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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त में दिया स्पष्टीकरण, सिख गुरुओं के फैसले का पालन करेंगे

मुख्यमंत्री भगवत मान ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा था, "मैं एक सच्चे सिख के रूप में श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होऊंगा, और समय में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का कोई प्रश्न ही नहीं उठता."

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने सिख आचार संहिता और आपत्तिजनक वीडियो पर कथित टिप्पणियों के संबंध में अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि वह सिख धर्मगुरुओं द्वारा सुनाए गए फैसले का पालन करेंगे.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त में दिया स्पष्टीकरण

ज्ञानी गड़गज और तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार बाबा टेक सिंह धनाउला के साथ लगभग एक घंटे तक चली बैठक के बाद सीएम मान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुझे बताया गया कि वे स्पष्टीकरण का अध्ययन करेंगे और उसके अनुसार निर्णय लेंगे. मैं सिख धर्मगुरुओं द्वारा सुनाए गए फैसले का पालन करूंगा.

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बता दें कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नंगे पैर पहुंचे थे. वह बुलाए जाने पर अकाल तख्त सचिवालय में ज्ञानी गड़गज के समक्ष पेश हुए.

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“सिख गुरुओं के फैसले का पालन करूंगा”

वहीं, ज्ञानी गड़गज ने मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री मान ने बैठक में स्वीकार किया कि उन्हें सिखों के धार्मिक मामलों पर कुछ बातें नहीं कहनी चाहिए थीं और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह भविष्य में इस तरह के कोई भी बयान देने से परहेज करेंगे.

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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मान द्वारा धार्मिक दुराचार के आरोपों पर दी गई व्याख्या पर पांच सिख उच्च पुरोहितों की अगली बैठक में विचार किया जाएगा.

यह स्वीकार करते हुए कि धर्मत्यागी सिख को अकाल तख्त से सजा नहीं सुनाई जा सकती, ज्ञानी गड़गज ने कहा कि सजा सिख संगत को निर्देश के रूप में दी जा सकती है.

इससे पहले सोशल मीडिया पर वायरल आपत्तिजनक वीडियो का हवाला देते हुए ज्ञानी गड़गज ने दावा किया था कि सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के प्रति मान की हरकतें अपमानजनक थीं.उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के सिख विरोधी बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं.

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अकाल तख्त द्वारा तलब किए जाने वाले तीसरे मुख्यमंत्री है मान

प्रकाश सिंह बादल और सुरजीत सिंह बरनाला के बाद मुख्यमंत्री मान अकाल तख्त द्वारा तलब किए जाने वाले तीसरे मुख्यमंत्री थे.

अमृतसर में सिख-निरंकारी संघर्ष में 13 लोगों की जान जाने के मामले में बादल को 1979 में तत्कालीन जत्थेदार साधु सिंह भौरा ने तलब किया था. 1986 में स्वर्ण मंदिर के अंदर पुलिस कार्रवाई का आदेश देने के लिए बरनाला को तनखैया (धार्मिक दुराचार का दोषी) घोषित कर बहिष्कृत कर दिया गया था. बाद में, उन्होंने 1988 में प्रायश्चित किया.

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 मुख्यमंत्री भगवत मान ने मीडिया से की बात

एक दिन पहले, मुख्यमंत्री भगवत मान ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा था, "मैं एक सच्चे सिख के रूप में श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष उपस्थित होऊंगा, और समय में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का कोई प्रश्न ही नहीं उठता."

उन्होंने कहा कि जत्थेदार के आदेशों के अनुसार 15 जनवरी का पूरा दिन अकाल तख्त साहिब को समर्पित है और उस दिन उनका कोई अन्य कार्यक्रम निर्धारित नहीं है.

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संस्था की पवित्रता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा था, "श्री अकाल तख्त साहिब प्रत्येक सिख के लिए पवित्र हैं और हमारे समुदाय का सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र माने जाते हैं."

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