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दिल्ली में बन रहे ‘धाम’ को लेकर CM Dhami का ऐलान, ‘दुनिया में कहीं दूसरा धाम हो ही नहीं सकता’

केदारनाथ ‘धाम’ पर बढ़े विवाद के बीच CM Dhami का रौद्र रूप, ले लिया बड़ा एक्शन ! जानिए क्या है ‘बाबा’ पर विवाद ?

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अगर मैं आपसे पूछूं कि बाबा केदार के दर्शन करने हैं तो कहां जाएं,निश्चित तौर पर आप कहेंगे केदारनाथ धाम और कहां ? यानि आप सीधे सीधे उत्तराखंड जाने की सलाह देंगे।वाजिब भी है लेकिन पलटकर अगर कोई ये सलाह दे कि दिल्ली चले जाइये उत्तराखंड जाने की जरुरत नहीं तो आप क्या कहेंगे ? अजीब सी बात है लेकिन आजकल तो यही चर्चा है। इसे लेकर दिल्ली से उत्तराखंड तक बवाल मचा हुआ है। इतना बवाल कि अब ख़ुद सीएम पुष्कर सिंह धामी को आगे आकर इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है ।दरअसल केदारनाथ के नाम से ही दिल्ली के बुराड़ी में एक मंदिर बन रहा है। अभी कुछ वक़्त पहले की ही तो बात है जब केदारनाथ मंदिर दिल्ली धाम के भूमि पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ख़ुद सीएम पुष्कर सिंह धामी ही पहुंचे थे। 

दिल्ली में केदारनाथ धाम और पूजन में सीएम धामी की उपस्थिति को देखकर उत्तराखंड की जनता भड़क गई। आप सोचिए उत्तराखंड में इस वक़्त कुछ लोग आंदोलन करने पर उतारू हो गए हैं। सड़कों पर हल्ला बोल कर रहे हैं। कह रहे हैं कि बाबा का धाम एक ही है दूसरा नहीं हो सकता। बढ़ता विवाद देख अब ख़ुद सीएम धामी ने इसमें हस्तक्षेप किया है और बड़ा बयान दिया है। सीएम धामी ने साफ़ कहा कि दुनिया में कहीं भी दूसरा केदारनाथ धाम हो ही नहीं सकता। इतना ही नहीं सीएम धामी ने बदरी-केदार मंदिर समिति अध्यक्ष को जरुरी दिशा निर्देश दिए हैं।

सीएम धामी ने इस विवाद पर कहा-  बाबा केदार सबकी आस्था के प्रतीक हैं। दुनिया में कहीं भी दूसरा केदारनाथ धाम नहीं हो सकता। बाबा केदार के किसी भी नाम से कोई भी मंदिर बन जाए, तो उससे धाम की महिमा पर कोई असर नहीं पड़ सकता। फिर भी चूंकि यह आस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए मैंने बीकेटीसी से संबंधित लोगों से वार्ता कर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। वहीं, बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि इस मामले में सीएम धामी के दिशा-निर्देश मिले हैं। कानूनी सलाह ली जा रही है। बदरी-केदारनाथ के नाम या फोटो का दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। 

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अब देखिए धामी के  बयान पर भी राजनीति कैसे गरमाई।कुछ लोगों ने सीएम को टार्गेट करते हुए कहा कि धामी को अगर धाम से इतनी आपत्ति है तो फिर वो इसके पूजन में क्यों गए थे ? बहरहाल उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की तुलना ना कभी हुई है ना हो पाएगी।लेकिन हां, अगर उसकी तर्ज़ पर कहीं कोई धाम बन रहा है तो उसमें आंदोलन करने वाली बात समझ से परे है ।

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