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कोलकाता रेप-हत्या कांड मामले पर CBI का बड़ा खुलासा, कहा- बंगाल पुलिस ने थाने के बदले रिकॉर्ड

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर से हुई रेप-हत्या मामले में एक नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा सीबीआई ने कोर्ट में हुआ है। जिसमें सीबीआई ने बताया कि ताला पुलिस थाने में रिकॉर्ड्स के साथ न केवल छेड़छाड़ हुई थी बल्कि कुछ झूठे रिकॉड भी तैयार किए गए थे। पूरी खबर देखिए इस खास रिपोर्ट में ।

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कोलकाता के R.G. Kar Medical College and Hospital में हुए रेप कांड में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इन खुलासों ने बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की कुर्सी को हिलाकर रख दिया है। जब से पूरा मामला CBI के पास पहुंचा है, तब से ममता की पुलिस, ममता का प्रशासन, यहां तक कि खुद ममता बनर्जी सवालों के घेरे में आ गए हैं। अब CBI ने एक और बड़ा खुलासा किया है, जिसे जानकर ममता के पैरों तले जमीन जरूर खिसक जाएगी।दरअसल, CBI कोर्ट में ट्रेनी डॉक्टर से हुई रेप-हत्या मामले में एक चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। CBI ने सच पर से पर्दा हटाते हुए बताया है कि ताला पुलिस थाने में रिकॉर्ड्स के साथ न केवल छेड़छाड़ हुई थी, बल्कि कुछ झूठे रिकॉर्ड भी तैयार किए गए थे। इसे लेकर CBI ने कोलकाता की स्पेशल कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान थाने के सीसीटीवी फुटेज मिले थे, जिसे जब्त कर सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब के पास भेजा गया है।

डॉक्टर की रेप-हत्या केस में CBI का खुलासा

अभिजित मंडल और संदीप घोष से गहनता से पूछताछ में पता चला है कि उन्होंने मामले को नया मोड़ देने के लिए कुछ गलत और गुमराह करने वाली बातें रिकॉर्ड में डाली थीं और सच्चाई से छेड़छाड़ की गई थी। CBI ने कोर्ट को ये भी बताया है कि आरोपियों के मोबाइल का डेटा निकालने के लिए CFSL भेज दिया गया है। इन दोनों के मोबाइल से बहुत सारे सबूत मिल सकते हैं।

बता दें कि CBI ने दोनों आरोपियों की रिमांड पूरी होने के बाद स्पेशल कोर्ट में पेश किया था। और कोर्ट ने दोबारा से इनकी रिमांड बढ़ा दी है। अब दोनों आरोपियों को 30 सितंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में रहना पड़ेगा। इधर, मामले में पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को लेकर इस ऐंगल से जांच कर रही है कि कहीं संजय रॉय, संदीप घोष और अभिजीत मंडल हीं अपराध की साजिश में भी शामिल तो नहीं थे।

बंगाल पुलिस को लेकर CBI के इतने बड़े खुलासे से ममता बनर्जी की टेंशन तो जरूर बढ़ गई होगी। क्योंकि रेप कांड के बाद से ही जनता ममता सरकार और प्रशासन पर दबाव बना रही है। आरोप शुरू से लग रहे हैं कि ममता की पुलिस आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। क्योंकि रेप-हत्या का मामला 9 अगस्त का है, ताला पुलिस को सूचना सुबह 10 बजे दी गई, लेकिन पुलिस अधिकारी ने मामले पर FIR रात 11.30 बजे दर्ज किया। इतना ही नहीं, जब पीड़िता के माता-पिता विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे, तब उन्होंने पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि "पुलिस ने शुरूआत से ही मामले को दबाने की कोशिश की। हमें शव देखने की अनुमति नहीं दी गई, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने तक हमें पुलिस स्टेशन में इंतजार करना पड़ा। बाद में जब शव हमें सौंपा गया, तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हमें पैसे की पेशकश की, जिसे हमने अस्वीकार कर दिया।"

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तो कुल मिलाकर देखें तो पहले FIR दर्ज करने में देरी, फिर माता-पिता को रिश्वत देने की कोशिश और अब CBI का पुलिस को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा। मामले में जैसे-जैसे सच्चाई से पर्दा उठता जा रहा है, वैसे-वैसे सीएम ममता बनर्जी की परेशानी बढ़ती जा रही है।

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