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महाराष्ट्र की नई सरकार में मंत्री न बनने पर छगन भुजबल का छलका दर्द, कहा-अभी छगन भुजबल ख़त्म....

महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट का विस्तार हुआ है। जिसमें एनसीपी अजीत पवार को पार्टी के कोटे से 9 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। इस बीच महाराष्ट्र कैबिनेट में जगह न मिलने से पार्टी के नेता छगन भुजबल का दर्द छलका है।

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और सरकार का गठन भले ही हो गया हो लेकिन सूबे में सियासी हवा फ़िलहाल ठंडी पड़ती नहीं दिखाई दे रही है। रविवार को महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट का विस्तार हुआ है। जिसमें एनसीपी अजीत पवार को पार्टी के कोटे से 9 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। इस बीच महाराष्ट्र कैबिनेट में जगह न मिलने से पार्टी के नेता छगन भुजबल का दर्द छलका है। उन्होंने कहा है कि "मुझे मंत्री पद मिले या न मिले,इससे छगन भुजबल ख़त्म नहीं हुआ है।" वही उनके समर्थकों ने भी महाराष्ट्र सरकार की नई कैबिनेट में अपने नेता का नाम न शामिल होने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 


दरअसल, रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर में फडनवीस सरकार के कैबिनेट का विस्तार हुआ। जिसमें महायुति के कुल 39 विधायकों ने मंत्री के रूप में शपथ ली। समारोह के बाद गठबंधन में शामिल बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना के कई नेताओं की मंत्रिमंडल में ख़ुद का नाम न शामिल होने पर नाराज़गी ज़ाहिर की है। जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है उनमें वरिष्ठ नेता छगन भुबल का नाम भी शामिल है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मीडिया से बात करते हुए छगन भुजबल ने कहा  "कैबिनेट में किसे शामिल करना है यह पार्टी नेताओं का फैसला है। उन्होंने (पार्टी नेताओं ने) हमें बताया कि वरिष्ठ नेताओं को शामिल नहीं किया गया है।" नए लोगों को मौका दीजिए। मैं एक साधारण कार्यकर्ता हूं, मुझे नजरअंदाज कर दिया जाए या बाहर कर दिया जाए, इससे क्या फर्क पड़ता है? मुझे मंत्री पद दिया जाए या न दिया जाए, लेकिन छगन भुजबल खत्म नहीं हुए हैं। मुझे लगता है कि मुझे मनोज जरांगे पाटील को चुनौती देने का रिवार्ड मिला है।''बताते चले कि विधानसभा चुनाव के पूर्व से ही जब रजय में मराठा आरक्षण और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गर्म थे तब छगन भुजबल खुलकर सामने आए थे और उन्होंने कहा था राज्य में मराठा आरक्षण देना संभव नहीं है।उन्हें ओबीसी से कोई आरक्षण नहीं दिया जाएगा।


वही छगन भुजबल ने मंत्रिमंडल में शामिल न होने की ख़बर पर उनके समर्थकों द्वारा किए गये प्रदर्शन पर कहा कि ''अगर मेरे समर्थक नासिक में जुटे हैं, तो मैं इसमें क्या कर सकता हूं. मैं एक सामान्य कार्यकर्ता हूं।इससे क्या फर्क पड़ता है कि मेरी दरकिनार किया गया या मुझे बाहर कर दिया गया। मुझे मंत्री पद मिले न मिले, छगन भुजबल खत्म नहीं हुआ है.'' बताते चले की अजीत पवार अब शरद पवार से अलग हुए थे तो छगन भुजबल भी उनके साथ आए थे और उन्हें महायुति की सरकार में इसका ईनाम देते हुए मंत्री बनाया गया था। 


ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट विस्तार में महायुति में शामिल तीनों दलों के नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है। जिसमें बीजेपी के 19, शिवसेना से 11 और अजीत पवार की एनसीपी से 9 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है। 
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