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CCPA ने उठाया कड़ा कदम, अब कोचिंग सेंटर नहीं कर पाएंगे छात्रों को गुमराह
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कोचिंग सेंटरों के भ्रामक और गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को छात्रों को झूठे दावे करके लुभाने से रोकने के लिए पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।
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आजकल शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते प्रतियोगिता के माहौल ने कोचिंग संस्थानों के महत्व को बढ़ा दिया है। हर छात्र एक उज्ज्वल भविष्य की तलाश में अपने लिए सही कोचिंग सेंटर चुनना चाहता है। लेकिन, इस प्रतिस्पर्धा में कई कोचिंग सेंटर भ्रामक और गलत जानकारी वाले विज्ञापन देकर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे में, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने छात्रों को इस छलावे से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सीसीपीए ने हाल ही में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो कोचिंग सेंटरों के भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने में मदद करेंगे।
सीसीपीए के इन नए दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को किसी भी प्रकार के झूठे वादों से गुमराह न किया जाए। इस पहल के तहत सीसीपीए ने छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए कोचिंग संस्थानों पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, ताकि वे विज्ञापनों में बिना सत्यता के कोई दावा न कर सकें। सीसीपीए के अनुसार, विज्ञापनों में कोचिंग सेंटर अपनी विशेषताओं को वास्तविकता के आधार पर ही प्रस्तुत करें। अगर कोई कोचिंग संस्थान इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो सीसीपीए के पास उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अधिकार है।
किन विज्ञापनों पर रहेगी रोक?
कोचिंग सेंटरों द्वारा अपने पाठ्यक्रम की अवधि, फीस संरचना, और संकाय के अनुभव का अतिशयोक्ति भरा विवरण देना अब प्रतिबंधित है।
कोचिंग सेंटर अक्सर छात्रों को आकर्षित करने के लिए अपनी सफलता दर और नौकरी की गारंटी का दावा करते हैं। लेकिन, अब बिना प्रमाण के इस तरह के दावों को विज्ञापन में दिखाना पूरी तरह से अवैध होगा।
कोचिंग सेंटर अब छात्रों की व्यक्तिगत सफलता की कहानियाँ उनके सहमति पत्र के बिना अपने विज्ञापन में उपयोग नहीं कर सकते। यह नियम छात्रों को मानसिक दबाव और अप्रत्यक्ष प्रचार से बचाने के लिए बनाया गया है।
कई बार कोचिंग सेंटर छात्रों पर दबाव डालने के लिए "सीट्स लिमिटेड" या "आज ही आवेदन करें" जैसे विज्ञापन चलाते हैं। सीसीपीए ने इसे अनुचित व्यापार की श्रेणी में रखा है, और अब इस प्रकार के विज्ञापन पर भी नियंत्रण होगा।
सीसीपीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब कोचिंग सेंटरों को अपने विज्ञापनों में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी होगी। सफल छात्रों की तस्वीर के साथ-साथ उनके नाम, रैंक, कोर्स का नाम और फीस का भी जिक्र करना अनिवार्य होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कोचिंग सेंटर छात्रों को बारीक अक्षरों में गलत जानकारी देकर धोखा न दे सके। सीसीपीए ने सभी कोचिंग सेंटरों के लिए यह अनिवार्य किया है कि वे राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से जुड़ें। इससे छात्र किसी भी प्रकार की शिकायत या अनुचित व्यापार के मामलों को सीधे दर्ज करा सकेंगे। इस पहल का मकसद छात्रों को गुमराह करने वाले कोचिंग सेंटरों पर नजर रखना और उन्हें समय पर सही न्याय दिलाना है।
उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई
अगर कोई भी कोचिंग सेंटर इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत सीसीपीए के पास इस तरह के उल्लंघनों पर रोक लगाने का पूरा अधिकार है। सीसीपीए के पास दंड लगाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने, और भ्रामक विज्ञापनों से छात्रों को गुमराह करने वाले संस्थानों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का भी प्रावधान है। सीसीपीए ने हाल के कुछ वर्षों में कोचिंग सेंटरों के भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कदम उठाते हुए स्व-संज्ञान लेते हुए कई संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, सीसीपीए ने अब तक 45 कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापन बंद करने के लिए चेतावनी दी है। इसके साथ ही 18 कोचिंग संस्थानों पर 54 लाख 60 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
सीसीपीए द्वारा उठाए गए इस कदम से छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच निश्चित रूप से एक सकारात्मक संदेश गया है। एक लंबे समय से कोचिंग सेंटरों के गुमराह करने वाले विज्ञापनों से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा था। अब सीसीपीए के इस निर्णय से छात्रों को केवल वही संस्थान चुनने में मदद मिलेगी जो पारदर्शी हों और जो झूठे वादे न करें।
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