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BMC चुनाव से पहले फ्रंटफुट पर सीएम फडणवीस, साथ आने पर मजबूर हुए ठाकरे बंधु, किया गठबंधन! अलग-थलग पड़ी कांग्रेस
BMC चुनाव को देखते हुए महाराष्ट्र में सियासी समीकरण बदल रहे हैं. नए गठबंधन आकार ले रहे हैं. एक ओर जहां महायुति एकजुट नजर आ रही है, वहीं कांग्रेस महाविकास अघाड़ी में अलग-थलग पड़ गई है. सीएम देवेंद्र फडणवीस की सक्रियता के कारण विपक्ष विशेषकर ठाकरे ब्रदर्स को हालात से समझौता करना पड़ा है. दोनों साथ आने पर मजबूर हो गए हैं.
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महाराष्ट्र में आगामी BMC चुनावों को लेकर महायुति सरकार एकजुट नजर आ रही है. पूरा गठबंधन विधानसभा चुनावों की तरह ही एक साथ चुनाव लड़ने को लेकर जबरदस्त जोश में है. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद फ्रंटफुट पर बैटिंग कर रहे हैं. उनकी घेराबंदी ऐसी है कि पूरा विपक्ष धराशायी नजर आ रहा है. महाविकास अघाड़ी गठबंधन को समझ नहीं आ रहा है कि वह चुनौती पेश करे तो करे कैसे. रही-सही कसर शरद पवार की बेटी और NCP शरदचंद्र पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने पूरी कर दी है. उन्होंने ऐसा बयान दिया है कि पूरा विपक्षी नैरेटिव ही ध्वस्त हो गया है.
सुप्रिया सुले ने दिया महा विकास अघाड़ी को दिया झटका!
जो विपक्ष अपनी राजनीति ही वोट चोरी, EVM और SIR के इर्द-गिर्द कर रहा था, उसके गुब्बारे में सुले ने पिन मार दी है. उन्होंने जो कहा है, उसकी उम्मीद कांग्रेस को कभी नहीं रही होगी. दरअसल, सुप्रिया सुले ने सोमवार को लोकसभा में बोलते हुए कहा कि “मैं चार बार इसी मशीन से चुनकर आई हूं, इसलिए ईवीएम या वीवीपैट पर सवाल नहीं उठाऊंगी.” हालांकि बीते सालों में कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब उन्हीं के नेताओं ने मतपत्रों के जरिए पुनर्मतदान कराने की जिद पकड़ी थी, तब उन्होंने चुप्पी साध ली थी.
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BMC चुनाव में अलग-थलग पड़ी कांग्रेस!
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आपको बता दें कि आगामी BMC चुनाव को लेकर सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. दरअसल, महाविकास अघाड़ी के दो महत्वपूर्ण घटक दल-शिवसेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट ने हाथ मिला लिया है, वहीं कांग्रेस को इस गठबंधन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. ऐसे में मुंबई नगर निगम के चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गए हैं. मालूम हो कि राज्य विधानसभा और उससे पहले लोकसभा चुनाव महाविकास अघाड़ी ने साथ मिलकर लड़े थे.
मुंबई नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस पार्टी अलग-थलग पड़ती दिख रही है. राज्य विधानसभा और उससे पहले लोकसभा चुनाव में जो महाविकास अघाड़ी बनी थी, वह अब दरकती दिख रही है. महाविकास अघाड़ी के दो दल-शिवसेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट-ने हाथ मिला लिया है. इन दोनों ने कांग्रेस को दरकिनार कर इस गठबंधन में मनसे को शामिल किया है. इससे BMC चुनाव और भी दिलचस्प होते जा रहे हैं.
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उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच भी होगा गठबंधन!
वहीं ऐसा लग रहा है कि दोनों भाई-उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे-दशकों बाद फिर से साथ आने वाले हैं. दोनों साथ में BMC का चुनाव लड़ सकते हैं. जहां मनसे अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है, वहीं उद्धव ठाकरे अपनी साख, पार्टी और BMC में प्रभुत्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में उद्धव के प्रदर्शन और लगातार सिमटते जनाधार ने उन्हें परेशान कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, BMC चुनाव की घोषणा के साथ ही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा शुरू हो चुकी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि ठाकरे ब्रदर्स और राष्ट्रवादी शरद पवार गुट मुंबई नगर निगम चुनाव में गठबंधन कर सकते हैं.
कौन-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा?
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BMC की 227 सीटों में से 120 से 125 वार्डों की सीटें उद्धव गुट के खाते में आएंगी, वहीं 75 से 80 वार्ड MNS को और 20 से 27 वार्ड एनसीपी शरद गुट को मिलेंगे. वहीं महाविकास अघाड़ी की सहयोगी कांग्रेस इस गठबंधन से अलग रहकर चुनाव लड़ेगी. मालूम हो कि फरवरी 2017 में हुए नगर निगम चुनावों में शिवसेना के 84 पार्षद चुने गए थे. ठाकरे समूह ने 36 से 40 नए वार्डों पर दावा किया है, जबकि मौजूदा वार्डों को बरकरार रखा है.
MNS को जो 75 से 80 वार्ड मिलने वाले हैं, उनमें 2017 में चुने गए सात पार्षदों के वार्ड भी शामिल हैं. इनमें माहिम, सेवरी, वर्ली, भांडुप और विक्रोली विधानसभा क्षेत्रों के वार्ड शामिल हैं. इसलिए इन स्थानों पर सीटों के आवंटन के दौरान तकरार की संभावना है. हालांकि, नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने का निर्णय लिया जा चुका है, इसलिए ठाकरे समूह को कुछ रियायतें देनी होंगी और कुछ वार्ड छोड़ने होंगे.
शरद पवार गुट का घटा कद!
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में आंतरिक टूट के कारण मुंबई में शरद पवार गुट का BMC में प्रभाव पहले के मुकाबले अब उतना नहीं रह गया है. कहा जा रहा है कि एनसीपी को 20 से 27 वार्ड दिए जा सकते हैं. 2017 के चुनावों में एनसीपी के नौ पार्षद चुने गए थे. इन वार्डों के अलावा एनसीपी शरद ने घाटकोपर, कुर्ला, चुनाभट्टी, मलाड, भांडुप, कंजूरमार्ग, अनुशक्ति नगर, बायकुला आदि क्षेत्रों में 10 से 15 अन्य वार्डों पर भी दावा किया है. यहां एनसीपी का काफी प्रभाव है. अब देखना होगा कि करीब 36 महीने की देरी से हो रहे BMC चुनाव में कौन बाजी मारता है.