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24 घंटे में खाली करो यमन… सऊदी अरब की UAE को धमकी, आखिर एक दूसरे के जानी दुश्मन क्यों बने दो मुस्लिम देश?

Yaman Conflict: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही लंबे समय से एक दूसरे के सहयोगी रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में दोनों के बीच तनाव बढ़ा है. इस वक्त यमन को लेकर दोनों के बीच गंभीर तनाव की स्थिति बनी हुई है.

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दुनिया में अपना रसूख़ रखने वाले दो मुस्लिम देश इस वक्त एक दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं और एक दूसरे का ख़ून पीने को आतुर हैं. ये देश हैं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात. हालांकि दोनों के बीच लंबे समय से सहयोगी संबंध रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और तनाव बढ़ा है. वहीं, इस वक्त दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा और गंभीर विवाद यमन को लेकर चल रह है जो अब खुली टकराव की स्थिति में पहुँच गया है. 

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने किया था हमला

सऊदी अरब ने यूएई पर आरोप लगाया कि वह STC हथियार और दबाव देकर सऊदी समर्थित बलों पर हमले करवा रहा है, जो सऊदी की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. 30 दिसंबर 2025 को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमला किया, जहां यूएई से आई हथियारों की खेप STC के लिए थी.

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UAE ने वापिस बुलाई अपनी सेना

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दोनों देशों के टकराव के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि वह यमन से अपने बचे हुए सैनिकों को वापस बुला रहा है. हालांकि यह फैसला ऐसे समय में आया है. जब सऊदी अरब ने अमीराती बलों को 24 घंटे के भीतर यमन छोड़ने की माँग का समर्थन किया था. हालांकि, इसके कुछ घंटे पहले ही सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हवाई हमला किया था. सऊदी का दावा है कि यह हमला अमीरात से जुड़े हथियारों के खेप पर किया गया था. 

क्या है विवाद के मुख्य कारण?

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दरअसल, दोनों देश 2015 से यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थे. सऊदी अरब यमन की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) का समर्थन करता है, जबकि UAE दक्षिणी अलगावादी गुट सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) का समर्थन करता है, जो दक्षिणी यमन को स्वतंत्र राज्य बनाना चाहता है. दिसंबर 2025 में STC ने तेल सपंन्न हदरमौत और अल-महरा प्रांतो पर कब्जा कर लिया, जो सऊदी अरब की रेड लाइन को पार करने जैसा था क्योंकि ये क्षेत्र सऊदी सीमा से सटे हैं. कुल मिलाकर दोनों देश अभी भी कई मुद्दों पर एक दूसरे के सहयोगी लेकिन फ़िलहाल यमन का मुद्दा दोनों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है. हालांकि यमन से यूएई के बचे-खुचे सैनिकों की वापसी से फ़िलहाल तनाव बहुत हद तक कम हो सकता है. 

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