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सीएम उमर अब्दुल्ला ने खीर भवानी मंदिर में की पूजा-अर्चना, कश्मीरी पंडितों के लिए खास है ये धार्मिक स्थल

सीएम उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल जिले में तुलमुला गांव में स्थित खीर भवानी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद पांडच में एक वृद्धाश्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने इसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान और देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम बताया.

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंगलवार को गांदरबल जिले में स्थित खीर भवानी मंदिर पहुंचे. जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और माता राग्न्या देवी को जल चढ़ाया, फूल अर्पित किए और आरती की थाली लेकर मंत्रोच्चार भी सुने. उसके बाद उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए कई परियोजनाओं की सौगात दी. इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया X के जरिए साझा की है. 

सीएम उमर अब्दुल्ला ने कई परियोजनाओं की दी सौगात

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए जम्मू- कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने लिखा कि 
'गांदरबल के बाकुरा में जलापूर्ति योजना का उद्घाटन करते हुए खुशी हो रही है. यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो 4,000 से अधिक लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करेगी. इस खास अवसर पर माननीय मंत्री सकीना इटू, जावेद अहमद राणा और सलाहकार नासिर सोगामी भी मौजूद थे. यह सभी के लिए बुनियादी सुविधाओं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.'

वृद्धाश्रम का भी किया उद्घाटन

सीएम उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल जिले में तुलमुला गांव में स्थित खीर भवानी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद पांडच में एक वृद्धाश्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने इसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान और देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम बताया. इसके अलावा सफापोरा में स्थित सरकारी इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज में साइंस सेक्शन की आधारशिला भी रखी. जिसको लेकर उन्होंने कहा कि 'यह प्रौद्योगिकी आधुनिक उद्यमिता की रीढ़ है. जो  हमारे युवाओं को भविष्य का नेतृत्व करने के लिए सक्षम होना जरूरी है.'

कश्मीरी पंडितों की आस्था का केंद्र है खीर भवानी मंदिर 

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित खीर भवानी मंदिर प्रसिद्द तीर्थ स्थलों में से एक है. यह मंदिर माता रागिन्या देवी को समर्पित है. इस मंदिर को खीर भवानी के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर पवित्र झरने के ऊपर बना हुआ है. इसके जल का रंग बदलता रहता है. यह किसी भी तरह की भविष्यवाणी का प्रतीक माना जाता है. यहां श्रद्धालु माता जी को भोग-प्रसाद में खीर चढ़ाते हैं. यह मंदिर शांत वातावरण के लिए भी जाना जाता है. यहां आने वाले सभी श्रद्धालुओं को प्राकृतिक सौंदर्य काफी आकर्षित करता है. हर साल 3 जून को लगने वाले मेले में हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं. यह कश्मीरी पंडितों के लिए विशेष महत्व रखता है.
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