्रष्टाचार को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल निर्माणकर्ताओं को लाभ होगा, बल्कि आम जनता का विश्वास भी प्रशासन में बढ़ेगा। आशा है कि इस पहल से दिल्ली में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और राजधानी का विकास और अधिक सुगम होगा।
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